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विचार: साजिश की सियासत बनाम सच की सरकार

Sat, 19 Sep 2026 04:25 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र अवनीश त्यागी
अवनीश त्यागी Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 19 Sep 2026 04:25 PM IST
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UP Government Yogi Adityanath Politics of Conspiracy Opinion news
सीएम योगी आदित्यनाथ - फोटो : CM Yogi YT
लोकतंत्र में यह अधिकार सभी को है कि असहमति जताएं, विरोध करें लेकिन जब यही विरोध सच और झूठ के बीच का फासला मिटाकर सिर्फ सत्ता को बदनाम करने का हथियार बन जाए, तो यह खतरनाक संकेत है। पिछले कुछ दिनों में उत्तर प्रदेश में इसी खतरनाक प्रवृत्ति के प्रमाण मिले हैं।  
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सबसे पहले बात काशी की। वहां के शिवाला, सरायनंदन, नगवा समेत आधा दर्जन वार्डों में सीवर लाइनों की सफाई के दौरान मुख्य सीवर लाइनों के भीतर से बालू-सीमेंट की बोरियां, लकड़ी का बुरादा, पत्थर, प्लाई और प्लास्टिक की सामग्री बरामद हुई। सीवर के अंदर सीमेंट व बालू की बोरियां? क्या यह सामान्य लगता है? यह स्पष्ट रूप से जानबूझकर सीवर लाइनों को अवरुद्ध करने का प्रयास प्रतीत होता है। सीमेंट से भरी बोरियां किसी बड़ी साजिश की ओर स्पष्ट संकेत करती हैं। उद्देश्य भी साफ है कि जब मुख्य मार्ग की सीवर लाइन जाम होगी तो सहायक गलियों में पानी ओवरफ्लो होगा और सरकार को घेरने का एक अवसर मिल जाएगा। प्रथम दृष्टया ही स्पष्ट है कि यह किसी सुनियोजित षड्यंत्र का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के संसदीय क्षेत्र वाराणसी जो धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से भी महत्वपूर्ण है, में प्रशासनिक विफलता का नैरेटिव खड़ा करना था। 
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ये घटना अकेली नहीं है। बीते कुछ महीनों में ऐसे कई मामले सामने आए हैं, जो शुरुआत में बड़े मुद्दे की तरह उछाले गए, ट्रोलबाजों ने बुलबुले की तरह इन्हें हवा दी, लेकिन जांच होते ही ये मुद्दे उतनी ही तेजी से फुस्स हो गए जितनी तेजी से खड़े किए गए थे। यह पैटर्न बताता है कि यह कोई संयोग नहीं, बल्कि एक सुनियोजित रणनीति है, जिसके तहत छोटी-छोटी घटनाओं को बढ़ा-चढ़ाकर पेश किया जाता है।  

योगी सरकार ने बीते नौ वर्षों में उत्तर प्रदेश में जो बदलाव लाए हैं, वे किसी से छिपे नहीं हैं। कानून-व्यवस्था में सुधार, माफियाओं पर नकेल, बुनियादी ढांचे का विकास, निवेश में बढ़ोतरी, और महिला सुरक्षा के क्षेत्र में किए गए प्रयास प्रदेश की तस्वीर बदल रहे हैं। ऐसे में जब ठोस नीतिगत मुद्दों की कमी होती है, तो वह इस तरह की मनगढ़ंत या अतिरंजित घटनाओं का सहारा लेकर जनता का ध्यान भटकाने की कोशिश की जाती है।  

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं। लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखक अवनीश त्यागी वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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