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Hindi News ›   India News ›   Khabaron Ke Khiladi How many facts and how much politics are there in the changes made in ncert books

Khabaron Ke Khiladi: इतिहास की किताबों में हुए बदलावों में कितने तथ्य और कितनी सियासत, विश्लेषकों से जानें

Sat, 19 Jul 2025 09:24 PM IST
संध्या न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: संध्या Updated Sat, 19 Jul 2025 09:24 PM IST
सार

एनसीईआरटी की इतिहास की किताब में बदलाव को लेकर राजनीतिक बहस काफी बढ़ चुकी है। इतिहास के साथ छेड़छाड़ कर मुगल काल को बढ़ा चढ़ाकर बताना इस बदलाव का मुख्य कारण है। एक पक्ष का कहना है कि इतिहास में पहले छेड़छाड़ हुई है। दूसरे पक्ष का कहना है कि अब इतिहास को बदला जा रहा है। 

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Khabaron Ke Khiladi How many facts and how much politics are there in the changes made in ncert books
खबरों के खिलाड़ी। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति, 2020 के तहत पाठ्यक्रम में बदलाव के साथ ही नई संपादित किताबों का प्रकाशन शुरू कर दिया है। इसमें कक्षा आठ की सामाजिक विज्ञान की किताब में दिल्ली सल्तनत से लेकर मुगलों के इतिहास को लेकर कई पुरानी चीजें हटा दी गई हैं, जबकि कुछ नए तथ्य जोड़े गए हैं। इसे लेकर इस पूरे हफ्ते सियासत होती रही। सत्ता पक्ष और विपक्ष पर आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। इस हफ्ते खबरों के खिलाड़ी में इसी पर चर्चा हुई। चर्चा के लिए वरिष्ठ पत्रकार विनोद अग्निहोत्री, सुनील शुक्ल, अवधेश कुमार, विजय त्रिवेदी और बिलाल सब्जवारी मौजूद रहे।   

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अवधेश कुमार:  यह कोई पहली बार नहीं है। एनसीआरटी ने डेढ़ साल पहले जब समाजिक विज्ञान की किताबों में परिवर्तन किया था तब भी इसी तरह का विवाद हुआ था। बच्चों का ध्यान रखते हुए इन किताबों को लिखने की कोशिश की गई है कि उन्हें सच्चाई का ज्ञान भी हो और उनके ऊपर कोई नकारात्मक प्रभाव भी नहीं पड़े। अकबर का जो एक पहलू था जिसमें उसने हिंदू राजाओं से वैवाहिक संबंध बनाए। उसने जजिया हटाया, इन बातों को एनसीईआरटी से हटाया नहीं गया है, लेकिन जिन पहलुओं का जिक्र पहले नहीं किया गया था अब उन बातों को भी अब शामिल किया गया है। 

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विजय त्रिवेदी:  इतिहास है जीतने की कहानी, हारने की कहानियां इतिहास में नहीं लिखी जाती हैं। दूसरा जो शासन में है वो उस इतिहास को अपने हिसाब से लिखता है। दोनों बातें होती हैं, लेकिन आप शासक के तौर पर किस नजर से देखते हैं वो हम-आप इतिहास में पढ़ते हैं। इतिहास को शासन की नजर से देखना चाहिए। मुझे लगता है कि ये एक्सरसाइज अकबर को डिमीन करने की है। इतिहास फैक्ट्स है ही नहीं इतिहास केवल शासक का नजरिया है। 

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सुनील शुक्ल: इतिहास लिखा नहीं जाता है, इतिहास होता है। इतिहास हमारे आपके देखने का नजरिया है। अकबर के जमाने में ही तानसेन और टोडरमल हुए हैं। सरकारों का काम इतिहास लिखना नहीं होता है। सरकारें जब इतिहास लिखने की कोशिश करती हैं तब इस तरह से केवल अपने एजेंडे के हिसाब से बातें लिखी जाती हैं। सवाल इंटेशन का है। आप अपने एजेंडे को चलाने के लिए इतिहास के साथ छेड़छाड़ मत करिए। 


बिलाल सब्जवारी:  किसी भी इतिहास का आप क्रिटिकल एनालिसिस करते हैं। इस क्रिटिकल एनालिसिस को इतिहास किस दृष्टिकोण से देखते हैं उसे भी हमें देखने की जरूरत है। अकबर के बारे में खुद शिवाजी के पत्र नेशनल म्यूजियम में हैं जिसमें वो अकबर की तारीफ करते हैं। जो इतिहास किताबों में अब शामिल किया गया है क्या उसका इतिहासकारों ने क्रिटिकल एनालिसिस किया है। अगर ऐसा है तो इसका स्वागत किया जाना चाहिए। 


विनोद अग्निहोत्री: कौन महान है और कौन महान नहीं है ये हर व्यक्ति के नजरिए से तय होता है। राजा बनने की प्रक्रिया के दौरान अकबर ने बहुत सी क्रूरताएं की हैं। कोई भी व्यक्ति हो राजा बनने की प्रक्रिया में इस तरह की क्रूरताएं करता था। यह कहना कि हिंदू राजाओं के बारे में बताया नहीं गया ये बिलकुल गलत है। इतिहास के अप्रिय प्रसंग भी होते हैं और प्रिय प्रसंग भी होते हैं। ये कहना कि इतिहास को छुपाया गया, ये गलत है।


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