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72 घंटे का अल्टीमेटम, फिर शुरू होगा आंदोलन

Tue, 15 Mar 2016 02:21 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक
ब्यूरो/अमर उजाला,रोहतक Updated Tue, 15 Mar 2016 02:21 AM IST
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memorandum handed over to DC Atul Kumar, jat ultimatum, jaat andolan in rohtak
डीसी अतुल कुमार को सात सूत्रीय मांगों का ज्ञापन सौंपते जाट समुदाय के लोग। - फोटो : amar ujala
जाट आरक्षण शीघ्र लागू नहीं किया गया और दर्ज मुकदमे वापस नहीं हुए तो जाट चुप नहीं बैठेंगे। सोमवार को जाट भवन में जुटे जाटों ने सरकार और पुलिस-प्रशासन को 72 घंटे का अल्टीमेटम दिया है। भारी पुलिस फोर्स के बीच जुटे जाटों ने एकजुट होकर चेतावनी दी कि यदि इस अवधि में उनकी मांगें पूरी नहीं हुई तो दोबारा से पूरे प्रदेश में आंदोलन होगा। बैठक में किसी ने कहा कि जाट आंदोलन शांति पूर्वक रहेगा तो किसी ने कहा कि जहां पर आंदोलन रोका गया है, वहीं से दोबारा शुरुआत की जाएगी।
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इससे पहले, पूर्व निर्धारित घोषणा के अनुसार सोमवार सुबह करीब 9 बजे जिले भर से जाट समाज के लोग यहां सेक्टर 1 स्थित जाट भवन में पहुंचने शुरू हो गए। 11 बजे तक जाट भवन के बाहर गेट पर दिए गए सांकेतिक धरने में करीब दो हजार लोग पहुंच गए। खुले मंच से वक्ताओं ने विचार रखने शुरू किए। वक्ताओं ने सांसद राजकुमार सैनी के साथ सरकार को भी हिंसा का जिम्मेदार ठहराया। साथ ही कहा कि सोची-समझी साजिश के तहत जाटों को शिकार बनाया गया है।
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कुछ लोग जाटों को बदनाम कर रहे हैं। हिंसा में जाटों के नाम पर दूसरे लोगों ने लूटपाट की है। ढाई बजे तक यही दौर चलता रहा। कुछ लोगों ने आवेश में आकर विवादास्पद बयानबाजी करनी शुरू कर दी, लेकिन आयोजकों ने उन्हें समझाकर शांत कर दिया। आयोजकों ने साफ कर दिया कि मंच पर आकर कोई भी विवादित बयानबाजी नहीं करेगा। ढाई बजे डीसी अतुल कुमार और एसपी शशांक आनंद मौके पर पहुंचे।
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जाटों ने डीसी को सौंपे सात सूत्रीय ज्ञापन में मांग रखी। जाट समाज की ओर से प्रधानमंत्री के नाम सौंपे गए ज्ञापन में जाटों ने खुला अल्टीमेटम दे डाला। चेताया कि यदि 72 घंटे के अंदर मांगें पूरी नहीं होती तो प्रदेश में फिर से आंदोलन शुरू होगा, जिसकी जिम्मेदार सरकार होगी। डीसी ने आश्वासन दिया कि उनकी मांगों को सरकार तक पहुंचा दिया जाएगा। लगभग दस मिनट रुकने के बाद दोनों अधिकारी वहां से निकल गए। इसके बाद भी कुछ देर तक सांकेतिक धरना चलता रहा और शाम चार बजे कार्यक्रम खत्म किया गया। जाटों के कार्यक्रम को लेकर पुलिस-प्रशासन भी पूरी तरह मुस्तैद रहा। जाट भवन के चारों तरफ अर्द्ध सैनिक बल ने डेरा डाले रखा। शहर के अंदर और बाहरी रास्तों पर भारी पुलिस बल तैनात किया गया था।

ये हैं सात सूत्रीय मांगें
  1.  प्रदेश की जातिवादी सरकार और अधिकारी जाट बिरादरी के युवाओं और अन्य लोगों को झूठे मुकदमे में फंसाने का प्रयास कर रहे हैं। सरकार इन सभी मुकदमों को तत्काल प्रभाव से वापस ले।
  2.  जाट बिरादरी के लोगों को यदि पूछताछ के लिए बुलाया जाता है तो स्थानीय लोगों के सामने ही पूछताछ की जाए।
  3.  जाट आंदोलन के दौरान मारे गए लोगों को एक-एक करोड़ का मुआवजा व आश्रितों को सरकारी नौकरी दी जाए।
  4.  18 फरवरी को जाट कॉलेज और नेकीराम कॉलेज के हॉस्टल में घुसकर जाति विशेष के बच्चों की पहचान कर उनकी पिटाई की गई। डीएसपी समेत सभी दोषी पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया जाए।
  5.  सरकार और उनके मंत्रियों, विधायकों व सांसदों द्वारा किया जा रहा दुष्प्रचार तुरंत रोका जाए।
  6.  जाट युवाओं को मुकदमों में फंसाकर जेल में डाला जा रहा है। सभी गिरफ्तार युवकों को रिहा किया जाए।
  7.  जाट समाज किसी भी स्तर पर जातिवादी विचारधारा में विश्वास नहीं करता, लेकिन जिस प्रकार सांसद राजकुमार सैनी ने समाज में यह जहर खोला है, उसके लिए उन्हें तुरंत गिरफ्तार किया जाए।
धरना शुरू होते ही पहुंच गए थे तहसीलदार 
जाट भवन में चल रहे सांकेतिक धरने को लेकर पुलिस-प्रशासन कोई लापरवाही नहीं बरतना चाहता था। इसलिए तहसीलदार गुलाब सिंह कार्यक्रम शुरू होने के कुछ देर बाद ही वहां पहुंच गए थे। तहसीलदार वहीं पर खड़े रहे और पूरा कार्यक्रम देखा। मेजर मेहर सिंह को सभापति बनाया गया था।
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