Fact Check: फर्जी है रूस में 10 लाख भारतीय मजदूरों को भर्ती करने की योजना रद्द करने का दावा, पढ़ें पड़ताल
Fact Check: सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जा रही है। पोस्ट को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि रूस ने 10 लाख भारतीय मजदूरों को भर्ती करने की योजना रद्द कर दी है, अब चीन के कुशल श्रमिकों की भर्ती की जाएगी। हमारी पड़ताल में यह दावा गलत निकला है।
विस्तार
सोशल मीडिया पर एक पोस्ट शेयर की जा रही है। इस पोस्ट को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि रूस ने 10 लाख भारतीय मजदूरों को भर्ती करने की योजना रद्द कर दी है। अब चीन के श्रमिक भर्ती किए जाएंगे। कहा जा रहा है कि पहले रूस ने भारतीय मजदूरों को रूस में नौकरी देने का वादा किया था लेकिन अब रूस ने इससे इंकार कर दिया और चीन से मजदूरों को भर्ती करने की तैयारी में है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। हमारी पड़ताल में यह साफ है कि रूस ने दस लाख भारतीय मजदूरों की भर्ती की किसी भी आधिकारिक योजना को रद्द नहीं किया है। जांच में सामने आया है कि ऐसी कोई सरकारी योजना कभी अस्तित्व में ही नहीं है। पड़ताल में यह भी पता चला कि यह दावा यूराल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख आंद्रे बेसेदिन के एक बयान से आया है, जिसका रूसी श्रम मंत्रालय ने खंडन किया है।
क्या है दावा
इस पोस्ट को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि रूस ने दस लाख भारतीय मजदूरों के भर्ती की योजना को रद्द कर दिया है। अब रूस ने चीन से कुशल मजदूरों को लाने का फैसला लिया है।
रविंदर कपूर (@RavinderKapur2) नाम के एक एक्स यूजर ने इस पोस्ट को शेयर करके लिखा “रूस ने दस लाख भारतीय कामगारों की भर्ती करने की योजना रद्द कर दी है - अब वह चीन से कुशल कामगारों को लाएगा।” पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
इस तरह के कई और दावों के लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने कीवर्ड के माध्यम से सर्च किया। यहां हमें 9 जुलाई 2025 की एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट को यूराल चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (यूसीसीआई) के प्रमुख आंद्रे बेसेदिन ने ईएएन के एक पत्रकार से बातचीत के हवाले से लिखा गया था। रिपोर्ट में बताया गया था कि “स्वेर्दलोव्स्क क्षेत्र में, उच्च योग्य कर्मियों की कमी की समस्या का समाधान भारत, श्रीलंका और उत्तर कोरिया के प्रवासियों द्वारा किया जाएगा।” आंद्रे बेसेदिन के इस बयान के बाद यह चर्चा तेज हो गई कि भारत से 10 लाख मजदूरों को रूस लेकर आया जाएगा।
रूस के श्रम मंत्रालय की तरफ से यह साफ किया गया कि इस तरह का कोई अधिकारिक फैसला सरकार की तरफ से नहीं लिया गया था। आंद्रेई बेसेदिन के बयान के बाद यह सारी चीजें गलत तरीके से शेयर की जाने लगी थीं।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल से यह साफ है कि रूस की सरकार की तरफ से भारत से 10 लाख श्रमिकों को रूस में लाने का कोई आधिकारिक फैसला नहीं लिया गया था, जो इसे रद्द करने की जरूरत पड़े। यह साफ है कि आंद्रेई बेसेदिन के द्वारा गलत जानकारी प्रसारित की जा रही थी।