एनडीआरआई ने न प्रोजेक्ट संभाला और न ही बजट
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
एनडीआरआई में एक करोड़ 20 लाख रुपये की धोखाधड़ी मामले में संबंधित अधिकारियों की गंभीर लापरवाही सामने आई है। नेशनल इनोवेशन इनकलाइमेंट रेजियलियंट एग्रीकल्चर (निकरा) प्रोजेक्ट के तहत आया बजट कर्मचारियों ने कब अपने निजी खातों में डाल लिया, इसका पता संबंधित अधिकारियों को नहीं लगा। अब साल के अंत में क्लोजिंग के दौरान प्रोजेक्ट और खातों का हिसाब किताब लगाया गया तो एनडीआरआई के खाते से रकम ही नहीं मिली। इससे अधिकारियों के पसीने छूट गए और पूरे मामले की जांच पड़ताल कर पुलिस को शिकायत दी गई। मामले की गंभीरता से जांच हुई तो इन पांच आरोपियों के अलावा संस्थान के अन्य अधिकारी भी नप सकते हैं, जिनके नेतृत्व में यह प्रोजेक्ट चल रहा था।
गौरतलब है कि एनडीआरआई की विजिलेंस अधिकारी डॉ. स्मिता सिरोही की शिकायत पर सिविल लाइन थाना पुलिस ने एनडीआरआई के दो रिसर्च एसोसिएट अमरेंद्रा श्रीवास्तव, सुखविंद्र, एक स्टूडेंट मनप्रीत कौर, एक सरकारी क्लर्क दीपक और एक अन्य विक्रम के खिलाफ धोखाधड़ी सहित विभिन्न धाराओं के तहत केस दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। इसमें कई अधिकारियों पर गाज गिरनी तय है। एनडीआरआई में चर्चा जोरों पर है और कोई भी अधिकारी व कर्मचारी इस मामले में मुंह खोलने को तैयार नहीं है।
प्रोजेक्ट पर तीन साल से चल रहा था काम
बता दें कि एनडीआरआई में निकरा प्रोजेक्ट पर करीब तीन साल से काम चल रहा था। इस प्रोजेक्ट के खाते में जमा एक करोड़ 20 लाख रुपये कर्मचारियों ने प्लानिंग के तहत अपने-अपने निजी खातों में डाल लिया। पुलिस जांच में सामने आया है कि कर्मचारियों ने निजी खातों में रकम करीब नौ माह पहले ही डाल ली थी। यदि इस प्रोजेक्ट के अधिकारी हिसाब किताब व अन्य जानकारी पूरी लेते रहते तो कर्मचारी इसमें गबन नहीं कर पाते।
डॉ. स्मिता सिरोही ने शिकायत में उल्लेख किया है कि आरोपी सुखविंद्र सिंह के अकाउंट में करीब 33 लाख रुपये, मनप्रीत कौर के खाते में करीब 37 लाख रुपये, विक्रम के खाते में करीब 45 लाख रुपये, अमरेंद्रा श्रीवास्तव के खाते में करीब आठ लाख रुपये, दीपक कुमार के खाते में करीब एक लाख रुपये अपने-अपने खाते में जमा किये हैं। अब सवाल यह है कि क्या किसी भी अधिकारी ने इतनी बड़ी रकम कहां पर खर्च हुई, इसका ब्यौर नहीं लिया? क्या किसी भी अधिकारी ने प्रोजेक्ट की सुध नहीं ली? सवाल यह भी है कि इस प्रोेजेक्ट के अलावा अन्य प्रोजेक्ट के हालात क्या हैं?
डायरेक्टर ने मीटिंग बुलाकर किया मंथन
एनडीआरआई के डायरेक्टर डॉ. एके श्रीवास्तव ने गड़बड़ उजागर होते ही मीटिंग बुलाई है। धोखाधड़ी के मामले में मंथन किया और किन-किन की लापरवाही है उसके लिए विभागीय जांच भी शुरू कर दिया है। इस मामले में एनडीआरआई के अधिकारी व कर्मचारी चुप्पी साध रहे हैं और इस मामले में किसी प्रकार का कोई पत्ता नहीं खोल रहे हैं। सूत्रों का कहना है कि संस्थान के निदेशक ने इसे घोर लापरवाही मानते हुए कार्रवाई करने का मन बना लिया है।
आरोपी फरार, टीमें दे रही दबिश
पांचों आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए थाना सिविल लाइन पुलिस की टीमें छापेमारी कर रही हैं। फिलहाल आरोपी फरार हैं। पुलिस का कहना है कि पिछले काफी समय से आरोपी संस्थान में नहीं हैं। ऐसे में उनकी तलाश की जा रही है। उधर, पुलिस इस केस से संबंधित अन्य दस्तावेज भी संस्थान से मांगने की तैयारी कर रहा है।
वर्जन
एनडीआरआई के मामले की जांच शुरू कर दी है। शिकायत के मुताबिक नौ माह पहले कर्मचारियों ने अपने खातों में पैसा जमा कर लिया है। इस मामले ही हर पहलू पर जांच पड़ताल की जा रही है। आरोपियों को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
- प्रतीक कुमार, सिविल लाइन थाना प्रभारी।