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Hindi News ›   Events Coverage ›   Animal Husbandry: Adopt Stray Cattle and Get Financial Assistance from UP Government

पशुपालन: चार बेसहारा गोवंश को दीजिए आसरा, 72,000 रुपये तक आर्थिक सहायता देगी यूपी सरकार

Sat, 31 Oct 2026 07:25 PM IST
लखनऊ Published by: रिया दुबे Updated Sat, 31 Oct 2026 07:25 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश सरकार की इस योजना के तहत अब तक 2.04 लाख से अधिक बेसहारा गोवंश किसानों और पशुपालकों को सौंपे जा चुके हैं। एक व्यक्ति को अधिकतम चार गोवंश दिए जाते हैं और प्रति पशु 1,500 रुपये मासिक सहायता मिलती है। इसका उद्देश्य गोवंश संरक्षण के साथ किसानों को सहयोग देना है।

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Animal Husbandry: Adopt Stray Cattle and Get Financial Assistance from UP Government
गाय (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobestock

विस्तार

उत्तर प्रदेश सरकार बेसहारा गोवंश के संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना चला रही है। इसके तहत गोवंश की देखभाल की जिम्मेदारी लेने वाले किसानों, पशुपालकों और अन्य पात्र लोगों को अधिकतम चार गोवंश दिए जाते हैं। इनके पालन-पोषण के लिए सरकार हर गोवंश पर 1,500 रुपये प्रतिमाह की सहायता देती है। यह राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे लाभार्थी के बैंक खाते में भेजी जाती है।

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अब तक 2.04 लाख से अधिक गोवंश की सुपुर्दगी

मुख्यमंत्री निराश्रित बेसहारा गोवंश सहभागिता योजना के तहत अब तक 2,04,762 गोवंश लाभार्थियों को सौंपे जा चुके हैं। इनमें से 3,619 गोवंश पोषण मिशन के तहत और 2,01,143 सामान्य लाभार्थियों को दिए गए हैं। इस योजना में गोवंश संरक्षण, फसल सुरक्षा, पशुपालन और पोषण को एक साथ जोड़ा जा रहा है।

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गोवंश भी बचेगा, फसल भी खिलेगी

उत्तर प्रदेश सरकार ने निराश्रित गोवंश के संरक्षण को किसानों और पशुपालकों की भागीदारी से जोड़ा है। खुले में घूमने वाले बेसहारा गोवंश से फसलों और आम लोगों को सुरक्षित रखना इसका उद्देश्य है। साथ ही, देसी गोवंश नस्लों के संरक्षण और पशुपालन को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया जा रहा है।

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गोवंश की जिम्मेदारी लेने वाले लाभार्थी को रखरखाव के लिए आर्थिक सहायता मिलती है, जिससे गोवंश संरक्षण के साथ पशुपालक परिवारों के लिए अतिरिक्त आय का अवसर मिलता है।

चार गोवंश के लिए 72,000 रुपये तक सहायता 

एक इच्छुक व्यक्ति को अधिकतम चार गोवंश दिए जा सकते हैं। नवजात की अलग से गिनती नहीं होगी। मादा गोवंश और दूध पीती बछिया को एक इकाई माना जाएगा। भरण-पोषण के लिए प्रति गोवंश 50 रुपये प्रतिदिन की दर से सहायता दी जाती है। इस हिसाब से एक पशु पर महीने में 1,500 रुपये और चार पशुओं पर पात्र लाभार्थी को अधिकतम 6,000 रुपये प्रतिमाह की सहायता मिलती है। इस तरह, 12 महीनोंं में कुल 72,000 रुपये तक आर्थिक सहायता मिल सकती है।

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परिवार को गाय, घर में मिलेगा दूध

इस योजना को पोषण मिशन से भी जोड़ा गया है। पोषण मिशन में चयनित कुपोषित परिवारों को दूध देने वाली गायें सौंपी जाती हैं। इसका उद्देश्य जरूरतमंद परिवारों तक दूध की उपलब्धता बढ़ाने के साथ गोवंश के संरक्षण को जोड़ना है।

ऐसे होगा चयन, ये हैं नियम

इस योजना का लाभ प्राप्त करने के लिए अपने नजदीकी पशु चिकित्सालय के पशु चिकित्सा अधिकारी से संपर्क कर आवेदन कर सकते हैं। जिला प्रशासन अपने क्षेत्र में ऐसे किसानों, पशुपालकों और अन्य लोगों की पहचान करता है, जो गोवंश की देखभाल के लिए तैयार हों।

चयनित लाभार्थियों को जिला प्रशासन द्वारा संचालित स्थाई या अस्थायी गोवंश संरक्षण केंद्रों के जरिए गोवंश सौंपा जाता है। सौंपे जाने वाले गोवंश के कान में पहचान के लिए छल्ला होना अनिवार्य है। लाभार्थी न तो गोवंश को बेच सकता है और न ही उसे दोबारा खुले में छोड़ सकता है।

योजना का लाभ लेने के लिए ये शर्तें जरूरी

  • आवेदक संबंधित विकासखंड का मूल निवासी हो और वर्तमान में वहीं रहता हो।
  • गोपालन का अनुभव हो और पशु रखने के लिए पर्याप्त स्थान हो।
  • अधिकतम चार गोवंश ही दिए जाएंगे।
  • आवेदक के नाम आधार से जुड़ा सक्रिय बचत बैंक खाता होना चाहिए।
  • दुग्ध समितियों से जुड़े लोगों को प्राथमिकता दी जाएगी।
  • प्रशिक्षित पैरावेट और पशु मित्रों को भी प्राथमिकता मिलेगी।
  • आवेदन के साथ आधार कार्ड, वोटर कार्ड या राशन कार्ड और बैंक पासबुक की स्पष्ट प्रति देनी होगी।

एक योजना, तीन फायदे

  • गोवंश संरक्षण : निराश्रित पशुओं को आश्रय और देखभाल की व्यवस्था।
  • किसानों को सहयोग : गोवंश पालने वाले पात्र लाभार्थियों को भरण-पोषण के लिए डीबीटी सहायता।
  • कुपोषित परिवारों को दूध : पोषण मिशन से जुड़े परिवारों को दूध देने वाली गाय उपलब्ध कराने का प्रावधान।
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