The Ice Age Adventures of Buck Wild Review: टेक ऑफ में अटकी बक वाइल्ड की नई उड़ान, कमजोर पटकथा ने किया बंटाधार
‘आइस एज’ सीरीज हॉलीवुड एनीमेशन फिल्मों के शौकीनों की पसंदीदा सीरीज में शुमार रही है। इसी सीरीज की तीसरी फिल्म ‘आइस एज: डॉन ऑफ द डायनासोर्स’ में दिखा एक मजाकिया सा, सुपरहीरो सा और अपनी दैहिक विपंगता के बावजूद हर मुश्किल का दमदार तरीके से सामना करने वाला किरदार बक वाइल्ड। लोकप्रिय कहानियां बनाने वाली फिल्म कंपनियों को हाल के दिनों में अपनी कहानियों के उन किरदारों को नए सिरे से खोजने का चस्का चढ़ा है जिनके ऊपर मुख्य फिल्म में कायदे से फोकस नहीं रह पाया। मार्वल स्टूडियो जैसे वांडा, विजन, हॉकआई और लोकी की कहानियां वेब सीरीज की शक्ल में अब पेश कर रहा है वैसी कोशिश हिंदी सिनेमा में भी फिल्म ‘शोले’ के किरदार सूरमा भोपाली को लेकर हो चुकी है। एक स्पिनऑफ हाल ही में नीरज पांडे ने भी अपनी सीरीज ‘स्पेशल ऑप्स’ के किरदार का बनाया। स्पिनऑफ की चुनौती यही है कि ये नई अलग रेखा खींचती कहानी किरदार के मूल चरित्र जितनी ही रोचक होनी चाहिए। डिज्नी प्लस हॉटस्टार पर रिलीज हुई फिल्म ‘द आइस एज एडवेंचर्स ऑफ बक वाइल्ड’ इसी कसौटी पर फेल दिखती है। फिल्म जिसके नाम पर बनी है, वह किरदार फिल्म शुरू होने के कोई 20 मिनट बाद पहली बार परदे पर नजर आता है।
फिल्म ‘द आइस एज एडवेंचर्स ऑफ बक वाइल्ड’ को देखना शुरू करते समय पूरा ध्यान वक वाइल्ड की एंट्री पर ही रहता है और इस बात पर भी कि आखिर ये अलग कहानी ‘आइस एज’ सीरीज के किस नए मल्टीवर्स की खोज करने वाली है। फिल्म की सबसे कमजोर कड़ी इसकी पटकथा है। कहानी तो खैर वैसे भी कुछ खास नहीं होती है इस तरह की स्पिनऑफ फिल्मों में क्योंकि सीरीज के प्रशंसक हर किरदार की कमजोरियां और ताकत पहले से जानते हैं। बस, देखना ये होता है कि अपनी अलग समयधारा में दिखते समय ये किरदार अपने बारे में क्या कुछ खास बता पाता है। जिस कसौटी पर ‘वांडा विजन’ कमजोर पड़ी थी, उसी कसौटी पर ‘हॉकआई’ ने रंग जमाया। यहां बक वाइल्ड के जिस अतीत से तार जोड़कर उसके जीवन का नया विलेन खड़ा किया गया है, अगर कहानी उस हार में बक वाइल्ड के साथियों से ही शुरू होती तो शायद कहानी का असर कुछ और होता।
बक वाइल्ड दर्शकों का प्यारा किरदार रहा है। वह अपनी कहानी का हीरो पहले से है तो फिल्म ‘द आइस एज एडवेंचर्स ऑफ बक वाइल्ड’ में नया क्या है? फिल्म देखकर सोचने पर लगता है कि कुछ नहीं। फिल्म के पटकथा लेखकों ने एक नकली सी कहानी एक असली सी लगने वाले किरदार के चारों तरफ बुन तो ली। लेकिन, न इसका एक्शन अव्वल दर्जे का है। न इसमें इमोशन अपने जैसे लगते हैं और न इसका ड्रामा ही असली लगता है। सब कुछ बहुत नकली टाइप लगता है, बनावटी जैसा। ‘आइस एज’ सीरीज के किरदारों के एनीमेशन भी अब तक काफी शानदार रहे हैं। मैमथ के फर हों यो पॉसियम की हरकतें, सब क्लोज अप में बहुत प्राकृतिक दिखते रहे हैं लेकिन इस बार न तो किरदारों पर पहले जैसी मेहनत की गई दिखती है और न ही वातावरण पर। क्रैश और एडी की शरारतों से आए तूफान के बाद का टॉप एंगल शॉट बिल्कुल असर नहीं छोड़ पाता है।
फिल्म ‘द आइस एज एडवेंचर्स ऑफ बक वाइल्ड’ कहने को तो बक वाइल्ड की कहानी है लेकिन ये शुरू होती एली के कथा वाचन से। वह कहानी के सिरे जोड़कर कहानी को लाती है वहां तक जहां अपने अपने परिवारों से छिटके लोगों ने एक नया परिवार बीती कहानियों में बना लिया था। मैनी, सिड, डिएगो और क्रैश व एडी सब एक एक करके इस नई कहानी में आते रहते हैं, इनके रिश्तों के विस्तार में आने के बाद फिल्म के हीरो बक वाइल्ड की एंट्री तब होती है जब क्रैश और एडी डायनासोर युग में पहुंच जाते हैं। कहानी की ये तिर्यक रेखा खिंचती है परिवार में खलबली से और दोनों पॉसियम के आत्मनिर्भर बनने की योजनाओं से। मौत के मुंह में जाने से ऐन पहले बक इन दोनों को बचा तो लेता है लेकिन ये दोनों अब बक की लड़ाई में मदद करने की बजाय उसके लिए नई बाधा बनते दिखते हैं। बस, बक वाइल्ड का संघर्ष दोतरफा करने के अलावा कहानी में अब तक हुए घटनाक्रम का आगे कुछ प्रयोजन नहीं रह जाता।
ब्रेडन ओबरसन चाहते तो फिल्म की लंबाई 90 मिनट के करीब ही रखकर दर्शकों को कुछ राहत दे सकते थे लेकिन फिल्म के कुछ दृश्यों के जरूरत से ज्यादा खिंचने में दोष निर्देशक और पटकथा लेखकों का ज्यादा है। बतौर वीडियो एडीटर ब्रैडेन ने वही किया जो उनके करवाया गया। बाटू सेनेर ने फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक फिल्म के एहसास के करीब रख पाने में कामयाबी पाई है। फिल्म बच्चों के लिए वीकएंड का टाइमपास हो सकती है लेकिन एनीमेशन फिल्मों के शौकीन बड़ों के लिए फिल्म एक समय के बाद बोर करने लगती है। और, अगर आपको ‘आइसएज’ सीरीज में दिलचस्पी नहीं है तो फिर ये फिल्म आपके लिए बिल्कुल नहीं है।