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Measles: खसरे के टीके से चूके 12 फीसदी बच्चे, 30% को सिर्फ एक खुराक
Fri, 10 May 2024 05:45 AM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Fri, 10 May 2024 05:45 AM IST
सार
केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने खसरे के टीकाकरण को लेकर अध्ययन किया। इसमें पता चला है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में सबसे ज्यादा बच्चे टीका से वंचित रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा नागालैंड के 26 फीसदी बच्चे शामिल हैं जबकि अन्य राज्यों में तमिलनाडु में सबसे कम 4.6 फीसदी बच्चे टीके से दूर रहे।
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सांकेतिक तस्वीर।
- फोटो : ANI (File)
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विस्तार
देश के 12 फीसदी बच्चों को खसरे से बचाव के लिए टीके की एक भी खुराक नहीं मिली है जबकि 30 फीसदी बच्चों को केवल एक खुराक दी गई। महज 60 फीसदी बच्चे ही टीके की दोनों खुराक ले पाए हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने खसरा के टीकाकरण में कमी को लेकर गहरी चिंता जताई है।
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केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय और बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने खसरे के टीकाकरण को लेकर अध्ययन किया। इसमें पता चला है कि पूर्वोत्तर के राज्यों में सबसे ज्यादा बच्चे टीका से वंचित रहे हैं, जिनमें सबसे ज्यादा नागालैंड के 26 फीसदी बच्चे शामिल हैं जबकि अन्य राज्यों में तमिलनाडु में सबसे कम 4.6 फीसदी बच्चे टीके से दूर रहे। शोधकर्ताओं ने अध्ययन के लिए राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण 2019-21 का डाटा का इस्तेमाल किया। दो से तीन साल के करीब 43 हजार बच्चों का डाटा विश्लेषण के बाद यह खुलासा किया।
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उत्तर प्रदेश के प्रयागराज में 34 फीसदी बच्चे खुराक से वंचित
अध्ययन में सामने आया कि उत्तर प्रदेश के प्रयागराज और बांदा जिलों में क्रमशः 34 और 32 फीसदी बच्चे टीकाकरण से दूर रहे जबकि हापुड़ और इटावा जिले में यह संख्या सबसे कम 2.6 और 2.1 फीसदी पाई गई। शोधकर्ताओं ने कहा कि अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम सियांग जिले में 50 प्रतिशत पात्र बच्चों को टीकाकरण की कोई खुराक नहीं मिली जबकि निचली दिबांग घाटी जिले में ऐसे मामले केवल 2.8 प्रतिशत दर्ज की गई।
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खसरा आखिर होता क्या है?
खसरा, बचपन में होने वाला संक्रमण है। ये बहुत तेजी से फैलता है और छोटे बच्चों के लिए गंभीर और घातक भी हो सकता है। खसरा के कारण त्वचा पर लाल, धब्बेदार दाने हो जाते हैं जो आमतौर पर पहले चेहरे पर और कान के पीछे दिखाई देते हैं, फिर नीचे छाती और पीठ तक और अंत में पैरों तक फैल जाते हैं। इसके साथ बुखार, सूखी खांसी, नाक बहने, गला खराब होने और कुछ बच्चों में कंजंक्टिवाइटिस की भी समस्या देखी जाती रही है। टीकाकरण इस संक्रामक रोग से बचाव का सबसे कारगर तरीका माना जाता है।