CAPF: चार साल में भी केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में लागू नहीं हो सका 100 दिन का अवकाश, संसद में मिला ये जवाब
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विस्तार
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को प्रतिवर्ष 100 दिन की छुट्टी मिलेगी, 2019 के अंत में यह घोषणा की गई थी। अब चौथे साल में भी इस योजना को लागू नहीं किया जा सका है। इस योजना में ऐसा प्रावधान बताया गया था कि इसके लागू होने के बाद कोई भी जवान 100 दिन अपने परिवार के साथ व्यतीत कर सकता है। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्स मार्टियर्स वेलफेयर एसोसिएशन द्वारा 2021 में इस बाबत केंद्रीय गृह मंत्रालय से आरटीआई के जरिए यह पूछा गया था कि कितने जवानों को एक साल में 100 दिन की छुट्टी मिली है। कुछ नियमों का हवाला देकर इस सवाल का जवाब नहीं दिया गया। अब संसद के मौजूदा सत्र में इस विषय को लेकर पूछे गए सवाल के जवाब में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा, इस बात का प्रयास चल रहा है कि सीएपीएफ कार्मिक अपने परिवारों के साथ यथासंभव प्रतिवर्ष 100 दिन बिता सकें।
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सीएपीएफ के लगभग 11 लाख जवानों को चार साल बाद भी '100' दिन की छुट्टी नहीं मिल पा रही है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2019 में यह घोषणा की थी कि अर्धसैनिक बलों के जवानों को एक साल में सौ दिन की छुट्टी मिलेगी। कॉन्फेडरेशन ऑफ एक्स पैरामिलिट्री फोर्सेस मार्टियरस वेलफेयर एसोसिएशन ने इस घोषणा को 'जुमला' और जवानों के साथ 'छलावा' करार दिया था। जब आरटीआई के माध्यम से यह जानने का प्रयास किया गया कि अभी तक कितने जवानों ने 'सौ' दिन की छुट्टी का लाभ उठाया है, तो उत्तर देने से मना कर दिया गया। जवाब में कहा गया कि सूचना का अधिकार अधिनियम 2005 के अध्याय 6 के पैरा-24 (1) में निहित प्रावधानों के तहत भ्रष्टाचार और मानवाधिकारों के उल्लंघन के मामलों को छोड़कर अन्य किसी भी प्रकार की सूचना उपलब्ध नहीं कराई जा सकती। पिछले दिनों केंद्रीय गृह मंत्रालय के अंतर्गत 'सीएपीएफ' मुख्यालयों से आरटीआई के तहत वीरता पदक अवार्डी, शहीद हुए जवान एवं सेवानिवृत्त अर्धसैनिकों की सूची मांगी गई थी, वह भी देने से इनकार कर दिया गया।
राज्य मंत्री ने बताया, मिल रही हैं इतनी छुट्टियां
संसद के मौजूदा सत्र में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में सौ दिन की छुट्टी को लेकर सवाल पूछा गया है। राज्यसभा सदस्य नारायण दास गुप्ता ने पूछा कि क्या सरकार ने अर्धसैनिक/सीएपीएफ कार्मिकों को परिवार के साथ रहने के लिए एक वर्ष में 100 दिनों के अवकाश की घोषणा की है। सांसद गुप्ता ने अपने इसी सवाल में यह भी पूछा कि अभी तक अर्धसैनिक बल के ऐसे कितने कार्मिक हैं, जिन्हें इसका लाभ नहीं मिला है, तत्संबंधी अर्धसैनिक बल वार ब्यौरा क्या है और इसके क्या कारण है। गृह मंत्रालय में राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने दोनों सवालों का जवाब चार-पांच लाइनों में दे दिया। उन्होंने कहा, सरकार ने फील्ड में तैनात, केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों 'सीएपीएफ' कार्मिकों के लिए 75 दिन के अवकाश, जिसमें 60 दिन का अर्जित अवकाश और 15 दिन का आकस्मिक अवकाश शामिल है, का प्रावधान किया है। अन्य सरकारी कर्मचारियों के लिए 30 दिन के अर्जित अवकाश और 8 दिन के आकस्मिक अवकाश का प्रावधान है। इस बात का प्रयास चल रहा है कि सीएपीएफ कार्मिक अपने परिवारों के साथ यथासंभव प्रतिवर्ष 100 दिन बिता सकें।
एक अन्य सवाल के जवाब में भी 100 दिन का जिक्र नहीं
लोकसभा सदस्य घनश्याम सिंह लोधी ने सवाल पूछा था कि क्या केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में आपसी गोलीबारी की घटनाओं में लगातार वृद्धि हो रही है। जवानों के जल्दी आवेश में आने के क्या कारण हैं। क्या जवानों को समय पर छुट्टी न देना, इस संबंध में एक कारण है। जवानों को प्रतिवर्ष कितने दिन का अवकाश मिलता है। गृह राज्यमंत्री नित्यानंद राय ने बताया कि हत्या की घटनाओं में वृद्धि का कोई रूझान नहीं है। ऐसी घटनाओं के पीछे आमतौर पर व्यक्तिगत एवं घरेलू समस्या, पारिवारिक मुद्दे, अवसाद और कार्य से जुड़े मामले होते हैं। राय के अनुसार, फील्ड फॉर्मेशन में तैनात कार्मिकों के लिए साठ दिन का अर्जित अवकाश 'ईएल' और पंद्रह दिन का आकस्मिक अवकाश 'सीएल' तथा स्टेटिक फॉर्मेशन में तैनात कार्मिकों के लिए तीस दिन का अर्जित अवकाश 'ईएल' और साठ दिन का आकस्मिक अवकाश 'सीएल' स्वीकार्य है। इसके अलावा लीव रूल्स के अनुसार, अन्य तरह की छुट्टियां भी आवश्यकता के अनुसार प्रदान की जाती हैं।
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केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने की थी घोषणा
एसोसिएशन ने 28 जनवरी 2021 को गृह मंत्रालय में आरटीआई लगाई थी। दिसंबर 2019 में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने सीआरपीएफ की नई बिल्डिंग का नींव पत्थर रखने के दौरान केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों के लिए '100 दिन की छुट्टी' योजना की घोषणा की थी। केंद्रीय गृह मंत्रालय में लगाई गई आरटीआई के जरिए यह पूछा गया कि कितने जवानों को वर्ष 2020 के दौरान 100 दिन का वार्षिक अवकाश दिया गया है। सीआईएसएफ से यह जानना चाहा कि मौजूदा समय में जवानों को मात्र 30 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है, तो ऐसे में सौ दिन की छुट्टी कैसे संभव होगी। इसके लिए जवानों को पहले 60 दिन का वार्षिक अवकाश देना पड़ेगा। एसोसिएशन के पदाधिकारियों का तर्क था, अगर यह नहीं किया जाता है तो सीआईएसएफ जवानों को 100 दिन का अवकाश देना भी संभव नहीं हो सकेगा।
सीआईएसएफ में छुट्टियों को लेकर नहीं मिली सूचना
रणबीर सिंह ने अपने बयान में कहा था, भारतीय सेनाओं के तीनों अंगों व केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में (सीआईएसएफ को छोड़कर) 60 दिन का वार्षिक अवकाश मिलता है। अगर आकस्मिक छुट्टियों की बात की जाए तो सेना के तीनों अंगों में 30 दिन का आकस्मिक अवकाश दिया जाता है। दूसरी तरफ, केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के जवानों को मात्र 15 दिन का आकस्मिक अवकाश देने का प्रावधान है। आरटीआई के माध्यम से यह भी पूछा गया कि क्या सीआईएसएफ जवानों को 30 दिन की बजाय 60 दिन का वार्षिक अवकाश दिया जाएगा। यह सूचना भी नहीं मिल सकी।
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों में 436 जवानों ने की आत्महत्या
केंद्रीय अर्धसैनिक बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, आईटीबीपी, एसएसबी, सीआईएसएफ, असम राइफल्स और राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड में जवानों व अधिकारियों द्वारा आत्महत्या करने के मामले कम नहीं हो पा रहे हैं। गत तीन वर्ष में केंद्रीय अर्धसैनिक बलों के 436 जवानों ने आत्महत्या कर ली है। आत्महत्या करने वालों में CRPF के 154, बीएसएफ के 111, सीआईएसएफ के 63, एसएसबी के 49, आईटीबीपी के 32, असम राइफल के 30 और एनएसजी के छह जवान शामिल हैं। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने संसद में बताया कि इन बलों में आत्महत्याओं और भ्रातृहत्याओं को रोकने के लिए जोखिम के प्रासंगिक घटकों एवं प्रासंगिक जोखिम समूहों की पहचान करने तथा उपचारात्मक उपायों से संबंधित सुझाव देने के लिए एक कार्यबल का गठन किया गया है। कार्यबल की रिपोर्ट तैयार हो रही है।