जावेद अख्तर: 19 की उम्र...जेब में 27 नए पैसे और बड़े-बड़े सपने; 62 साल पहले सिनेमा जगत में कैसे आया था 'जादू'?
Shabana Azmi On Javed Akhtar Struggle: हिंदी सिनेमा को शब्दों की जादूगरी दिखाने वाले जावेद अख्तर को मुंबई में आए हुआ आज 62 साल हो गए। संघर्ष का एक लंबा दौर देखने के बाद उन्हें सफलता नसीब हुई। किन हालातों में वे इंडस्ट्री में आए थे, शबाना आजमी ने बताया है।
विस्तार
04 अक्तूबर 1964! आज से ठीक 62 साल पहले सिनेमा जगत में एक खूबसूरत घटना घटी। 19 साल का एक नवयुवक मायानगरी में दाखिल हुआ। बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचा। जेब खाली थी, मगर आंखों में बड़े-बड़े सपने थे। उसके पास कुछ नहीं था, मगर खूब सारा जज्बा था और एक जादुई कलम थी। मेहनत करना उसने चुना और आज दुनिया उस नवयुवक को जावेद अख्तर के नाम से जानती है। शब्दों के मामले में उन्होंने जादू किया है। मगर, इसके पीछे संघर्ष का लंबा दौर रहा, जिसे आज दिग्गज अभिनेत्री और जावेद अख्तर की पत्नी शबाना आजमी ने साझा किया है।
कई दिन भूखे रहे, फुटपाथों पर गुजारीं रातें
शबाना आजमी ने अपने इंस्टाग्राम अकाउंट से एक पोस्ट शेयर किया है। उन्होंने जावेद अख्तर की युवावस्था की एक तस्वीर साझा की है। इसके साथ उनके सफर के बारे में बताया है। वे लिखती हैं, '04 अक्तूबर 1964। एक नौजवान बॉम्बे सेंट्रल स्टेशन पहुंचा, जिसकी जेब में सिर्फ 27 नए पैसे थे, लेकिन आंखों में बड़े-बड़े सपने। जिंदगी ने उसे कई मुश्किलों का सामना कराया। वह फुटपाथों, रेलवे स्टेशनों और कई स्टूडियो के कंपाउंड में सोया। एक दिन ऐसा भी आया, जब उसे 3 दिनों तक कुछ खाने को नहीं मिला और उसके पास सिर्फ वही फटे-पुराने कपड़े थे, जो उसने पहन रखे थे'।
अभिनेत्री ने लिखा- 'आप भी कर सकते हैं, हार न मानें'
शबाना आजमी ने आगे लिखा है,'जब वह नौजवान निराशा के ऐसे मोड़ पर था कि हार मान सकता था, तब उसने खुद से कहा, 'मैं यूं ही मरने के लिए पैदा नहीं हुआ था। ये दिन बदलेंगे'। और..., दिन सच में बदले। 04 अक्तूबर 1964- एक 19 साल का लड़का, जिसके पास लगभग कुछ भी नहीं था। 04 अक्तूबर 2026, कई दशकों बाद- एक ऐसी जिंदगी, जिसने भारत को कुछ सबसे यादगार शब्द दिए हैं। यह कहानी है जावेद अख्तर की। कुछ सफर लगभग बिना किसी चीज के शुरू होते हैं। सिवाय एक सपने के। अगर वह ऐसा कर सकते हैं, तो आप भी कर सकते हैं। कभी हार न मानें'।
कैसे पड़ा 'जादू' नाम?
बता दें कि जावेद अख्तर का निक नेम जादू है। उनके इस नाम की पीछे भी एक खूबसूरत कहानी है। जावेद की पिता की कविता थी 'लम्हा-लम्हा किसी जादू का फसाना होगा' से होगा उनका यह नाम पड़ा था। जावेद नाम जादू से काफी मिलता- जुलता था, इसलिए उनका नाम जावेद रख दिया गया। जावेद अख्तर हमेशा से ही कुछ अलग करना चाहते थे, इसलिए वे 04 अक्तूबर 1964 को मुंबई चले आए। यहां उन्होंने भूख, प्यास, धूप, सर्दी और बारिश से जूझते हुए ढेर सारे रिजेक्शन झेलने के बाद खुद को स्थापित किया।
बॉलीवुड को जावेद अख्तर ने बेहतरीन फिल्में दीं। उनकी लेखनी का ही कमाल रहा कि उन्होंने इंडस्ट्री को 'एंग्री यंग मैन' दिया। सलीम खान के साथ उन्होंने काम कर नई ऊंचाईयों को छुआ। उनकी दोस्ती भी हिट रही। दोनों ने मिलकर बॉलीवुड को कई सुपरहिट फिल्में दीं। इनमें जंजीर, त्रिशूल, दोस्ताना, सागर, काला पत्थर, मशाल, मेरी जंग, दीवार और शोले जैसी फिल्में शामिल हैं। इसके अलावा उन्होंने कई मशहूर गाने भी लिखे हैं।