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Utpalendu Chakraborty: बंगाली निर्देशक उत्पलेंदु चक्रवर्ती का निधन, इस फिल्म के लिए जीता था राष्ट्रीय पुरस्कार
Tue, 20 Aug 2024 11:19 PM IST
मोहम्मद फायक अंसारी
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: मोहम्मद फायक अंसारी
Updated Tue, 20 Aug 2024 11:19 PM IST
सार
मशहूर फिल्म निर्देशक उत्पलेंदु चक्रवर्ती का 76 साल की उम्र में निधन हो गया। दिल का दौरा पड़ने के बाद अपने आवास पर उन्होंने अपने आवास पर अंतिम सांस ली।
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उत्पलेंदु चक्रवर्ती
- फोटो : यूट्यूब
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विस्तार
मशहूर बंगाली निर्देशक उत्पलेंदु चक्रवर्ती का मंगलवार शाम (20 अगस्त) को उनके आवास पर निधन हो गया। वह 76 वर्ष के थे। परिवार के मुताबिक शाम करीब 6 बजे रीजेंट पार्क स्थित उनके आवास पर उन्हें दिल का दौरा पड़ा, जिसके बाद उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके परिवार में उनकी बेटियां, अभिनेत्री रिताभरी और चित्रांगदा और पत्नी सतरूपा सान्याल हैं, जो खुद भी एक फिल्मकार हैं।
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इस फिल्म के लिए जीता था राष्ट्रीय पुरस्कार
उत्पलेंदु चक्रवर्ती को साल 1983 में फिल्म चोख के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इससे पहले वह साल 1981 में अपनी पहली फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार भी जीत चुके थे। उन्हें एनएफडीसी पुरस्कार और राष्ट्रपति पुरस्कार सम्मानित किया गया था।
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इन फिल्मों से छोड़ी गहरी छाप
अपने फिल्मी करियर में उन्होंने मोयनतादंतो (1980), चंदनीर (1989), फांसी (1988) और देबसिशु (1987) जैसी फिल्में बनाकर लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी। उन्होंने सत्यजीत रे और रवींद्र संगीत के प्रतिपादक देवव्रत बिस्वास के संगीत पर उन्होंने डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी।
ममता बनर्जी ने जताया शोक
वह कई वर्षों से सीओपीडी से भी पीड़ित थे। उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बयान में कहा कि उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में एक खालीपन पैदा हो गया है। देश के सबसे पुराने फिल्म क्लबों में से एक सिने सेंट्रल ने चक्रवर्ती के निधन पर शोक व्यक्त किया।
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इस फिल्म के लिए जीता था राष्ट्रीय पुरस्कार
उत्पलेंदु चक्रवर्ती को साल 1983 में फिल्म चोख के लिए सर्वश्रेष्ठ फीचर फिल्म और सर्वश्रेष्ठ निर्देशन का राष्ट्रीय पुरस्कार मिला था। इससे पहले वह साल 1981 में अपनी पहली फिल्म के लिए इंदिरा गांधी पुरस्कार भी जीत चुके थे। उन्हें एनएफडीसी पुरस्कार और राष्ट्रपति पुरस्कार सम्मानित किया गया था।
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इन फिल्मों से छोड़ी गहरी छाप
अपने फिल्मी करियर में उन्होंने मोयनतादंतो (1980), चंदनीर (1989), फांसी (1988) और देबसिशु (1987) जैसी फिल्में बनाकर लोगों के दिलों में गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने स्कॉटिश चर्च कॉलेज और कलकत्ता विश्वविद्यालय से पढ़ाई की थी। उन्होंने सत्यजीत रे और रवींद्र संगीत के प्रतिपादक देवव्रत बिस्वास के संगीत पर उन्होंने डॉक्यूमेंट्री भी बनाई थी।
ममता बनर्जी ने जताया शोक
वह कई वर्षों से सीओपीडी से भी पीड़ित थे। उनके निधन पर दुख व्यक्त करते हुए मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक बयान में कहा कि उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री में एक खालीपन पैदा हो गया है। देश के सबसे पुराने फिल्म क्लबों में से एक सिने सेंट्रल ने चक्रवर्ती के निधन पर शोक व्यक्त किया।
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