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Hindi News ›   Fact Check ›   Viral video of beating of Dalit girl in Uttar Pradesh turns out to be fake

Fact Check: यूपी में दलित लड़की को मंदिर का पानी पीने पर पीटने का दावा फर्जी, जानें वायरल वीडियो का सच

Tue, 16 Apr 2024 06:43 PM IST
मिथिलेश नौटियाल स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला Published by: मिथिलेश नौटियाल Updated Tue, 16 Apr 2024 06:43 PM IST
सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर इस वीडियो को जातिवाद से जोड़कर पोस्ट किया गया है। दावा किया गया है एक दलित लड़की को मंदिर का पानी पीने पर ठाकुर समाज के लोगों ने बुरी तरह पीटा। यह दावा पूरी तरह से भ्रामक है।

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Viral video of beating of Dalit girl in Uttar Pradesh turns out to be fake
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में दिख रहा है कि कुछ लोग एक नाबालिग लड़की को डंडे से बुरी तरह पीट रहे हैं। इस घटना को जातिवाद का रंग देकर दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में दलित समाज की 8 साल की एक लड़की मंदिर में बिना अनुमति के पानी पीने गई थी। इसके बाद ठाकुरों ने उसे बुरी तरह पीट दिया। इस वीडियो को 78,000 से अधिक बार देखा गया है। 

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क्या है दावा 
इस वीडियो को अनिल कुमार नाम के वैरिफाइड अकाउंट से शेयर किया गया है। अकाउंट को खंगालने से पता चलता है कि अनिल कुमार राजस्थान में भीम आर्मी के पूर्व प्रदेश आईटी सेल प्रचारक रह चुके हैं। उन्होंने दावा किया है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश का है, जहां 8 साल की एक दलित लड़की को सिर्फ इसलिए पीटा गया क्योंकि उसने बिना अनुमति के मंदिर से पानी पी लिया था। यह भी दावा किया गया है कि लड़की को पीटने वाले लोग ठाकुर समाज के हैं। 
 



इसके अलावा पंकज माथुर नाम के सोशल मीडिया यूजर ने भी कुछ ऐसे ही दावे के साथ इस वीडियो को शेयर किया है। 
 
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पड़ताल 
जब हमने गूगल लेंस पर इस वीडियो के की-फ्रेम को रिवर्स इमेज सर्च किया, तो कुछ रिजल्ट सामने आए। पड़ताल में हमने पाया कि यह खबर दिसंबर 2021 की कुछ मीडिया रिपोर्ट्स मिलीं। 29 दिसंबर 2021 को प्रकाशित एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार यह घटना अमेठी की है, जहां मोबाइल चोरी के आरोप में एक लड़की को बेरहमी से पीटा गया था। इसके बाद पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया था। 

पड़ताल को आगे बढ़ाते हुए हमने अनिल कुमार के ट्वीट को फिर से खंगाला। पता चला कि अमेठी पुलिस ने भी इस घटना को पुराना और भ्रामक बताया है। 
 

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पड़ताल का नतीजा
पड़ताल से स्पष्ट है कि सोशल मीडिया यूजर्स का दावा भ्रामक है। इस घटना में मंदिर से पानी पीने पर दलित लड़की की पिटाई किए जाने का कोई मामला नहीं है और ना ही इस घटना का जातिवाद से कोई लेना-देना है।
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