Dilip Kumar-Raj Kapoor: पाकिस्तान में दिलीप कुमार-राज कपूर के पुश्तैनी घरों का होगा संरक्षण, इतना बजट मंजूर
Dilip Kumar And Raj Kapoor Houses In Northwest Pakistan: हिंदी सिनेमा के दिवंगत दिग्गज कलाकार राज कपूर और दिलीप कुमार के पाकिस्तान में स्थित पुश्तैनी घरों की मरम्मत और संरक्षण का काम किया जाएगा। इसके लिए तीन करोड़ रुपये मंजूर हुए हैं।
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हिंदी सिनेमा को दो दिग्गज कलाकार शोमैन राज कपूर और दिलीप कुमार के पाकिस्तान में पुश्तैनी घर हैं। दिवंगत कलाकारों के इन घरों की मरम्मत और संरक्षण का काम होगा। इसके लिए बजट मंजूर हुआ है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, पाकिस्तान की खैबर पख्तूनख्वा प्रांतीय सरकार ने आज बुधवार को भारतीय फिल्म जगत के दिग्गज अभिनेता दिलीप कुमार और राज कपूर की ऐतिहासिक इमारतों की मरम्मत और संरक्षण के लिए करीब तीन करोड़ रुपये मंजूर किए हैं।
जर्जर अवस्था में हैं कलाकारों की इमारतें
प्रांतीय मुख्यमंत्री अली अमीन गंदापुर और पर्यटन एवं पुरातत्व सलाहकार जाहिद खान शिनवारी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में इस बजट को मंजूरी दी गई। बैठक में विश्व बैंक के KITE कार्यक्रम के तहत खैबर पख्तूनख्वा प्रांत में विरासत संरक्षण और पर्यटन संवर्धन हेतु प्रमुख परियोजनाओं को मंजूरी दी गई। राज कपूर और दिलीप कुमार की ऐतिहासिक इमारतें जर्जर अवस्था में हैं। इन्हें पाकिस्तान सरकार पहले ही राष्ट्रीय धरोहर घोषित कर चुकी है।
2014 में राष्ट्रीय धरोहर घोषित हुईं इमारतें
खैबर पख्तूनख्वा पुरातत्व विभाग ने दोनों संरचनाओं को दोनों इमारतों को दोनों दिवंगत कलाकारों के जीवन और करियर को समर्पित संग्रहालयों में परिवर्तित करने की योजना बनाई है। तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ ने 13 जुलाई 2014 को इन घरों को राष्ट्रीय धरोहर स्थल घोषित किया था। पुरातत्व विभाग के निदेशक डॉ. अब्दुस समद ने बताया कि सरकार इस संपत्ति का अधिग्रहण कर इसे एक संग्रहालय में तब्दील करना चाहती है, जिसमें दिलीप कुमार और राज कपूर की पेशावर से मुंबई तक की यात्रा को प्रदर्शित किया जाएगा, जिसमें एक समर्पित गैलरी भी शामिल होगी।
टूरिज्म को बढ़ावा देना मकसद
दिलीप कुमार और राज कपूर की ऐतिहासिक इमारत को जर्जर होने से बचाना और सांस्कृतिक स्थल के रूप में इसका संरक्षण करना सुनिश्चित किया गया है। बैठक में स्वीकृत अन्य विरासत संरक्षण और पर्यटन संवर्धन परियोजनाओं में प्रांत के विभिन्न संग्रहालयों और पुरातात्विक स्थलों का उन्नयन भी शामिल रहा। इमारतों के संरक्षण की परियोजनाओं का मकदस क्षेत्र की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत की रक्षा करते हुए विरासत पर्यटन को बढ़ावा देना है'।