फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Never Let Go Movie Review by Pankaj Shukla Alexandre Aja Halle Berry Shawn Levy Percy Daggs Anthony B. Jenkins

Never Let Go Review: आफत के बीच जब बेटे का ही टूट जाए मां पर भरोसा, हैली बेरी की एक और अवॉर्ड विनिंग फिल्म

Fri, 20 Sep 2024 08:45 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 20 Sep 2024 08:45 PM IST
विज्ञापन
Never Let Go Movie Review by Pankaj Shukla Alexandre Aja Halle Berry Shawn Levy Percy Daggs Anthony B. Jenkins
'नेवर लेट गो' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
नेवर लेट गो
कलाकार
हैली बेरी , पर्सी डैग्स फोर्थ , एथंनी बी जेनकिन्स , मैथ्यू केविन एंडरसन , क्रिस्टिन पार्क और स्टीफैनी लैविग्ने
लेखक
केविन कफलिन और रयान ग्रासबी
निर्देशक
अलेक्जान्ड्रे अजा
निर्माता
शॉन लेवी , डान कोहेन , अलेक्जान्ड्रे अजा और डैन लेवाइन
रिलीज
20 सितंबर 2024
रेटिंग
3/5

अंग्रेजी हॉरर फिल्मों के दीवानों के लिए ‘हिल्स हैव आईज’, ‘मिरर्स’, ‘पिरान्हा थ्रीडी’, और ‘क्रॉल’ जैसी फिल्में अलग ही स्तर की फिल्में रहीं हैं। इन्हें बनाने वाले निर्देशक अलेक्जान्ड्रे अजा हॉरर श्रेणी की फिल्मों के समर्पित निर्देशक रहे हैं और अपनी पहली फिल्म ‘हॉते टेंशन’ (2003) से इसी श्रेणी की फिल्मों पर डटे रहे हैं। शॉन लेवी अपनी पिछली फिल्म ‘डेडपूल एंड वूल्वरिन’ से अंग्रेजी फिल्मों के दर्शकों के दिलो दिमाग पर अभी हावी ही हैं और इन्हीं शॉन लेवी की फिल्म निर्माण कंपनी 21 लैप्स एंटरटेनमेंट की नई फिल्म है ‘नेवर लेट गो’। शॉन और अलेक्जान्ड्रे की सोच के इस संगम की त्रिवेणी पूरी हुई है ऑस्कर विजेता अभिनेत्री हैली बेरी के इस फिल्म में शीर्ष नायिका के साथ साथ बतौर निर्माता भी साथ आने से।

विज्ञापन

Never Let Go Movie Review by Pankaj Shukla Alexandre Aja Halle Berry Shawn Levy Percy Daggs Anthony B. Jenkins
'नेवर लेट गो' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

उत्तरजीविता को फिर से परिभाषित करती फिल्म

फिल्म ‘नेवर लेट गो’ डरावनी फिल्मों की श्रेणी की उस उप श्रेणी की फिल्म है जिसे अंग्रेजी में सर्वाइवल ड्रामा कहा जाता है। हिंदी में इसे हम उत्तरजीविता को लेकर बना डरावना सिनेमा कह सकते हैं। इस तरह के सिनेमा में किसी एक व्यक्ति, समूह या समाज को किसी जानी पहचानी या अनजान शक्ति से बचना होता है। जीवित बने रहने का ये संघर्ष आसपास के वातावरण से खुराक पाता है और इसके किरदार हालात के हिसाब से अपने रंग बदलते रहते हैं। फिल्म ‘नेवर लेट गो’ दरअसल फिल्म ‘मदर लैंड’ के नाम से बननी शुरू हुई थी। कहानी ये एक ऐसी मां की है जो दुनिया तबाह होने के बाद एक ऐसे जंगल में बने घर में अपने जुड़वा बच्चों के साथ पनाह लिए हुए है, जहां भूतों के साये उसे नजर आते हैं। तीनों घर से बाहर निकलते हैं तो घर की नींव से बंधी रस्सी से अपनी कमर कसे रहते हैं और हर बार बाहर निकलने से पहले एक दूसरे से वादा करते हैं, ‘नेवर लेट गो’, मतलब रस्सी को छोड़ना नहीं है।

विज्ञापन
विज्ञापन

Never Let Go Movie Review by Pankaj Shukla Alexandre Aja Halle Berry Shawn Levy Percy Daggs Anthony B. Jenkins
'नेवर लेट गो' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सच क्या है, जो बड़ों ने बताया या फिर..!

केविन कफलिन और रयान ग्रासबी की फिल्म ‘नेवर लेट गो’ का ऊपरी स्तर ठेठ हॉरर फिल्म जैसा है। मां है। दो बेटे हैं। दोनों रोज खाने की तलाश में निकलते हैं। जो कुछ भी जीवित उनको नजर आता है। पकड़ कर जिंदा या भूनकर या तलकर खा जाते हैं। जंगल भले विशाल है। जानवर वहां भी सीमित है। नौबत पेड़ों की छाल तक खाने की आती है। लेकिन, इससे काम बनता नहीं। घर में तीन इंसानों के अलावा चौथा, एक जानवर भी है। ये कुत्ता दोनों बेटों में से एक का जिगरी है। तय होता है कि अब इसे खाना पड़ेगा। जिसका ये पालतू है, वह विद्रोह कर देता है। दूसरा बेटा और मां के वोट निर्णायक बन जाते हैं। मां कुत्ते को मारने के लिए ले जाती है और बेटा मां की कमर में बंधी रस्सी काट देता है। फिल्म ‘नेवर लेट गो’ यहां से अपनी असली पहचान पाती है और बताती चलती है कि जो कुछ दिखता है, वह हमेशा सत्य नहीं होता है। सत्य वह भी नहीं होता जिसे सुन सुनकर हम बड़े होते हैं या फिर जिसे हमें सत्य मानकर घुट्टी में पिलाने की कोशिश होती है।

Jaya Bachchan: जब जया बच्चन के पिता ने अमिताभ बच्चन का किया था बचाव, अभिनय छोड़ने के फैसले पर कही थी बड़ी बात

विज्ञापन

Never Let Go Movie Review by Pankaj Shukla Alexandre Aja Halle Berry Shawn Levy Percy Daggs Anthony B. Jenkins
'नेवर लेट गो' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

स्वयं, समूह और समाज की डरावनी समझ

फिल्म ‘नेवर लेट गो’ की अंतर्धारा भीतर तक हिला देने वाली है। इंसान के लिए सबसे जरूरी वह खुद है। अपने स्वार्थ के लिए वह रिश्ते, नाते, वफादारी कुछ नहीं देखता। और, रिश्तों में सबसे अहम होता है विश्वास। ये टूटा तो फिर रिश्ता, रिश्ता नहीं रहता। और, जब रिश्तों की मजबूती नहीं होती तो फिर सामने होता है जमाना। जिसकी हकीकत को झेल पाना अकेले अकेले किसी के बस की बात नहीं। निर्माता शॉन लेवी ने शायद इस कहानी की इसी अंतर्धारा पर अपना दांव लगाया और इसी अंतर्धारा को मजबूती देने हैली बेरी भी बतौर निर्माता इस फिल्म से जुड़ीं। मैंने ये फिल्म जब देखी तो हिंदी फिल्म ‘छोरी’ के निर्देशक विशाल फूरिया पास वाली सीट पर बैठे थे। इंटरवल में हम दोनों यही बातें करते रहे कि हिंदी में हॉरर सिनेमा को मजबूती देने के लिए शॉन लेवी जैसे लोगों के साथ साथ हैली बेरी जैसे समर्पित कलाकार तो चाहिए ही, साथ ही लॉयन्सगेट जैसी ऐसी कंपनियां भी चाहिए जो इस तरह की कम बजट मे बनी फिल्मों को सिनेमाघरों तक पहुंचा सकें।

Triptii Dimri: तृप्ति डिमरी को लगातार आ रहे हैं शादी के प्रपोजल, बोलीं- 'मुझे मैसेज आ रहे हैं'

Never Let Go Movie Review by Pankaj Shukla Alexandre Aja Halle Berry Shawn Levy Percy Daggs Anthony B. Jenkins
'नेवर लेट गो' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

क्या वाकई नागिन अपने बच्चे खाती है?

हिंदी में हॉरर को मजबूती देने के छिटपुट प्रयास पहले भी होते रहे हैं। ‘शैतान’, ‘स्त्री 2’ और री रिलीज पर ‘तुम्बाड’ की सफलता ये बताती है कि हिंदी में भी हॉरर फिल्में देखने वाले दर्शकों का एक बड़ा वर्ग ऐसी फिल्मों के लिए बेकरार बैठा है। और, फिल्म ‘नेवर लेट गो’ जैसी फिल्मों से अपनी आस पूरी करने की कोशिश करता है। इस फिल्म की असल जान हैं इसकी नायिका हैली बेरी। वह दर्शकों को फिल्म के लिए आकर्षित करने का काम तो करती ही हैं, बतौर अभिनेत्री भी उन्होंने फिल्म में एक बेबस मां का जो अभिनय किया है, वह अवार्ड विनिंग परफॉर्मेंस है। बेटों के भटकते ही उनकी गर्दन के पास छुरा लेकर उनसे मंत्र पढ़वाना, आत्मा की शुद्धिकरण के लिए तहखाने में कैद करना, ये सब एक मां की मजबूरी की निशानियां हैं। और, इसे हैली ने बहुत ही शानदार तरीके से कैमरे के सामने जीया है। असल जिंदगी में भी तो मांए ऐसी ही होती हैं। बच्चों की सुरक्षा के लिए कुछ भी कर गुजरती हैं। बच्चों को जंगल में अजगर की केंचुल मिलती है और भले नागिन अपने बच्चों को ही खा जाती हो लेकिन यहां कहानी फिल्मी होते हुए भी मां अपने बच्चों की ही रहती है। हैली बेरी के बच्चे बने पर्सी डैग्स फोर्थ, एथंनी बी जेनकिन्स ने भी सराहनीय अभिनय इस फिल्म में किया है।

Stree 2 Box Office Collection Day 37: सरकटे का आतंक बरकरार, जानें 'स्त्री 2' के 37वें दिन का कारोबार

Never Let Go Movie Review by Pankaj Shukla Alexandre Aja Halle Berry Shawn Levy Percy Daggs Anthony B. Jenkins
'नेवर लेट गो' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

माहौल की महत्ता बताती फिल्म

फिल्म ‘नेवर लेट गो’ सिनेमा में वातावरण की महत्ता को भी दर्शाने वाली फिल्म है। वैंकूवर के पास के जंगलों में शूट की गई इस फिल्म के लिए कयामत के बाद का जैसा वातावरण कहानी के अनुसार चाहिए था, वैसा तलाशने में और उसके बीच बने घर को परदे पर इकलौती शरणस्थली के रूप में प्रदर्शित करने में ही फिल्म की पहली जीत है। ये जंगल, इसके बाशिंदे, इसमें बना कुआं, इसकी रस्सियां, रस्सियों को थामे खड़ा घर, सब इस कहानी के किरदार हैं। और, फिल्म के लिए ये माहौल रचने में इसकी टीम ने अद्भुत काम किया है। प्रोडक्शन डिजाइनिंग में तो फिल्म एक नंबर है ही, मैक्साइम अलेक्जान्ड्रे की सिनेमैटोग्राफी फिल्म की रूह है। इसे स्पंदन देने का काम किया है फिल्म के पार्श्वसंगीत ने जिसे रॉबिन कोउडर्ट ने बहुत ही इत्मीनान से रचा है। हॉरर फिल्मों के शौकीनों के लिए ये एक अच्छी टाइम पास फिल्म हो सकती है।

Rakt Bramhand: सामंथा रुथ प्रभु ने शुरू की 'रक्त ब्रम्हांड' की शूटिंग, राज-डीके की सीरीज पर आया बड़ा अपडेट

विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय Hindi News वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें Entertainment News से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। मनोरंजन जगत की अन्य खबरें जैसे Bollywood News, लाइव टीवी न्यूज़, लेटेस्ट Hollywood News और Movie Reviews आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed