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चिंताजनक: हर साल गायब हो रहे एक करोड़ हेक्टेयर जंगल, धरती की हर सांस पर खतरा
Wed, 22 Oct 2025 06:58 AM IST
लव गौर
अमर उजाला नेटवर्क
अमर उजाला नेटवर्क
Published by: लव गौर
Updated Wed, 22 Oct 2025 06:58 AM IST
सार
पिछले दशक में वनों की कटाई की रफ्तार धीमी पड़ी है, लेकिन हर साल अब भी 1.09 करोड़ हेक्टेयर जंगल नष्ट हो रहे हैं। यह क्षेत्रफल मिस्र जैसे देश के बराबर है।एफआरए-2025 के मुताबिक 1990 के दशक में हर साल औसतन 1.76 करोड़ हेक्टेयर वन कट रहे थे, जो अब घटकर 1.09 करोड़ हेक्टेयर रह गए हैं।
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हर साल गायब हो रहे 1 करोड़ हेक्टेयर जंगल
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
पिछले दशक में वनों की कटाई की रफ्तार धीमी पड़ी है, लेकिन हर साल अब भी 1.09 करोड़ हेक्टेयर जंगल नष्ट हो रहे हैं। यह क्षेत्रफल मिस्र जैसे देश के बराबर है। रिपोर्ट बताती है कि पृथ्वी की एक-तिहाई भूमि यानी लगभग 4.14 अरब हेक्टेयर क्षेत्र अब भी वनाच्छादित है, जिन पर विश्व की जैव-विविधता, जलवायु संतुलन और करोड़ों लोगों की आजीविका निर्भर है। यह जानकारी संयुक्त राष्ट्र के खाद्य एवं कृषि संगठन (एफएओ) की नई ग्लोबल फॉरेस्ट रिसोर्सेज असेसमेंट 2025 (एफआरए- 2025) रिपोर्ट में की गई है। रिपोर्ट में धरती की हरियाली को लेकर उम्मीद के साथ चेतावनी भी दी गई है।
एफआरए-2025 के मुताबिक 1990 के दशक में हर साल औसतन 1.76 करोड़ हेक्टेयर वन कट रहे थे, जो अब घटकर 1.09 करोड़ हेक्टेयर रह गए हैं। हालांकि वन क्षेत्र के विस्तार की गति भी धीमी हो गई है। वर्ष 2000 से 2015 के दौरान 9.88 मिलियन हेक्टेयर वार्षिक विस्तार अब 6.78 मिलियन हेक्टेयर पर सिमट गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दर्शाता है कि वनों की पुनर्स्थापना के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी वे पर्याप्त नहीं हैं।
आज पृथ्वी की लगभग 32 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है यानी औसतन हर व्यक्ति के हिस्से में केवल 0.5 हेक्टेयर वन है। इनमें से लगभग आधे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित हैं, जो कार्बन भंडारण और वर्षा चक्र में अहम भूमिका निभाते हैं। विश्व के 92 प्रतिशत वन प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित हैं, लेकिन 1990 से अब तक इनमें 324 मिलियन हेक्टेयर की गिरावट आई है।
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प्राथमिक या मूल वनों का क्षेत्रफल अभी लगभग 1.18 अरब हेक्टेयर है। यह पृथ्वी के कुल वनों का एक-तिहाई है। राहत की बात यह है कि 2000 के दशक की तुलना में इन वनों के नुकसान की दर अब आधी रह गई है।
सालाना आग से झुलसते 26 करोड़ हेक्टेयर वन
एफएओ रिपोर्ट में बताया गया है कि औसतन हर साल 261 मिलियन हेक्टेयर भूमि आग से प्रभावित होती है, जिनमें से आधे वन क्षेत्र हैं। साल 2020 में ही कीट, बीमारियां और चरम मौसम के कारण लगभग 41 मिलियन हेक्टेयर वनों को नुकसान पहुंचा। यह संकट विशेष रूप से समशीतोष्ण और उपध्रुवीय क्षेत्रों में अधिक देखा गया।
संरक्षित और प्रबंधित क्षेत्र बढ़े
विश्व के 20 प्रतिशत वन (813 मिलियन हेक्टेयर) अब कानूनी रूप से संरक्षित क्षेत्रों में आते हैं। यह क्षेत्र 1990 से अब तक 251 मिलियन हेक्टेयर बढ़ा है। इसके अलावा, लगभग 2.13 अरब हेक्टेयर वन अब दीर्घकालिक प्रबंधन योजनाओं के अंतर्गत हैं यानी वैश्विक वनों का 55 प्रतिशत हिस्सा। विश्व के 71 प्रतिशत वन अब भी सरकारी स्वामित्व में हैं, जबकि 24 प्रतिशत निजी हाथों में हैं। लगभग 1.2 अरब हेक्टेयर वन केवल उत्पादन के लिए प्रबंधित किए जाते हैं। लकड़ी, बांस, गोंद या अन्य जैविक संसाधनों के रूप में। वहीं, 482 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र जैव-विविधता संरक्षण, 386 मिलियन मृदा-जल संरक्षण और 221 मिलियन सामाजिक सेवाओं के लिए आरक्षित हैं।
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एफआरए-2025 के मुताबिक 1990 के दशक में हर साल औसतन 1.76 करोड़ हेक्टेयर वन कट रहे थे, जो अब घटकर 1.09 करोड़ हेक्टेयर रह गए हैं। हालांकि वन क्षेत्र के विस्तार की गति भी धीमी हो गई है। वर्ष 2000 से 2015 के दौरान 9.88 मिलियन हेक्टेयर वार्षिक विस्तार अब 6.78 मिलियन हेक्टेयर पर सिमट गया है। विशेषज्ञों के अनुसार यह दर्शाता है कि वनों की पुनर्स्थापना के प्रयास जारी हैं, लेकिन अभी वे पर्याप्त नहीं हैं।
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आज पृथ्वी की लगभग 32 प्रतिशत भूमि वन क्षेत्र में आती है यानी औसतन हर व्यक्ति के हिस्से में केवल 0.5 हेक्टेयर वन है। इनमें से लगभग आधे उष्णकटिबंधीय क्षेत्र में स्थित हैं, जो कार्बन भंडारण और वर्षा चक्र में अहम भूमिका निभाते हैं। विश्व के 92 प्रतिशत वन प्राकृतिक रूप से पुनर्जीवित हैं, लेकिन 1990 से अब तक इनमें 324 मिलियन हेक्टेयर की गिरावट आई है।
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प्राथमिक या मूल वनों का क्षेत्रफल अभी लगभग 1.18 अरब हेक्टेयर है। यह पृथ्वी के कुल वनों का एक-तिहाई है। राहत की बात यह है कि 2000 के दशक की तुलना में इन वनों के नुकसान की दर अब आधी रह गई है।
सालाना आग से झुलसते 26 करोड़ हेक्टेयर वन
एफएओ रिपोर्ट में बताया गया है कि औसतन हर साल 261 मिलियन हेक्टेयर भूमि आग से प्रभावित होती है, जिनमें से आधे वन क्षेत्र हैं। साल 2020 में ही कीट, बीमारियां और चरम मौसम के कारण लगभग 41 मिलियन हेक्टेयर वनों को नुकसान पहुंचा। यह संकट विशेष रूप से समशीतोष्ण और उपध्रुवीय क्षेत्रों में अधिक देखा गया।
संरक्षित और प्रबंधित क्षेत्र बढ़े
विश्व के 20 प्रतिशत वन (813 मिलियन हेक्टेयर) अब कानूनी रूप से संरक्षित क्षेत्रों में आते हैं। यह क्षेत्र 1990 से अब तक 251 मिलियन हेक्टेयर बढ़ा है। इसके अलावा, लगभग 2.13 अरब हेक्टेयर वन अब दीर्घकालिक प्रबंधन योजनाओं के अंतर्गत हैं यानी वैश्विक वनों का 55 प्रतिशत हिस्सा। विश्व के 71 प्रतिशत वन अब भी सरकारी स्वामित्व में हैं, जबकि 24 प्रतिशत निजी हाथों में हैं। लगभग 1.2 अरब हेक्टेयर वन केवल उत्पादन के लिए प्रबंधित किए जाते हैं। लकड़ी, बांस, गोंद या अन्य जैविक संसाधनों के रूप में। वहीं, 482 मिलियन हेक्टेयर क्षेत्र जैव-विविधता संरक्षण, 386 मिलियन मृदा-जल संरक्षण और 221 मिलियन सामाजिक सेवाओं के लिए आरक्षित हैं।
पिछले दशक में वनों की कटाई की रफ्तार धीमी पड़ी है, लेकिन हर साल अब भी 1.09 करोड़ हेक्टेयर जंगल नष्ट हो रहे हैं।