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विचार: हर समीकरण की सीमा लांघने वाला उत्तर प्रदेश

Sat, 05 Sep 2026 01:17 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र नितिन श्रीवास्तव
नितिन श्रीवास्तव Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sat, 05 Sep 2026 01:17 PM IST
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Uttar Pradesh Election numbers game Caste Politics Yogi Govt Bulldozer Action Zero Tolerance for crime Opinion
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ। - फोटो : amar ujala
राजनीति में प्रायः चुनावी अंकगणित, जातिगत गोलबंदी, क्षेत्रीय समीकरण और घोषणापत्रों के बड़े-बड़े दावे ही जीत-हार का मुख्य आधार माने जाते हैं। चुनावी मंचों से गूंजने वाले नारों, रैलियों में उमड़ती भीड़ और मीडिया के विश्लेषकों की बहसों का अपना एक निश्चित गणितीय हिसाब होता है। परंतु इतिहास साक्षी है कि जब किसी राज्य के राजनीतिक क्षितिज पर कुछ ऐसी अभूतपूर्व संरचनाएं और सांस्कृतिक प्रतीक उभर आते हैं, तो उन्हें केवल आंकड़ों के पारंपरिक तराजू पर नहीं तौला जा सकता। 
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उत्तर प्रदेश की प्रशासनिक शब्दावली में अपराध के प्रति “जीरो टॉलरेंस” और “बुलडोजर कार्रवाई” केवल एक प्रशासनिक नीति का हिस्सा मात्र नहीं रही, बल्कि वह एक मजबूत राजनीतिक ब्रांड का रूप धारण कर चुकी है। एक कठोर प्रशासक की भांति खड़े होकर अपराधियों और माफिया तंत्र के मन में कानून का भय पैदा करना, यह वह अभेद्य राजनीतिक पत्ता है, जिसे केवल योगी आदित्यनाथ ही पूर्ण नैतिक अधिकार के साथ खेल सकते हैं। 
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'विकास' और 'विरासत' का अभूतपूर्व समन्वय
भारतीय राजनीति में लंबे समय से दो स्पष्ट और परस्पर विरोधी धाराएं विद्यमान रही हैं। एक तरफ वे नेता रहे हैं जो केवल आधुनिकता, अवसंरचना (इन्फ्रास्ट्रक्चर) और आर्थिक विकास की बात करते थे, तो दूसरी तरफ वे जो केवल परंपरा, धर्म और सांस्कृतिक अस्मिता के पक्षधर थे। योगी आदित्यनाथ ने इन दो विपरीत धाराओं को एक ही धरातल पर लाकर खड़ा कर दिया है। उनके एक हाथ में जेवर इंटरनेशनल एयरपोर्ट, गंगा एक्सप्रेस-वे, बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे और डिफेंस कॉरिडोर का आधुनिक खाका है, तो दूसरे हाथ में भव्य अयोध्या का राम मंदिर, काशी का दिव्य विश्वनाथ धाम, मथुरा-वृंदावन का कायाकल्प और महाकुंभ का अभूतपूर्व सांस्कृतिक वैभव है।  

सशक्तीकरण का नया मानक 
चुनावी बहसों में अक्सर मुफ्त योजनाओं, वित्तीय रेवड़ियों और कैश ट्रांसफर के मुद्दे छाये रहते हैं। विभिन्न दल महिलाओं को आकर्षित करने के लिए कई तरह के आर्थिक वादे करते हैं। परंतु राज्य की आधी आबादी, यानी महिला मतदाताओं के लिए, वास्तविक और धरातलीय सशक्तीकरण का अर्थ क्या है? उत्तर प्रदेश के छोटे कस्बों, गांवों और सुदूर ग्रामीण अंचलों में शाम ढलने के बाद महिलाओं का निडर होकर बाहर निकलना, बेटियों का बिना किसी भय के स्कूल और कॉलेज जाना—यह वह प्रत्यक्ष अनुभूति है, जिसे योगी सरकार अपने सुशासन की सबसे बड़ी पूंजी मानती है। चुनावी मैदान में आर्थिक वादे तो कई दल कर सकते हैं, परंतु सार्वजनिक जीवन में निर्भयता और गरिमा का जो वातावरण महिलाओं के बीच स्थापित हुआ है, उस अटूट विश्वास को चुनौती देना किसी भी प्रतिद्वंद्वी के लिए सहज नहीं होगा। सुरक्षा का यह अहसास महिलाओं को एक स्वतंत्र और निर्णायक वोटबैंक में बदल चुका है।
 

निर्णायक नेतृत्व की विश्वसनीयता 
लगातार दो कार्यकाल के बाद भी, योगी आदित्यनाथ की पहचान एक ऐसे बेबाक प्रशासक की बनी हुई है, जो राज्य के हित में कड़े और अप्रिय फैसले लेने से भी पीछे नहीं हटता। फिर भी, राजनीति का एक अटल नियम यह भी है कि जीत का रथ कई पहियों पर चलता है। सरकार की सफल योजनाओं और उपलब्धियों को आमजन तक पहुंचाना भी उतना ही महत्वपूर्ण है, जितना सरकार व संगठन का युद्धस्तर पर सक्रिय होना। अतीत की प्रतिष्ठा सफलता का दरवाजा अवश्य खोलती है, लेकिन भविष्य का भरोसा संस्थागत निरंतरता, व्यापक जन-संपर्क और जमीनी समाधानों पर टिकता है। 2027 के चुनाव का अंतिम फैसला कई वास्तविक और व्यावहारिक मानदंडों पर निर्भर करेगा।

(अस्वीकरण: ये लेखक के निजी विचार हैं।  लेख में दी गई जानकारी और तथ्यों के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। लेखक नितिन श्रीवास्तव, वरिष्ठ पत्रकार हैं।)
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