Sunflower Season 2 Review: ये सीरीज देखने के बाद ‘गणपत’ भी क्लासिक लगेगी, फ्लश हो गई अदा शर्मा की सारी साख
विकास बहल की ‘गणपत’ अब मुझे अच्छी लगने लगी है। उनकी बनाई सीरीज ‘सनफ्लॉवर’ का दूसरा सीजन देखने के बाद। औसतन आधे आधे घंटे के आठ एपिसोड वाली सीरीज जिसमें कोई डेढ़ मिनट के ओपनिंग क्रेडिट्स और करीब तीन मिनट के एंड क्रेडिट्स हैं, को देखने के बाद ये सोचने पर मजबूर होना पड़ता है कि आखिर जी5 में इस तरह की कहानियों को मंजूरी देने और फिर उन्हें बनाकर ओटीटी को पैसा देने वाले ग्राहकों को दिखाने के फैसले लेने में कौन-कौन और क्यों ही शामिल होता होगा? बस, एक नमूना समझिए। कहानी का क्लाइमेक्स चल रहा है। एक महिला बालकनी में कपड़े सुखा रही है और इस कोशिश में बार बार जरूरत से ज्यादा ही बाहर की तरफ लटक जा रही है। ठीक वैसी ही साड़ी ब्लाउज पहने एक दूसरी महिला एक दूसरे घर में है। मर्डर मिस्ट्री लव ट्रायंगल में बदल चुकी है। पुलिस किसी ऐसे थाने की है जिसके जीवन में बस इस एक केस के अलावा दूसरा कुछ सत्य बचा नहीं है। हीरो अपना कैवल्य के बिल्कुल करीब पहुंच चुका है। बुद्ध जैसी मुस्कुराहट लिए वह बाथरूम जाता है। पुलिस ‘सनफ्लॉवर’ कॉलोनी आती है। गाडी के पोर्टिको में रुकते ही आसमान से ‘आफत’ गिरती है। नहीं, वो नहीं जो आपने समझा। कवि (विकास बहल) यहां ये कहता है कि कहानी का सस्पेंस क्या होता, इसे समझने के लिए अगर आपने ‘गणपत’ नहीं देखी है तो फिर ‘सनफ्लॉवर’ समझ नहीं आएगी।
जी5 की बेहद घटिया सीरीज
तो चलिए, आपको ‘सनफ्लॉवर’ की व्याख्या संदर्भ और प्रसंग समेत समझाते हैं। कहने का मतलब ये कि विकास बहस ने हिंदी सिनेमा में कहानियों के परदे पर प्रस्तुतिकरण का जो नया लो प्वाइंट अपनी पिछली फिल्म ‘गणपत’ में हासिल किया, ‘सनफ्लॉवर’ का सीजन 2 उससे थोड़ा और नीचे है। धरती के सबसे निचले बिंदु मृत सागर की सतह नहीं, तलहटी के आसपास। इस सीरीज की कहानी बीते सीजन में मारे गए राज कपूर की तफ्तीश के साथ आगे बढ़ती है। मोटे चश्मे वाला कोतवाल है। मुंबई पुलिस में मेडिकल फिटनेस जैसी कोई चीज होती ही नहीं है, शायद। दरोगा उससे बड़ा चपड़गंजू है। थाने में ही रोल बनाता है। ‘मेरी ‘गर्लफ्रेंड्स’ हैं’ जैसे जुमले मारकर घर में काम करने वाली बाई की जासूसी के जरिये केस सुलझाने के इरादे रखता है। इमेज मुंबई पुलिस की ये सीरीज ऐसी बनाती है कि एकबारगी शहर के किसी खाकी वाले ने ये सीरीज देख ली और अगली बार विकास बहल कहीं ट्रैफिक सिगनल पर दिखे तो...!
Anant-Radhika Wedding: बचपन के दोस्त बनेंगे दुल्हा-दुल्हन, जानिए अनंत-राधिका की लव स्टोरी से लेकर नेटवर्थ
बेकार गईं अदा शर्मा की सारी अदाएं
ख़ैर, सीरीज का पहला सीजन भी कोई कमाल था नहीं तो इसका दूसरा सीजन देखने का चाव शायद ही दर्शकों में हो। लेकिन, इस बार अदा शर्मा इस सीरीज का आकर्षण बताई गईं। मैंने भी रात काली करके पूरी सीरीज बिंज वॉच उन्हीं के लिए की। विकास ने अदा को क्या कहानी सुनाई, ये तो पता नहीं लेकिन ‘द केरल स्टोरी’ से कमाई सारी साख, अदा ने इस सीरीज में फ्लश कर दी है। नवागत प्रकाश कोशिश पूरी करते हैं अपने कैमरे का संतुलन साधकर अदा को खूबसूरत दिखाने की लेकिन उनका किरदार इतना हल्का लिखा गया है कि उनके भारी भरकम शरीर के साथ उनके इंट्रोडक्शन सीन से ही पता चल जाता है कि ‘बहनजी’ करने क्या वाली हैं? घर में हथौड़ा और बाहर सीना चौड़ा वाले एटीट्यूड की मोहतरमा का ये किरदार हर उस किरदार की सफेदी पर दाग लगाता चलता है जिसे विकास ने इस कहानी में कभी ढंग से पेश किया। डांस बार में बजने वाले सारे गाने वही हैं जिनके राइट्स शायद जी के पास हैं और ऐसे हर गाने पर किया अदा का डांस बहुत ही बेहूदा और भद्दा नजर आता है।
Anant-Radhika Pre Wedding: प्री वेडिंग समारोह में जुटने लगीं दिग्गज हस्तियां, शाहरुख से लेकर दीपिका तक आए नजर
महिला किरदारों का बेहूदा ‘विकास’
सीरीज में खूब भर भरके किरदार हैं। सबकी कहानियां अपनी अलग अलग चल रही हैं। मोटे चश्मे वाले कोतवाल को एक संदिग्ध की पत्नी से ही इश्क हो जाता है। वह भी हवालात में बंद पति को छोड़ खाकी वाले के लिए व्यंजन पकाने लगती है। पुलिस की जासूस जो बाई है उसने भी यूनियन बना ली है। फ्लैशबैक चलता है तो पता चलता है कि विकास बहल ने उसका टांका भी कपूर से भिड़ा रखा है। विकास ने घर की बेटी तक को नहीं बख्शा। उसे भी ‘बाइसेक्सुअल’ का किरदार थमा दिया है। सोसाइटी की मैनेजिंग कमेटी में शामिल महिलाओं को वह शंकालु और ईर्ष्यालु दिखाते हैं और सोसाइटी के वॉचमैन से फ्लैट की मालकिन के अंत:वस्त्र ठीक कराते हैं। कपूर की बीवी का किरदार ऑडियो नोट्स से सामने आता है। और, जब उसका वीडियो दिखता है तो वह भी किसी ‘विषकन्या’ सरीखी नजर आता है कहने को सीरीज का निर्देशन किन्हीं नवीन गुजराल ने किया है, लेकिन सीरीज की महिला किरदारों के चरित्र चित्रण पर विकास बहल की छाप साफ नजर आती है।
Anant-Radhika Pre Wedding: प्री-वेडिंग समारोह में विदेशी मेहमान लगाएंगे चार चांद, देखें दिग्गजों की लिस्ट
जी हां, कबिरा इस संसार में..
कहानी, स्क्रिप्ट और संवादों में सीरीज इतनी थकी हुई है कि इसमें तड़का मारने के लिए जसमीत यूपी की तरफ बीते 50 साल से प्रचलित वह अश्लील दोहा लिखने से भी नहीं चूकते कि ‘कबिरा इस संसार में भांति भांति के लोग हैं.. ।’ जी हां, इसकी दूसरी लाइन सीरीज में ज्यों की त्यों है। हर किरदार को कैमरे के सामने कुछ ऐसा नमूना बनाकर पेश किया गया है कि क्रेडिट्स में मुझे मेकअप महारथी का नाम तलाशना ही पड़ा। पता चला कि सुश्री पायल भाटिया ने मेकअप किया नहीं, बल्कि हेयर एंड मेकअप डिजाइन किया है। इस चक्कर में बेचारे प्रोडक्शन डिजाइन करने वाले मंदार नागांवकर अपने काम पर ध्यान ही नहीं दे पाए। कहने को कोणार्क सक्सेना जैसा नाम भी सीरीज के एडिटर के रूप में भी लिखा है लेकिन ऐसी सीरीज में तो क्या ही लेखन, क्या ही निर्देशन और क्या संपादन। मनोरंजन सामग्री परोसने वाले ओटीटी अगर उपभोक्ता संरक्षण कानून के अंतर्गत आते होते, तो इस सीरीज को देखने में खर्च हुए समय का मुआवजा मांगने के लिए जी5 और विकास बहल पर केस जरूर दर्ज होते..! और हां, सीरीज के हीरो सुनील ग्रोवर हैं। उनका जैसा काम है, वैसा ही उल्लेख मैंने इस समीक्षा में किया है। बाकी कम लिखे को ज्यादा समझना।