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Sky Force Review: अक्षय कुमार और वीर पहाड़िया की खूब जमी जोड़ी, पाकिस्तान से जीती 1965 की जंग की मार्मिक कहानी

Thu, 23 Jan 2025 08:52 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Thu, 23 Jan 2025 08:52 PM IST
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Sky Force Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Akshay Kumar Veer Pahariya Amar Kaushik Sara Nimrat Kaur Sara
स्काई फोर्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
स्काई फोर्स
कलाकार
अक्षय कुमार , वीर पहाड़िया , निमृत कौर , सोहम मजूदार , शरद केलकर , मनीष चौधरी , वरुण बडोला और सारा अली खान आदि
लेखक
कार्ल ऑस्टिन , संदीप केवलानी , आमिल कीयान खान और निरेन भट्ट
निर्देशक
अभिषेक अनिल कपूर और संदीप केवलानी
निर्माता
दिनेश विजन , अमर कौशिक और ज्योति देशपांडे
रिलीज
24 जनवरी 2024
रेटिंग
4/5

‘तेजस’, ‘फाइटर’ और ‘ऑपरेशन वैलेंटाइन’, ये तीनों फिल्में भारतीय वायुसेना के अदम्य साहस, युद्ध कौशल और वीरता की कहानी कहती हैं। लेकिन, तीनों ही फिल्में बॉक्स ऑफिस पर विफल रहीं। ऐसे में फिल्म ‘स्काईफोर्स’ के ट्रेलर पोस्टर देखकर ये लगातार लगता रहता है कि कहीं ये फिल्म भी तो बीजेपी शासनकाल में पाकिस्तान पर एयरस्ट्राइक की एक और कहानी दिखाती फिल्म तो नहीं है। लेकिन, नहीं। ये फिल्म तो वहां चली गई है जब देश के प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री थे। ‘जय जवान, जय किसान’ सबसे लोकप्रिय नारा था। भारत के पास तब, बस दो किमी रडार शक्ति वाले लड़ाकू विमान थे और पाकिस्तान अमेरिकी 25 किमी रडार शक्ति वाले लड़ाकू विमानों से लैस था। फिर क्या हुआ पाकिस्तान के बीचोबीच बसे सरगोधा एयरबेस पर? और क्या किया एक नौजवान ने जिसने दुनिया में विमानन इतिहास का एक नया अध्याय लिख दिया? आओ इसका पता लगाएं..

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Sky Force Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Akshay Kumar Veer Pahariya Amar Kaushik Sara Nimrat Kaur Sara
स्काई फोर्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कांग्रेसी शासनकाल में एयरस्ट्राइक की कहानी
फिल्म ‘स्काईफोर्स’ फिल्म शुरू होते ही बता देती है कि ये कहानी पाकिस्तान को विलेन बनाकर दिखाने की कोई कोशिश नहीं है। 1971 के युद्ध से कहानी शुरू होती है। पाकिस्तान का एक एयरफोर्स अफसर पकड़ा जाता है। भारतीय सेना उसको वैसा ही सम्मान देती है जैसा वर्दी पहने एक अफसर को दुश्मन देश में भी मिलना चाहिए। फिर कहानी फ्लैशबैक में वहां जाती है जहां 1965 की लड़ाई में वीरता दिखाने के लिए इस पाकिस्तानी अफसर को वीरता पदक मिला। आमने सामने बैठे भारतीय और पाकिस्तानी एयरफोर्स के दो अफसरों के बीच की बातचीत ही फिल्म का मुख्य आधार बनती है। अपने जूनियर अफसर को अपने छोटे भाई की तरह प्यार करने वाला ये भारतीय अफसर आखिरकार उसका पता निकाल ही लाता है। देश इस जूनियर अफसर के घरवालों से माफी मांगता है। उसे महावीर चक्र देता है। दर्शक तालियां बजाते हैं। अपने आंसू पोछते हैं और भावुक मन से सिनेमाहॉल के बाहर आते हैं।

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Sky Force Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Akshay Kumar Veer Pahariya Amar Kaushik Sara Nimrat Kaur Sara
स्काई फोर्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

देश के लिए पागल रहने वालों की कहानी

लीक से अलग हटकर कुछ कर जाने वाले या करने की सोचने वाले ‘पागल’ ही होते हैं, ये बात ये फिल्म भी साबित करती है। क्रिकेट का पहला वर्ल्ड कप जीतने वाली भारतीय टीम के कप्तान कपिल देव से मैंने अभी फिल्म ‘83’ की रिलीज के वक्त जब बातचीत की थी, तो उनका भी यही कहना था, ‘कैप्टन जो होता है न वो थोड़ा पगला होता है!’ और, इसी बात को ध्यान में रखकर फिल्म ‘स्काई फोर्स’ की कहानी लिखी गई है। कार्ल ऑस्टिन, संदीप केवलानी और आमिल कीयान खान ने जो कुछ लिखा है, उसमें निर्माता अमर कौशिक के खासमखास रहे लेखक निरेन भट्ट ने भी अलग से बहुत कुछ जोता, बोया है। फसल अच्छी उगी है। टिकट खिड़की पर पैदावार कितनी शानदार होती है, ये उन दर्शकों को तय करना है, जो अच्छी फिल्मों को सिनेमाघरों में देखने के लिए बेताब रहते हैं, लेकिन ऐन मौके पर फिल्मों के ओटीटी पर आने के इंतजार में बिजी हो जाते हैं।

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Sky Force Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Akshay Kumar Veer Pahariya Amar Kaushik Sara Nimrat Kaur Sara
स्काई फोर्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

अक्षय ने पकड़ा अमिताभ वाला रास्ता
फिल्म ‘स्काई फोर्स’ अच्छी बनी है। फिल्म चूंकि रूलाने में सफल रहती है तो इसे बेहतर का दर्जा भी दिया जा सकता है। लेकिन, इसकी बॉक्स ऑफिस चुनौती कुछ और है। एक तरह से देखा जाए तो ये अक्षय कुमार का बतौर लीड हीरो पुनर्जन्म कराने वाली फिल्म है। लेकिन, अक्षय ने खुद अपनी ब्रांडिंग इतनी कमजोर कर ली है, कि उनकी अच्छी फिल्मों के लिए भी दर्शकों को सिनेमाघरों तक खींच कर लाना किसी चुनौती से कम नहीं है। अक्षय अब अपने करियर में उस ट्रैक पर चल रहे हैं जिस पर चलकर अमिताभ बच्चन ने अपने दौर में खूब कामयाबी पाई। ये ट्रैक है दो हीरो वाली फिल्मों का। अमिताभ बच्चन की जितनी कालजयी फिल्में हैं, उनमें दो या दो से अधिक हीरो वाली फिल्मों की संख्या सबसे ज्यादा है। कभी शशि कपूर, कभी ऋषि कपूर, कभी शत्रुघ्न सिन्हा, कभी विनोद खन्ना तो कभी धर्मेंद्र और दूसरे सितारे, इन सब सितारों ने अमिताभ बच्चन को अमिताभ बच्चन बनाया है। अक्षय भी उसी राह पर चले हैं। और, बिल्कुल नए चेहरे वीर पहाड़िया के साथ उनकी ट्यूनिंग भी जमी है। वीर पहाड़िया पूरी तैयारी के साथ कैमरे के सामने उतरे हैं। टाइगर श्रॉफ वाला बेमतलब गुरूर उनमें नहीं दिखता और न ही अमन देवगन वाला अति आत्मविश्वास। अगर स्टारडम का नशा उन पर न चढ़ा तो, बोहनी उनकी सही हो चुकी है।

Sky Force Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Akshay Kumar Veer Pahariya Amar Kaushik Sara Nimrat Kaur Sara
स्काई फोर्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

निर्देशक जोड़ी की शानदार ओपनिंग
संदीप केवलानी और अभिषेक अनिल कपूर, ये दो फिल्म ‘स्काई फोर्स’ के निर्देशक हैं। ‘रनवे 34’ संदीप ने ही लिखी थी। अभिषेक लंबे समय से फिल्म निर्देशक अमर कौशिक के सहायक रहे हैं। अब अमर फिल्म निर्माता भी हैं और इस पूरी फिल्म के लेखन व निर्देशन में अमर की छाप नजर भी आती है। फिल्म के संवादों को दर्शकों के एहसासों के करीब रखने में अमर का अनुभव काम आया है और अभिषेक व संदीप ने सबसे अच्छा काम किया है अक्षय कुमार को छोटे छोटे संवाद देकर। जहां उनके संवाद बड़े हैं, वहां उन्होंने कमाल ये किया है कि कैमरा अक्षय के चेहरे पर नही रखा है। अक्षय शूटिंग के समय सामने लगे कागज को देखकर संवाद पढ़ते हैं, ये बात अब किसी से छिपी नहीं रही। हाल ही में शुरू हुआ सिनेमैटोग्राफर असीम बजाज का स्टेज शो शुरू ही इसी प्रसंग से होता है। अक्षय को उनकी कमजोरियां छिपाकर और उनकी मजबूतियां दिखाकर फिल्म ‘स्काईफोर्स’ में नए सिरे से पैकेज किया गया है। लाउड एक्टिंग से उनको बचाकर रखा गया है। निमृत कौर उनकी पत्नी के किरदार में हैं और उनको भी दोनों निर्देशकों ने बहुत सहज बनाए रखा। और, सारा अली खान को फिल्म की कहानी में मतलब भर का ही फुटेज देकर भी अभिषेक और संदीप ने बड़ा काम किया है।

Sky Force Movie Review in Hindi by Pankaj Shukla Akshay Kumar Veer Pahariya Amar Kaushik Sara Nimrat Kaur Sara
स्काई फोर्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

मनोज मुंतशिर के माई को सौ में सौ नंबर
सिर्फ दो घंटे पांच मिनट की ये फिल्म अपनी कहानी, पटकथा, अभिनय व निर्देशन के अलावा अपने एक्शन सीक्वेंस और संगीत की वजह से भी मजबूत बनी है। एस के रविचंद्रन की सिनेमैटोग्राफी की परवेज शेख व क्रेग मैकरे की एक्शन डिजाइनिंग से जो जुगलबंदी बनी है, वह देखने लायक है। स्पेशल इफेक्ट्स बहुत कुछ ‘तेजस’, ‘फाइटर’ और ‘ऑपरेशन वैलेंटाइन’ जैसे ही लेकिन फिल्म में चूंकि भावनाओं पर फोकस ज्यादा है लिहाजा ये स्पेशल इफेक्ट्स वाले सीन फिल्म में जरूरत भर के ही रखे गए हैं। ए श्रीकर प्रसाद ने फिल्म को शुरू से आखिर तक चुस्त बनाए रखा है। इंटरवल प्वाइंट भी समझदारी भरा है। फिल्म में तीन गीतकारों इरशाद कामिल, मनोज मुंतशिर और श्लोक लाल के गीत हैं। इन तीनों में अव्वल नंबर जो गाना है वह मनोज मुंतशिर का ‘माई’ ही है। तनिष्क बागची की धुन पर बी प्राक ने इसे गाया भी बहुत दिल से है, कुछ कुछ मनोज के ही गाने ‘तेरी मिट्टी’ की तरह। जिन तीन और लोगों का विशेष उल्लेख यहां जरूरी है, वे हैं साउंड डिजाइनर गणेश गंगाधरन जिन्होंने आवाजों को शोर में तब्दील नहीं होने दिया है। मेकअप डिजाइनर तरनन्मुम खान व कॉस्ट्यूम डिजाइनर शिवांक विक्रम कपूर, जिन्होंने फिल्म की ढाई दशकों के बीच बुनी गई कहानी में रूप सज्जा और वेशभूषा को खूब अच्छे से संभाले रखा है।

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