Undekhi 2 Review: गवाहों को मिटाने की कहानी में आया नया मोड़, वीकएंड पर बिंज वॉच की बेहतर क्राइम स्टोरी
ओटीटी कथ्य का माध्यम भी है और इस कथ्य के विस्तार को सलीके से दर्शकों के सामने पेश करने का तरीका भी। कहानियां तमाम सारी एक सी ही होती हैं, बस इन्हें कहने का तरीका इन्हें दूसरों से अलग कर देता है। इस क्रम में अगर कलाकार दमदार मिल जाएं तो फिर सितारों की जरूरत होती नहीं है। दर्शक नए कलाकारों के लिए बाहें पसारे रहते हैं, इसका सबूत वेब सीरीज ‘अनदेखी’ के पहले सीजन में मिल चुका है। अब इसका दूसरा सीजन सामने है। अप्लॉज की चक्की से निकली इस वेब सीरीज का आटा चोकर वाला है। दिलचस्प ये भी है कि इस वीकएंड पर अप्लॉज की वेब सीरीज ‘रुद्र’ भी रिलीज हुई है, लेकिन अगर आपको सितारों से ज्यादा कहानियों और इन्हें कहने के तरीकों में दिलचस्पी है तो निर्देशक आशीष आर शुक्ल निर्देशित वेब सीरीज ‘अनदेखी’ का दूसरा सीजन आपके लिए परफेक्ट वीकएंड बिंच वॉच है। हां, ओटीटी का हिस्सा बन चुकी गालियां यहां भी हैं और भर भरकर हैं, तो अगर आप इसे अपने घर के स्मार्ट टीवी पर देखने का मन बना रहे हैं तो थोड़ा सतर्क रहें।
वेब सीरीज ‘अनदेखी’ का दूसरा सीजन कोई बहुत करामाती सीजन जैसा भी नहीं है लेकिन ये सीजन अपने करामाती होने का दावा भी नहीं करता। इसका रास्ता सीधा सपाट सा फिसलता चलता है। इसके लेखन में ‘सत्यकथा’ और ‘मनोहर कहानियां’ जैसी रवानी है और सबसे बड़ी बात जो इसे दूसरी वेब सीरीज से अलग बनाती है, वह है इसकी लिखावट में इसके किरदारों की उनकी निजी बुनावट। अच्छा लगता है छोरियों को छोरों पर इक्कीस पड़ते देखते हुए। कहानी वही है, अंदाज भी वही है। हां, इस बार मामला कहानी के कुछ और किरदारों का भी है। नशे के सौदागरों की आपसी लड़ाई के किस्से भी इस धारा में आ मिले हैं। भरी महफिल में हुए कत्ल के सबूत मिटाने की इस कहानी ने अपने पहले सीजन में कई नए चेहरों को ओटीटी का स्टार बनाया। उनके चाहने वाले इस दूसरे सीजन को देखेंगे जरूर और इस बात पर भी मन मसोसेंगे कि दिब्येंदु भट्टाचार्य को इस बार अपना हुनर दिखाने का उतना मौका नहीं मिला, जितने की उम्मीद करके ये सीरीज देखनी उन्होंने शुरू की होगी।
मनोरंजन की दुनिया में काम करने वालों में अपराध कथाओं को लेकर पश्चिम का अनुसरण करने की जो बीमारी आमतौर पर दिखती है, निर्देशक आशीष आर शुक्ल ने खुद को उससे अब तक बचाए रखा है। उनका जोर कहानी को कुदरती कमाल के साथ दिखाने पर रहता है। पूरे परदे को किसी खास रंग में पोतकर नकली जज्बात जगाने से वह परहेज करते रहे हैं। उनका ये सजग प्रयास ही ‘अनदेखी 2’ को इसी के साथ डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई अप्लॉज की ही एक और वेब सीरीज ‘रुद्र’ से बेहतर बनाता है। अमेय सारदा, अनाहता मेनन, दीपक सेगल और सुमीत बिश्नोई की टीम की ये जीत है कि इसका पूरा सेटअप अपने भावों और संवादों से दर्शक को खुद से जोड़ने में कामयाब रहता है।
‘अनदेखी 2’ बिना लाग लपेट के वहीं से शुरू होती है जहां, कहानी पहले सीजन में आकर रुकी थी। रिंकू अब भी कोयल को को मारने के लिए पगलाया हुआ है। खेल में नई एंट्री समर्थ की होती है तो खेल नए मैदान में पहुंचकर थोड़ा लड़खड़ाता भी है लेकिन जल्द ही इसे पटरी पर लाने के लिए इसके महिला किरदार कमान संभाल लेते हैं। इस अपराध कथा का असली नमक भी ये तेजी, कोयल और सलोनी के किरदार ही हैं जो पूरी सीरीज के आखिरी एपीसोड तक दर्शकों को अटकाए रहते हैं और फिर अगले सीजन का इशारा देकर इसे अंजाम तक भी पहुंचाते हैं। आंचल सिंह, अपेक्षा पोरवाल और ऐन जोया ने इन तीनों किरदारों के साथ पूरा न्याय भी किया है। समर्थ के किरदार में नंदीश संधू के परदे पर आने से पहले ही इस किरदार की भाप सीरीज में दिखने लगती है और इसका फायदा भी सीरीज को मिलता है। हर्ष छाया और सूर्य शर्मा बीते सीजन की तरह इस बार भी अपनी पूरी लय में हैं। मेयांग चांग का किरदार हालांकि सरप्राइज के तौर पर ही रचा गया है लेकिन इस पर मेहनत की और जरूरत आगे दिखती है।
तकनीकी तौर पर भी ‘अनदेखी 2’ हाल फिलहाल ओटीटी पर रिलीज हुईं तमाम दूसरी क्राइम वेब सीरीज से बेहतर बन पड़ी है। हिमाचल प्रदेश की पहाड़ियों, इसके घुमावदार मोड़ों के अलावा सीरीज के किरदारों के मूड को भी कैमरे में बहुत ही प्रभावशाली तरीके से कैद किया गया है। सीरीज का बैकग्राउंड म्यूजिक कहानी को सहजता से आगे बढ़ाने में मदद करता है। कॉस्ट्यूम से लेकर इसकी सेटिंग तक पर की गई मेहनत भी अच्छी है। सीरीज की कमजोर कड़ियों में इसके संपादन के अलावा इसकी गालियां शामिल हैं, लेकिन ओटीटी पर बगैर गालियों के अपराध कथा बनाने में लेखकों को अभी समय लगने वाला है।