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टॉक्सिक: खराब एडिटिंग और बिखरी हुई स्टोरी लाइन, क्या इन 7 वजहों से कमजोर पड़ी यश की 'टॉक्सिक'?
Thu, 27 Aug 2026 03:00 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Thu, 27 Aug 2026 03:00 PM IST
सार
Toxic: टॉक्सिक में यश के अलावा कियारा आडवाणी, हुमा कुरैशी, तारा सुतारिया, रुक्मिणी वसंत और नयनतारा हैं। इसे दर्शकों से मिलीजुली प्रतिक्रिया मिली है। जानिए इस फिल्म की क्यों आलोचना हो रही है।
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टॉक्सिक
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
फिल्म 'टॉक्सिक' की रिलीज से पहले काफी हंगामा बरपा हुआ। दर्शकों को चार साल इंतजार कराया गया। पहले दिन भले ही इस फिल्म ने अच्छी कमाई कर ली हो। मगर दर्शकों से इसे मिले जुले रिएक्शन मिले हैं। हर कोई अपने हिसाब से इसका रिव्यू दे रहा है। हम यहां आपके सामने सात ऐसे 7 कारण बता रहे हैं, जिनकी वजह से फिल्म की आलोचना हो रही है।
ज्यादा मर्दाना दिखाने की कोशिश
फिल्म जबरदस्ती एक बहुत ज्यादा मर्दाना, मास-अपील वाली एक्शन फिल्म बनने की कोशिश करती है, जिसमें तुकबंदी वाले पंचलाइन होते हैं। फिर भी शैलियों का यह जबरदस्ती का मेल पूरी तरह से फेल हो जाता है। इंटरनेशनल स्टाइल और मास फ्लेवर को मिलाने की कोशिश में, फिल्म अपने ही किरदारों और कहानी को बुरी तरह कमजोर कर देती है।
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ज्यादा मर्दाना दिखाने की कोशिश
फिल्म जबरदस्ती एक बहुत ज्यादा मर्दाना, मास-अपील वाली एक्शन फिल्म बनने की कोशिश करती है, जिसमें तुकबंदी वाले पंचलाइन होते हैं। फिर भी शैलियों का यह जबरदस्ती का मेल पूरी तरह से फेल हो जाता है। इंटरनेशनल स्टाइल और मास फ्लेवर को मिलाने की कोशिश में, फिल्म अपने ही किरदारों और कहानी को बुरी तरह कमजोर कर देती है।
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टॉक्सिक
- फोटो : एक्स
महिला किरदारों बेकद्री
फिल्म में पांच लीड एक्ट्रेस का जोर-शोर से प्रचार किया गया और उन्हें स्क्रीन पर बहुत खूबसूरती से दिखाया गया। मगर हर महिला किरदार को सिर्फ मुख्य पुरुष हीरो के इर्द-गिर्द घूमने के लिए ही बनाया गया है।
यह बहुत अजीब बात है कि एक महिला निर्देशक की फिल्म, जिसमें पांच बड़ी एक्ट्रेस हैं, अपने आपको प्रेजेंट करने में पूरी तरह फेल हो जाती है।
फेमिनिज्म का गलत मतलब
स्टार और डायरेक्टर के दावों के बावजूद कि 'टॉक्सिक' फेमिनिस्ट फिल्म होगी, यहां 'फेमिनिज्म' का मतलब बस इतना ही है कि महिलाओं की जिंदगी पूरी तरह से मेल लीड के प्यार, वासना या नफरत के इर्द-गिर्द घूमती है।
फिल्म में पांच लीड एक्ट्रेस का जोर-शोर से प्रचार किया गया और उन्हें स्क्रीन पर बहुत खूबसूरती से दिखाया गया। मगर हर महिला किरदार को सिर्फ मुख्य पुरुष हीरो के इर्द-गिर्द घूमने के लिए ही बनाया गया है।
यह बहुत अजीब बात है कि एक महिला निर्देशक की फिल्म, जिसमें पांच बड़ी एक्ट्रेस हैं, अपने आपको प्रेजेंट करने में पूरी तरह फेल हो जाती है।
फेमिनिज्म का गलत मतलब
स्टार और डायरेक्टर के दावों के बावजूद कि 'टॉक्सिक' फेमिनिस्ट फिल्म होगी, यहां 'फेमिनिज्म' का मतलब बस इतना ही है कि महिलाओं की जिंदगी पूरी तरह से मेल लीड के प्यार, वासना या नफरत के इर्द-गिर्द घूमती है।
टॉक्सिक
- फोटो : यूट्यूब
ओवर एक्टिंग
'टॉक्सिक' पूरी तरह से यश का शो है। पहला हाफ ज्यादातर उनके सिग्नेचर स्वैग को दिखाने में लगा है। दूसरे हाफ में कुछ दमदार ड्रामे की जरूरत होती है, खासकर 'यंग' यश के आने के बाद।
एक्टर ने यंग वर्जन को अजीब बॉडी लैंग्वेज देकर दोनों किरदारों में फर्क दिखाया है, हालांकि कई बार वह ओवर-एक्टिंग की हद पार कर जाते हैं।
हर वक्त चलता है एक्शन
पूरी फिल्म में अक्सर एक्शन चलता रहता है। यह बात दर्शकों को थोड़ी अखरती है। फिल्म की कहानी के हिसाब से इसमें पिता-पुत्र, भाई-बहन, प्यार, धोखा, अपराध और सत्ता सब है। मगर पर्दे पर गोलियां, ग्लैमर और आपत्तिजनक दृश्य दिखते हैं।
'टॉक्सिक' पूरी तरह से यश का शो है। पहला हाफ ज्यादातर उनके सिग्नेचर स्वैग को दिखाने में लगा है। दूसरे हाफ में कुछ दमदार ड्रामे की जरूरत होती है, खासकर 'यंग' यश के आने के बाद।
एक्टर ने यंग वर्जन को अजीब बॉडी लैंग्वेज देकर दोनों किरदारों में फर्क दिखाया है, हालांकि कई बार वह ओवर-एक्टिंग की हद पार कर जाते हैं।
हर वक्त चलता है एक्शन
पूरी फिल्म में अक्सर एक्शन चलता रहता है। यह बात दर्शकों को थोड़ी अखरती है। फिल्म की कहानी के हिसाब से इसमें पिता-पुत्र, भाई-बहन, प्यार, धोखा, अपराध और सत्ता सब है। मगर पर्दे पर गोलियां, ग्लैमर और आपत्तिजनक दृश्य दिखते हैं।
टॉक्सिक
- फोटो : यूट्यूब
खराब एडिटिंग
फिल्म के विजुअल अच्छे हैं। ग्राफिक्स अच्छे हैं। मगर इसकी एडिटिंग खराब लगती है। कहानी को सिंपल बनाने के बाजए पेचीदा कर दिया गया है। इसमें कई चीजें हैं, मगर कुछ भी सिलसिलेवार नहीं है।
खोखला है अंत
बर्फ से ढके इलाके में होने वाली जबरदस्त फाइनल लड़ाई में एक्शन के साथ राया का अपनी पिछली गलतियों को अजीब तरह से अपनाना दिखाया गया है। अंत एक अच्छे विजुअल आइडिया जैसा लगता है, मगर आखिर में फिल्म को एक बहुत ही खोखला और खाली अंत देती है।
फिल्म के विजुअल अच्छे हैं। ग्राफिक्स अच्छे हैं। मगर इसकी एडिटिंग खराब लगती है। कहानी को सिंपल बनाने के बाजए पेचीदा कर दिया गया है। इसमें कई चीजें हैं, मगर कुछ भी सिलसिलेवार नहीं है।
खोखला है अंत
बर्फ से ढके इलाके में होने वाली जबरदस्त फाइनल लड़ाई में एक्शन के साथ राया का अपनी पिछली गलतियों को अजीब तरह से अपनाना दिखाया गया है। अंत एक अच्छे विजुअल आइडिया जैसा लगता है, मगर आखिर में फिल्म को एक बहुत ही खोखला और खाली अंत देती है।