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विचार: एआई से सेमीकंडक्टर तक- भविष्य गढ़ रहा उत्तर प्रदेश

Mon, 21 Sep 2026 06:22 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र प्रो. पुनीत कुमार
प्रो. पुनीत कुमार Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Mon, 21 Sep 2026 06:22 PM IST
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Uttar Pradesh Future Scope From AI to Semiconductors Deep Tech Yogi Govt Opinion Article
लखनऊ में बनेगी एआई सिटी। - फोटो : डेमो पिक।
तकनीक ही उत्तर प्रदेश की विशाल युवा आबादी को कौशल और अवसर से जोड़कर आर्थिक शक्ति में बदल सकती है। ये निवेश, नवाचार और रोजगार की नई राहें दिखा सकती है। राज्य आज इसमें समर्थ दिख रहा है। अर्थव्यवस्था, रोजगार और सुशासन की नई धुरी के लिए भी यह सोच निर्णायक है। 
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निरंतर प्रयासों की परिणति आज इलेक्ट्रॉनिक्स, सेमीकंडक्टर, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, रोबोटिक्स और डीप-टेक को एक साझा दृष्टि से देखने के रूप में सामने है और इसीलिए पूरे प्रदेश की तस्वीर बदलती दिख रही है। उत्तर प्रदेश की सबसे बड़ी पूंजी उसकी विशाल आबादी और युवा कार्यबल है। सरकार ने इस ऊर्जा को दिशा देने का काम किया है। लखनऊ में देश की अग्रणी ‘एआई सिटी’ के लिए भूमि चिह्नित की जा चुकी है और सात 'सेंटर्स ऑफ एक्सीलेंस' युवाओं को एआई, ब्लॉकचेन, 5जी-6जी जैसी तकनीकों में दक्ष बना रहे हैं। यह उस भावना का प्रतीक है कि प्रदेश अब केवल तकनीक का उपभोक्ता नहीं, बल्कि उसका निर्माता बनना चाहता है।
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डेटा और डिजिटल आधारभूत ढांचे की मजबूती के बिना यह संभव नहीं था। डेटा नई सदी का सबसे बड़ा संसाधन है,और उत्तर प्रदेश इस दिशा में तेजी से आगे बढ़ा है। गाजियाबाद के सीईएल परिसर में 30 मेगावाट क्षमता का 'ग्रीन डेटा सेंटर' इस बात का प्रमाण है कि प्रदेश विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन बनाकर चल रहा है। स्मार्ट कूलिंग और रेनवाटर हार्वेस्टिंग जैसी तकनीकों से युक्त यह केंद्र दिखाता है कि आधुनिकता और जिम्मेदारी साथ-साथ चल सकते हैं। इसके अलावा 30 हजार करोड़ रुपये के निवेश से आठ डेटा सेंटर पार्क विकसित किए जा रहे हैं। नोएडा-ग्रेटर नोएडा जैसे क्षेत्र बड़े डेटा सेंटर क्लस्टर के रूप में स्थापित हो रहे हैं जो प्रदेश के डिजिटल भविष्य की नींव का काम करेंगे।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सेमीकंडक्टर ने राज्य में आत्मनिर्भरता की नई इबारत लिखी है। देश में बनने वाले कुल मोबाइल फोन का 55 प्रतिशत हिस्सा अकेले उत्तर प्रदेश में निर्मित हो रहा है और देश की 60 प्रतिशत से अधिक इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट निर्माण इकाइयां इसी राज्य में सक्रिय हैं। सेमीकंडक्टर क्षेत्र में भी प्रदेश की उपलब्धियां महत्वपूर्ण हैं। यमुना एक्सप्रेसवे क्षेत्र में साढ़े तीन हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश वाली सेमीकंडक्टर यूनिट की आधारशिला रखी जा चुकी है। उत्तर प्रदेश 'सेमीकंडक्टर नीति-2024' घोषित करने वाला देश का चौथा राज्य बन चुका है। यमुना एक्सप्रेसवे औद्योगिक विकास प्राधिकरण क्षेत्र के सेक्टर-28 में इंडिया चिप प्राइवेट लिमिटेड की सुविधा इस बात की गवाह है कि प्रदेश केंद्र सरकार के महत्वाकांक्षी सेमीकॉन इंडिया प्रोग्राम 2.0 का एक भरोसेमंद साझीदार बनकर उभरा है।

इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में 200 से अधिक कंपनियों की मौजूदगी, 43 हजार करोड़ रुपये से अधिक का निवेश और तीन लाख से ज्यादा रोजगार के अवसर, यह सब मिलकर प्रदेश की क्षमता को दर्शाते हैं। ऐसी क्षमता जिसमें एलजी, हायर, डिक्सन, सैमसंग जैसी वैश्विक कंपनियां भी भरोसा कर रही हैं। उत्तर प्रदेश इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स मैन्युफैक्चरिंग पॉलिसी-2025 के तहत 3800 करोड़ रुपये से अधिक का निवेश इस भरोसे को विस्तार देते हैं।
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रक्षा उत्पादन में उत्तर प्रदेश आत्मगौरव का अध्याय लिख रहा है। लखनऊ में स्थापित "ब्रह्मोस एयरोस्पेस" यूनिट में आधुनिक और घातक 'ब्रह्मोस मिसाइल' का निर्माण होना हर उत्तर प्रदेशवासी के लिए गर्व का विषय है। सरकार ने ई-साथी मोबाइल ऐप के माध्यम से 24 से अधिक सरकारी सेवाओं को जनता की अंगुलियों तक पहुंचाया है। 2,066 ग्राम पंचायतों तक ऑप्टिकल फाइबर कनेक्टिविटी पहुंचना यह दर्शाता है कि डिजिटल क्रांति अब शहरों की चारदीवारी तक सीमित नहीं रही। प्रोजेक्ट गंगा के माध्यम से 20 लाख ग्रामीण और अर्ध-शहरी घरों तक हाई-स्पीड इंटरनेट पहुंचाने का प्रयास इस बात का प्रमाण है कि सरकार डिजिटल विभाजन को पाटने के लिए गंभीरता से प्रतिबद्ध है।

जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, ईस्टर्न और वेस्टर्न डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर, और सघन एक्सप्रेसवे नेटवर्क ने उत्तर प्रदेश को निवेशकों के लिए एक स्वाभाविक गंतव्य बना दिया है। ग्रेटर नोएडा में 75 एकड़ में फैला रोबोटिक्स एवं एआई कंप्यूटिंग पार्क आने वाले वर्षों में प्रदेश को तकनीकी नवाचार के एक नए केंद्र के रूप में स्थापित करेगा। लखनऊ में 100 एकड़ की एचसीएल आईटी सिटी और सात एसटीपीआई आईटी पार्क, आईटी पॉलिसी के तहत सात हजार करोड़ रुपये से अधिक के निवेश यूपी के भविष्य का आधार हैं। उत्तर प्रदेश की यह तकनीकी यात्रा एक समग्र सोच का परिणाम है जिसमें बुनियादी ढांचा, नीति, प्रतिभा और अवसर एक साथ मिलकर नए भविष्य का निर्माण कर रहे हैं।

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखक प्रो. पुनीत कुमार लखनऊ विश्वविद्यालय के भौतिकी विभाग में कार्यरत हैं।)
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