फैक्ट चेक: फ्रांस में प्रदर्शन के छह साल पुराने वीडियो को अभी का बताकर किया जा रहा शेयर
फैक्ट चैक: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह फ्रांस में हो रहे प्रदर्शन के दौरान का है। हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को छह साल पुराना पाया है।
विस्तार
फ्रांस में इन दिनों प्रदर्शन हो रहे है। दरअसल, फ्रांस में स्कूलों के लिए ज्यादा फंड की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन मंगलवार को देशव्यापी प्रदर्शन में बदल गया। सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, पूरे देश में 2.66 लाख लोगों ने प्रदर्शन किया, जिनमें अकेले पेरिस में 56 हजार लोग शामिल थे। छात्रों ने कई हाईस्कूलों की नाकेबंदी की, जबकि मार्सेई, स्ट्रासबर्ग और दूसरे शहरों में बड़ी संख्या में लोग झंडे और पोस्टर लेकर सड़कों पर उतरे। ये प्रदर्शन पिछले तीन हफ्ते से जारी हैं। इसी बीच सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में लोग आगजनी करते नजर आ रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह फ्रांस में इस वक्त हो रहे प्रदर्शन के दौरान का है।
अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वायरल वीडियो छह साल पुराना है। इसे अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है।
क्या है दावा
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि यह फ्रांस का है।
पंडित मनीष शुक्ला (@manishBJPUP) नाम के एक्स यूजर ने लिखा, ‘फ्रांस के हालात दिन प्रतिदिन खराब होते जा रहे हैं। इसका कारण अवैध घुसपैठिए हैं। पहले यहां भी तमाम फ्रांसीसियों ने इन घुसपैठियों को मदद की, मानवीय आधार पर बसने में सहायता की। आज वही फ्रांस को जला रहे हैं। बहाना स्टूडेंट्स स्टूडेंट्स की समस्याएं भारत में भी जो लोग एसआईआर का विरोध कर रहे हैं। उनकी दिल की इच्छा भी भारत को जलाना है, जिसमें तमाम राजनैतिक दल, टुकड़े, टुकड़े गैंग, मोमबत्ती गैंग शामिल है, सबको सतर्क होना चाहिए। देश बचेगा तो सब बचेंगे, देश उन्नति करेगा तो सब लोग उन्नति करेंगे।’ पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

इसी तरह के अन्य पोस्ट के लिंक आप यहां देख सकते हैं। वहीं, आर्काइव लिंक आप यहां देख सकते हैं।
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें ग्लोबल न्यूज की रिपोर्ट मिली। यहां हमें वायरल क्लिप देखने को मिली। यह वीडियो 28 नवंबर 2020 को साझा किया गया। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि पेरिस में पुलिस हिंसा और सुरक्षा बलों के खिलाफ हजारों लोगों के विरोध-प्रदर्शन के दौरान आंसू गैस छोड़ी गई और आगजनी हुई।

इसके बाद हमें chinadailyhk की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 30 नवंबर 2020 को प्रकाशित की गई है। इसके साथ ही यहां बताया गया है कि पेरिस में पुलिस द्वारा एक अश्वेत व्यक्ति की बुरी तरह पिटाई के बाद, पुलिस अधिकारियों की फिल्मिंग पर रोक लगाने वाले एक प्रस्तावित कानून और नस्लीय भेदभाव के खिलाफ शनिवार को पूरे फ्रांस में लाखों लोग सड़कों पर उतर आए। एक विवादित नियम, जो मुख्य रूप से राष्ट्रीय सुरक्षा कानून की धारा 24 है, के तहत ड्यूटी पर तैनात पुलिस अधिकारियों की तस्वीरें या वीडियो बुरी नीयत से फैलाने को अपराध माना गया है। इसके लिए 45,000 यूरो (US$53,800) तक का जुर्माना और एक साल की जेल की सजा हो सकती है।
पेरिस में प्रदर्शनकारियों पर पुलिस ने आंसू गैस और स्टन ग्रेनेड छोड़े। भीड़ में से कुछ लोगों ने पुलिस पर पत्थर और पटाखे फेंके, जिसके बाद झड़पें शुरू हो गईं। कुछ कारों और अखबार के एक कियोस्क में आग लगा दी गई। दर्जनों लोगों को गिरफ़्तार किया गया।

पड़ताल का नतीजा
हमने अपनी पड़ताल में वायरल वीडियो को छह साल पुराना पाया है।