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Mizoram: सीएम से मिले 10 कुकी विधायक-नागरिक समाज संगठन, जोरामथंगा बोले- हम अपने भाई-बहनों की मदद के लिए तैयार

Wed, 06 Sep 2023 07:06 PM IST
निर्मल कांत वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, आइजोल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, आइजोल Published by: निर्मल कांत Updated Wed, 06 Sep 2023 07:06 PM IST
सार

Mizoram: मणिपुर के 10 कुकी विधायकों, नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) ने बुधवार को यहां मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा से मुलाकात की। अधिकारियों ने बताया कि जोरमथंगा ने कहा कि वह मणिपुर में हिंसा के कारण लोगों की पीड़ा से बहुत आहत हैं।

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10 Manipur Kuki MLAs, civil society groups meet Mizoram CM
जोरमथंगा - फोटो : एएनआई (फाइल)

विस्तार

मणिपुर के 10 कुकी विधायकों, नागरिक समाज संगठनों (सीएसओ) और राज्य के पहाड़ी इलाकों के संचालन निलंबन (एसओओ) समूहों ने बुधवार को यहां मिजोरम के मुख्यमंत्री जोरामथंगा से मुलाकात की। अधिकारियों ने यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जोरमथंगा ने कहा कि वह मणिपुर में हिंसा के कारण लोगों की पीड़ा से बहुत आहत हैं।

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जोरामथंगा बोले- भाई-बहनों की मदद के लिए तैयार हैं
उन्होंने बताया कि जोरामथंगा ने कहा कि मिजोरम के लोग अपने भाइयों और बहनों की मदद करने के लिए तैयार हैं और भविष्य की कार्रवाई विभिन्न संगठनों और जनता के परामर्श से की जानी चाहिए।

 

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बैठक में मौजूद थे इन संगठनों के प्रतिनिधि
अधिकारियों ने बताया कि बैठक में मंत्री, विधायक, मिजो पीपुल्स कन्वेंशन, कुकी स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन, हमार इनपुई, कमेटी ऑन ट्राइबल यूनिटी, जोमी काउंसिल स्टूडेंट ऑर्गेनाइजेशन और अन्य संगठनों के प्रतिनिधि मौजूद थे।
 

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अलग प्रशासन की मांग कर रहा कुकी समुदाय
मणिपुर के पहाड़ी जिलों के कुकी विधायक एसओओ समूहों और कुकी सीएसओ के साथ मिलकर पूर्वोत्तर राज्य में तीन मई से जातीय हिंसा भड़कने के बाद से एक अलग प्रशासन की मांग कर रहे हैं।
 

अदालत के आदेश के बाद हिंसा के भंवर में फंसा राज्य
मणिपुर मई में उच्च न्यायालय के उस आदेश को लेकर हिंसा के भंवर में फंस गया था, जिसमें राज्य सरकार को गैर आदिवासी मैतई समुदाय को अनुसूचित जनजाति की सूची में शामिल करने पर विचार करने का निर्देश दिया गया था।
 

हिंसा में मारे जा चुके 160 से ज्यादा लोग
इस आदेश के कारण बड़े पैमाने पर जातीय संघर्ष हुए। राज्य में तीन मई को जातीय हिंसा भड़कने के बाद से अब तक 160 से अधिक लोग मारे जा चुके हैं और सैकड़ों लोग घायल हुए हैं। हिंसक झड़पें तब शुरू हुईं, जब बहुसंख्यक मैतई समुदाय की अनुसूचित जनजाति के दर्जे की मांग के विरोध में पहाड़ी जिलों में 'आदिवासी एकजुटता मार्च' का आयोजन किया गया था।

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