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कुगती में ग्लेशियर की चपेट में आने से मरे थे हिमालयन थार
अमर उजाला, भरमौर (चंबा)
Updated Fri, 18 Mar 2016 03:48 PM IST
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जांच के बाद वन विभाग ने बनाई रिपोर्ट
एक दर्जन थार के मरने की पुष्टि की
कहा, बीमारी के नहीं मिले सुबूत
अमर उजाला ब्यूरो
भरमौर (चंबा)। वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एरिया कुगती में मृत पाए गए हिमालयन थार का रहस्य खुल गया है। मौके पर गई वन्य प्राणी व पशुपालन विभाग की टीम ने सभी साक्ष्य जुटा लिए हैं। टीम ने अपनी रिपोर्ट में हिमालयन थार के इतनी संख्या में मरने का मुख्य कारण ग्लेशियर की चपेट में आना बताया है। वन्य प्राणी विभाग के मंडल अधिकारी संजय धीमान ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि टीम को मौके पर एक दर्जन अवशेष मिले हैं। जिनके शरीर में किसी तरह की बीमारी या चोट का निशान नहीं था। यह सभी हिमालयन थार गहरी ढांक में मृत पाए गए। अनुमान यही है कि पानी पीने के लिए थार पहाड़ से नीचे उतरे होंगे और ग्लेशियर के नीचे दबने से उनकी मौत हो गई। जब बर्फ पिघली तो मवेशियों के साथ गए भेड़पालकों को उनके अवशेष नजर आए।
इसकी सूचना वन विभाग को मिली और विभाग ने टीम का गठन कर मौके से सभी साक्ष्य जुटा लिए हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में रिपोर्ट बनाकर आलाधिकारियों को भी भेजी जा चुकी है। हिमालयन थार के अवशेषों से सैंपल भी ले लिए गए हैं और इनकी भी विभाग जांच कर रहा है।
गौरतलब है कि भरमौर के अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी संख्या में हिमालयन थार मौजूद हैं। इनके झुंड मणिमहेश यात्रा करने वाले लोगों को कई बार नजर आ चुके हैं। अक्सर यह झुंड पानी पीने के लिए पहाड़ से नीचे उतरते हैं और कुगती में इनकी मौत को विभाग पानी पीने के दौरान हुए हादसे से जोड़कर देख रहा है।
एक दर्जन थार के मरने की पुष्टि की
कहा, बीमारी के नहीं मिले सुबूत
अमर उजाला ब्यूरो
भरमौर (चंबा)। वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एरिया कुगती में मृत पाए गए हिमालयन थार का रहस्य खुल गया है। मौके पर गई वन्य प्राणी व पशुपालन विभाग की टीम ने सभी साक्ष्य जुटा लिए हैं। टीम ने अपनी रिपोर्ट में हिमालयन थार के इतनी संख्या में मरने का मुख्य कारण ग्लेशियर की चपेट में आना बताया है। वन्य प्राणी विभाग के मंडल अधिकारी संजय धीमान ने इसकी पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि टीम को मौके पर एक दर्जन अवशेष मिले हैं। जिनके शरीर में किसी तरह की बीमारी या चोट का निशान नहीं था। यह सभी हिमालयन थार गहरी ढांक में मृत पाए गए। अनुमान यही है कि पानी पीने के लिए थार पहाड़ से नीचे उतरे होंगे और ग्लेशियर के नीचे दबने से उनकी मौत हो गई। जब बर्फ पिघली तो मवेशियों के साथ गए भेड़पालकों को उनके अवशेष नजर आए।
इसकी सूचना वन विभाग को मिली और विभाग ने टीम का गठन कर मौके से सभी साक्ष्य जुटा लिए हैं। उन्होंने बताया कि इस संबंध में रिपोर्ट बनाकर आलाधिकारियों को भी भेजी जा चुकी है। हिमालयन थार के अवशेषों से सैंपल भी ले लिए गए हैं और इनकी भी विभाग जांच कर रहा है।
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गौरतलब है कि भरमौर के अधिक ऊंचाई वाले इलाकों में भारी संख्या में हिमालयन थार मौजूद हैं। इनके झुंड मणिमहेश यात्रा करने वाले लोगों को कई बार नजर आ चुके हैं। अक्सर यह झुंड पानी पीने के लिए पहाड़ से नीचे उतरते हैं और कुगती में इनकी मौत को विभाग पानी पीने के दौरान हुए हादसे से जोड़कर देख रहा है।
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