रोहतक। लॉक डाउन में गरीब व असहायों की मदद के लिए हर कोई आगे आ रहा है। एक होड़ सी मच गई है लोगों में मदद करने की। यह सोच बहुत अच्छी है, मगर कोरोना से बचाव की उपायों को भूलना या पालन नहीं करना बहुत बड़ी भूल हैं। कहीं, ऐसा नहीं हो कि मदद के लिए आगे बढ़ रहे हाथ ही गरीबों और शहरवासियों के लिए खतरा बन जाए। शनिवार को कुछ व्यापारियों ने एकजुट होकर डीएलएफ कालोनी, जनता कालोनी आदि एरिया में सस्ते दामों पर खाद्यान्न बेचा, जिसे खरीदने को उतनी भीड़ उमड़ी की सोशल सिस्टेंसिंग ही शून्य हो गई। कोरोना वायरस से बचाव के लिए प्रधानमंत्री ने 14 अप्रैल तक देश में लॉक डाउन किया हुआ है। जिसके चलते शासन-प्रशासन, स्वयं सेवी संगठन, सामाजिक संगठन, धार्मिक संगठन गरीबों की मदद में जुट गए हैं। ये संगठन सुबह-शाम खाना बनवाकर गरीबों के घरों में पहुंचा रहे हैं ताकि पेट भरने के लिए लोग घरों से बाहर नहीं निकलें। यही नहीं, बेघर, प्रवासियों के लिए रहने की भी व्यवस्था प्रशा्सन की तरफ से की गई है ताकि जरा सी चूक होने पर कोरोना फैल नहीं जाए। गरीबों की मदद के लिए लगातार हाथ उठने की वजह से कोई खाना खिला रहा है तो कोई खाद्यान्न सामग्री दान कर रहा है। इसकी कड़ी में जुड़ते हुए शनिवार को कुछ व्यापारियों ने गरीबों को सस्ते दामों पर आटा, तेल, आलू, प्याज, चीनी, चायपत्ती आदि बेचना शुरू किया। एक वाहन में सामान लादकर वह डीएलएफ कालोनी एरिया में खड़े हो गए। जैसे ही गरीबों को पता चला कि आधे दाम पर सामान बिक रहा है, वैसे ही वहां खरीददारों की भीड़ उमड़ गई। भीड़ को देख सस्ते दामों पर खाद्यान्न बेचने वालों ने महिला और पुरुषों की अलग-अलग लाइन तो बनवा दी मगर कोरोना से बचाव के अहम् उपाय सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करना और कराना दोनों ही भूल गए। जिसकी परिणाम यह हुआ कि लाइन में खड़े लोगों के बीच में पहले सामान खरीदने को लेकर धक्कामुक्की की स्थिति बनी रही। सुबह 10 बजे से दोपहर डेढ़ बजे तक सामान बांटा गया। कमोबेश यही स्थिति जनता कालोनी के पास सामान बांटने के दौरान हुई। 0- किस दाम पर क्या बेचा चीनी 20 रुपये, एक लीटर सरसों का तेल 50 रुपये, 10 रुपये किलो आलू, प्याज, 20 रुपये की चायपत्ती 10 रुपये में, पांच किलो आटा 65 रुपये में।