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Cancer: एक साल में 1000 मरीजों को ब्लड कैंसर से मिलेगी मुक्ति, 15 अस्पतालों में पहुंची स्वदेशी सीएआर-टी थेरेपी

Sat, 09 Dec 2023 06:33 AM IST
जलज मिश्रा परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली
परीक्षित निर्भय, नई दिल्ली Published by: जलज मिश्रा Updated Sat, 09 Dec 2023 06:33 AM IST
सार

तकनीक कैंसर मरीज के इम्यून सेल्स पर आधारित है। सीएआर-टी थेरेपी में मरीज से उसके इम्यून सेल्स लिए जाते हैं और फिर आनुवंशिक रूप से प्रयोगशाला में इंजीनियर करते हैं। सामान्य भाषा में कहें तो मरीज के सेल्स को कैंसर से लड़ने लायक बनाते हैं।

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1000 patients will get relief from blood cancer in a year indigenous CAR-T therapy reached 15 hospitals
ब्लड कैंसर। - फोटो : अमर उजाला।

विस्तार

सरकार से अनुमति मिलने के करीब महीने भर बाद ब्लड कैंसर को खत्म करने वाली चिमेरिक एंटीजन रिसेप्टर (सीएआर)-टी सेल थेरेपी अस्पतालों तक पहुंच गई है। देश के 15 अस्पतालों में इस थेरेपी को शुरू किया है, जहां अगले एक साल के भीतर 1,000 मरीजों को ब्लड कैंसर से मुक्ति दिलाने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर भारत में इस तकनीक के लिए मैक्स हेल्थकेयर ने करार किया है। यहां थेरेपी लेने के लिए दो मरीजों ने अपना पंजीयन भी कराया है।

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जानकारी के अनुसार, वर्ष 2018 में आईआईटी बॉम्बे के शोधकर्ताओं ने लिम्फोमा और ल्यूकेमिया ब्लड कैंसर पर अपना अध्ययन शुरू किया और 2021 में सीएआर-टी सेल थेरेपी को क्लीनिकल ट्रायल तक लेकर आए। मुंबई स्थित टाटा कैंसर अस्पताल सहित देश के कई चिकित्सा संस्थानों में क्लीनिकल परीक्षण में यह थेरेपी न सिर्फ सुरक्षित बल्कि 80% से ज्यादा असरदार मिली है।

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इन साक्ष्यों के आधार पर बीते 12 अक्तूबर को केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन ने इस थेरेपी को देश के अस्पतालों तक पहुंचाने की अनुमित दी। इस थेरेपी के लिए सीएआर-टी कोशिकाओं की सोर्सिंग आईआईटी बॉम्बे की इनक्यूबेटेड कंपनी इम्यूनोएक्ट के सहयोग से की जाती है। देश के 15 अस्पतालों के साथ करार किया है।

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क्या है तकनीक, कैंसर से मुक्ति कैसे?
यह तकनीक कैंसर मरीज के इम्यून सेल्स पर आधारित है। सीएआर-टी थेरेपी में मरीज से उसके इम्यून सेल्स लिए जाते हैं और फिर आनुवंशिक रूप से प्रयोगशाला में इंजीनियर करते हैं। सामान्य भाषा में कहें तो मरीज के सेल्स को कैंसर से लड़ने लायक बनाते हैं। एक बार सेल्स कैंसर से लड़ने के लिए तैयार हो जाते हैं तो उन्हें वापस अस्पताल में भर्ती मरीज में प्रवेश करा दिया जाता है। वैज्ञानिक साक्ष्य बताते हैं कि 80 फीसदी से ज्यादा मरीजों में यह थेरेपी सफल रही है और कैंसर से मुक्ति मिली है।

पांच देशों में तकनीक
सीएआर-टी थेरेपी को लेकर दुनिया में पहला प्रयास अमेरिकी वैज्ञानिकों ने वर्ष 2009 से 2010 के बीच शुरू किया। हालांकि इसे सरकारी अनुमति 2018 में दी गई और उसी दौरान भारतीय शोधकर्ताओं ने अध्ययन शुरू किया। अमेरिका और भारत के अलावा यह तकनीक स्पेन, जर्मनी और चीन के पास है। सीएआर-टी थेरेपी का की कीमत करीब 30 से 35 लाख रुपये हो सकती है। अगले कुछ वर्षों में इसके सस्ते होने की उम्मीद की जा सकती है।

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