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Tiger Nageshwar Rao Review: किस्से पीएमओ में चोरी करने वाले सबसे बड़े चोर के, नूपुर व गायत्री की शानदार शुरुआत

Fri, 20 Oct 2023 07:04 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 20 Oct 2023 07:04 PM IST
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Tiger Nageshwar Rao Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Teja Nupur Sanon Gayatri Anupam Kher Murali Sharma
टाइगर नागेश्वर राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
Movie Review
टाइगर नागेश्वर राव (हिंदी)
कलाकार
रवि तेजा , नूपुर सैनन , गायत्री भारद्वाज , जिशू सेनगुप्ता , मुरली शर्मा , हरीश पेराडी , सुदेव नायर , नासर और अनुपम खेर आदि
लेखक
वामसी
निर्देशक
वामसी
निर्माता
अभिषेक अग्रवाल
रिलीज
20.10.2023
रेटिंग
3/5
अपराधियों को समाज में बदलाव के नायकों की तरह पेश करने की परंपरा सिनेमा की काफी पुरानी है। हिंदी सिनेमा में ही यश चोपड़ा जैसे दिग्गज निर्देशक ने कथित रूप से हाजी मस्तान की छवि सुधारने वाली फिल्म ‘दीवार’ बनाई। अभी हाल ही में प्राइम वीडियो पर दाऊद इब्राहिम की इमेज बदलने की कोशिश करने वाली सीरीज ‘बंबई मेरी जान’ रिलीज हुई है। और, तेलुगु सिनेमा में ऐसी ही एक कोशिश हुई है फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ में। ये फिल्म आंध्र प्रदेश में 70 के दशक में सक्रिय रहे चोर नागेश्वर राव की बायोपिक की तरह बनाई गई है हालांकि खुद फिल्म बनाने वाले मानते हैं कि इसकी कोई प्रामाणिक जानकारी उनके पास नहीं है और ये कहानी लिखने के लिए उसके बारे में प्रचलित किंवदंतियों का सहारा ही लिया गया है। लेकिन, अगर दक्षिण का कोई चोर वाकई तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के घर तक जाकर उनका रुमाल चुराने में कामयाब रहा है तो इस शख्स की कहानी गौर करने वाली है।
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Tiger Nageshwar Rao Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Teja Nupur Sanon Gayatri Anupam Kher Murali Sharma
टाइगर नागेश्वर राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
दिल्ली से शुरू होती दक्षिण की कहानी

फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ प्रधानमंत्री आवास में चोरी की चुनौती मिलने से ही शुरू होती है। आईबी के मुखिय़ा ने खास बैठक बुलाई है। दिल्ली के पुलिस कमिश्नर हैं। वीआईपी सुरक्षा देखने वाले अफसर हैं। और, इन्हें नागेश्वर राव के बारे में और जानकारी मुहैया कराने के लिए दक्षिण से एक पुलिस अफसर को बुलाया गया है। इस बैठक में नागेश्वर उर्फ नागी के किरदार के बारे में जो खाका खींचा जा रहा होता है, फिल्म उसी को दिखाते हुए आगे बढ़ती है। चलती ट्रेन से अनाज चुराने की दुस्साहसिक वारदात के साथ नागेश्वर का परदे पर आगमन होता है। फिर कहानी उस स्टुअर्टपुरम जाती है जिसे अंग्रेजों ने इस इरादे के साथ बसाया था कि आंध्र प्रदेश के तमाम चोरों को एक गांव में रखकर उन पर आसानी से निगरानी हो सकेगी। इसी गांव में परवरिश पाता है आठ साल की उम्र में अपने पिता का सिर काटने वाला नागेश्वर राव। गरीबों का रखवाला है, बेसहारों का मसीहा है और आततायियों को वह उनके घर में घुसकर मारता है। बिल्कुल ‘दीवार’ के अमिताभ बच्चन की तरह। बीच में दो प्रेम कहानियां हैं। दोनों युवतियां अलग अलग समय पर नागेश्वर के इसी बांकपन पर फिदा होती हैं। लेकिन, रॉबिनहुड की तरह रहने वाले नागेश्वर के जीवन का मकसद है स्टुअर्टपुरम के युवाओं की तकदीर बदलना।

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Tiger Nageshwar Rao Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Teja Nupur Sanon Gayatri Anupam Kher Murali Sharma
टाइगर नागेश्वर राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
हिंदी में डब एक बेहतर फिल्म

जयपुर, दिल्ली, मुंबई और भोपाल में अपना बचपन गुजारने वाले अभिनेता रवि तेजा ने फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ में शीर्षक रोल किया है। हिंदी उनको अच्छी आती है सो फिल्म के हिंदी डब संस्करण में अपनी डबिंग भी उन्होंने खुद की है। मुरली शर्मा, जीशू सेनगुप्ता और अनुपम खेर तो हिंदी में पहले से ही सिद्धहस्त हैं। इस खासियत के चलते  फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ पहले सीन से ही हिंदी भाषी दर्शकों से भी सामंजस्य बनाने में कामयाब रहती है। राजधानी से शुरू होने वाली फिल्म की कहानी को इसके लेखक, निर्देशक वामसी ने अलग अलग जगहों पर खूब घुमाया है। लेकिन, दक्षिण भारत के सबसे बदनाम चोर का दुस्साहस दिखाने के लिए घटनाएं सिर्फ उन्होंने दो तीन ही दिखाई है। नागेश्वर की चोरी करने की कुछ और निराली घटनाएं फिल्म का ग्राफ ऊंचा कर सकती थीं। फिल्म के निर्देशक वामसी कहानी के मुख्य पात्र नागेश्वर को एक सामाजिक नायक बनाना चाहते हैं और इसके लिए बीच में एक जगह अंबेडकर के शिक्षित होने से बदले सामाजिक पैमाने का जिक्र भी ले आते हैं, लेकिन ज्यादातर ये कहानी नागेश्वर के व्यक्तिगत विवादों के सहारे ही आगे बढ़ती है।

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Tiger Nageshwar Rao Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Teja Nupur Sanon Gayatri Anupam Kher Murali Sharma
टाइगर नागेश्वर राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
रवि तेजा और वामसी की बढ़िया ट्यूनिंग

करीब तीन घंटे की फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ के हीरो रवि तेजा का अभिनय इस फिल्म का असली आधार है। उनकी आवाज में दम है। चाल ढाल में अमिताभ बच्चन की झलक है और प्रेम करने में रजनीकांत जैसा गुमान है। 55 साल की उम्र में भी वह अपना जादू बरकरार रखे हैं, ये उनकी काबिलियत और शोहरत का सबूत है। वामसी ने रवि तेजा को बिल्कुल रॉबिनहुड की तरह ही पेश किया है। कहानी का ताना बाना ऐसा बुना गया है कि दर्शकों को एक खतरनाक चोर के किरदार से भी उसके सामाजिक कार्यों को देखकर लगाव हो जाए। अपने घर में घुसकर चोरी करने वाले इस चोर को निपटाने का आदेश देने वाली देश की प्रधानमंत्री का भी उसके काम देखकर हृदय परिवर्तन होता है और ये दिखाने के पीछे निर्देशक का मंतव्य जाहिर होता है। वामसी और रवि तेजा का आपसी सामंजस्य अच्छा है और इसी के चलते फिल्म बोर नहीं करती है।

Tiger Nageshwar Rao Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Teja Nupur Sanon Gayatri Anupam Kher Murali Sharma
टाइगर नागेश्वर राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
नूपुर सेनन और गायत्री की बढ़िया शुरुआत

फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ से हिंदी सिनेमा की चर्चित अभिनेत्री कृति सैनन की बहन नूपुर सेनन की बड़े परदे पर बोहनी हो रही है। उनका डील डौल दक्षिण भारतीय सिनेमा के लंबे चौड़े सितारों की नायिका बनने के लिए बिल्कुल उपयुक्त नजर आता है। पहली फिल्म के हिसाब से काम भी उन्होंने संतोषजनक किया है हालांकि, फिल्म की दूसरी हीरोइन गायत्री भारद्वाज का रूप और लावण्य उनसे बेहतर है। उनकी ये पहली तेलुगु फिल्म है। गायत्री ने नागेश्वर की पत्नी और फिर दो बच्चों की मां के किरदार के चलते दर्शकों की सहानुभूति भी पाई है। जीशू सेनगुप्ता और अनुपम खेर जैसे कलाकारों की मौजूदगी फिल्म को उत्तर और पूर्व के दर्शकों के बीच जगह बनाने में मदद करती है। विधायक येलामांडा के किरदार में हरीश पेराडी अपना असर छोड़ने में कामयाब रहते हैं। मुरली शर्मा के लिए ऐसी फिल्मों में एक तय किरदार होता है, वह उन्होंने यहां भी निभा दिया है। नसर का किरदार कमजोर है और प्रदीप रावत को गिनती के कुछ दृश्यों में लेकर उनका सही उपयोग नहीं किया गया है।

Tiger Nageshwar Rao Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Teja Nupur Sanon Gayatri Anupam Kher Murali Sharma
टाइगर नागेश्वर राव - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
जरूरत से ज्यादा लंबी फिल्म

कहानी, निर्देशन और अभिनय के मामले में अच्छे नंबर पाने वाली फिल्म ‘टाइगर नागेश्वर राव’ की सिनेमैटोग्राफी और एक्शन भी प्रभावी है, बस इसका संपादन अगर चुस्त रखा जाता और फिल्म की लंबाई दो, सवा दो घंटे के आसपास ही रखी जाती तो ये एक बेहतर फिल्म बन सकती थी। फिल्म का संगीत पक्ष कमजोर है। दक्षिण भारतीय भाषा में बन रही ऐसी फिल्मों को अगर दूसरी भाषाओं में भी रिलीज किया जाना पहले से तय हो तो फिल्म का म्यूजिक उसी तरह तैयार किया जाना चाहिए। इस मामले में दक्षिण के निर्माताओं को फिल्म ‘पुष्पा’ या फिर उससे कहीं पहले रिलीज हुई फिल्मों ‘रोजा’ और ‘बॉम्बे’ से सबक सीखने चाहिए।

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