Paatal Lok Season 2 Review: हाथीराम की बनावटी हाइप पर मत जाना, ‘पाताल लोक’ में उतरने से पहले इसलिए थम जाना
Paatal Lok Season 2 Review: पाताल लोक का दूसरा सीजन कैसा है आइए इस रिव्यू के जरिए जानते हैं।
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हाथीराम और अंसारी के बीच का जो दोस्ताना, दोनों के पदों में आए बदलाव के बावजूद कायम रहता है, वह ही इस सीरीज का सबसे मजबूत पक्ष है। लेकिन, जूनियर के सीनियर बन जाने के बाद भी अपने ट्रेनिंग कोच को सर कहते रहने की केमिस्ट्री कितनी देर तक देखी जा सकती है भला। लैब के एक्सपेरिमेंट जैसी इस कहानी में फिर अनानास के नाम पर हेरोइन का धंधा आ मिलता है। नॉर्थ ईस्ट के विद्रोहियों को होने वाली फंडिंग का सिरा भी खुलता है और ये भी खुलता है कि उत्तर पूर्व में बरसों से भसड़ मचा रहे ये उग्रवादी आखिर करते क्या हैं, कमाते क्या हैं और खाते-पीते क्या हैं? एक तरह से इस बार हाथीराम चौधरी को उत्तर पूर्व के तथाकथित विद्रोहियों के चेहरे का नकाब नोचना है।
पांच साल बाद परदे पर लौटे हाथीराम चौधरी का वजन बढ़ा हुआ दिखता है। उसका चढ़ा हुआ पेट बताता है कि ये सीरीज हाल फिलहाल तो शूट हुई नहीं है। शायद सही समय के इंतजार में रही होगी। अमेजन प्राइम ने इसे नेटफ्लिक्स के ‘ब्लैक वारंट’ के मुकाबले में उतारा है और दोनों का मुकाबला अगर देखा जाए तो जहान कपूर का सादापन हाथीराम चौधरी के बार बार की एक जैसी झुंझलाहट पर भारी है। कहानी के स्तर पर बेहद कमजोर इस सीजन की पटकथा भी दिल्ली से लेकर नागालैंड तक बिखर जाती है। और, संवाद चूंकि बहुत सारे नागामी (नागालैंड की बोली) में है लिहाजा हिंदी के आम दर्शक को हिंदी से अंग्रेजी, अंग्रेजी से नागामी में कूदते रहने में परेशानी भी होती ही है।
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