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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Mufasa The Lion King Review in Hindi by Pankaj Shukla Barry Jenkins Shah Rukh Khan Aaryan Abram Shreyas Sanjay

Mufasa The Lion King Review: अपनी ही कहानी में विलेन बन गया टाका, बुरा बनने को बार बार करता रहा मुफासा का भला

Wed, 18 Dec 2024 11:30 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 18 Dec 2024 11:30 PM IST
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Mufasa The Lion King Review in Hindi by Pankaj Shukla Barry Jenkins Shah Rukh Khan Aaryan Abram Shreyas Sanjay
मुफासा: द लॉयन किंग - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
मुफासा: द लॉयन किंग
कलाकार
शाहरुख खान , मेयांग चांग , मकरंद देशपांडे , श्रेयस तलपदे , संजय मिश्रा , आर्यन खान और अबराम खान
लेखक
जेफ नैथनसन
निर्देशक
बैरी जेन्किन्स
निर्माता
वाल्ट डिज्नी पिक्चर्स
रिलीज:
20 दिसंबर 2024
रेटिंग
4/5

डिज्नी की साल 1994 में आई एनीमेशन फिल्म ‘द लॉयन किंग’ का इसी नाम का साल 2019 में रिलीज हुआ रीबूट संस्करण जिसने भी देखा है, उसे अंदाजा है कि एनीमेशन का स्तर डिज्नी की फिल्मों में कहां तक पहुंच चुका है। असली जैसे दिखने वाले पशु, पक्षी, जंगल, नदी और पहाड़ों के बीच घटती एक बेहद मार्मिक कहानी में मुफासा जंगल का राजा बनता है, लेकिन राजा बनना क्या इतना सरल है? क्या वाकई दुश्मन जन्मजात होते हैं? या फिर मित्रों की तरह शत्रु भी हमारे अपने व्यवहार से ही बनते हैं। कुदरत हर उस शख्स का इम्तिहान लेती है जिस पर वह नेमतें बरसाना चाहती है। डार्विन के विकास के सिद्धांत के नजरिये से समझें तो यहां सर्वश्रेष्ठ की ही उत्तरजीविता है यानी सरवाइवल ऑफ द फिटेस्ट! अपनी फिल्म ‘मूनलाइट’ के लिए ऑस्कर पुरस्कार जीत चुके निर्देशक बैरी जेन्किन्स ने निर्देशक जॉन फैवरेयू से ये मशाल थामी है और फिल्म देखने के बाद कहा जा सकता है कि उन्होंने एक ऐसी फिल्म बनाने में कामयाबी पाई है जो दर्शकों को गुदगुदाती है, हंसाती है और रुलाती भी है...!

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Mufasa The Lion King Review in Hindi by Pankaj Shukla Barry Jenkins Shah Rukh Khan Aaryan Abram Shreyas Sanjay
मुफासा: द लॉयन किंग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
खोया पाया की सार्वभौमिक कहानी..
फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ की कहानी वहां से शुरू होती है जहां मुफासा का बेटा सिम्बा अपने परिवार में एक नए सदस्य के स्वागत की तैयारी कर रहा है। उसकी बेटी कियारा को रफीकी उसके बाबा की कहानी सुना रहा है और साथ में पुम्बा और टिमोन भी आ जुड़ते हैं। कहानी बिल्कुल बी आर चोपड़ा या मनमोहन देसाई की उन फिल्मों जैसी है जिनमें ‘लॉस्ट एंड फाउंड’ फॉर्मूले पर कहानी को आगे बढ़ाया जाता है। यहां मुफासा अपने मां-बाप से बिछड़ता है। बरसात के पानी के उफान में फंसता है और पानी से इतना डर जाता है कि बड़े होने तक तैरने से डरता है। ‘जिन खोजा तिन पाइयां गहिरे पानी पैठ’ वाली लोकोक्ति को फिल्म के क्लाइमेक्स में सटाकर इसके पटकथा लेखक जेफ नैथनसन ने इसके किरदारों को एक सार्वभौमिक किरदार में सजाया है। फिल्म ‘द लॉयन किंग’ का स्कार भी यहां मुफासा के बचपन के साथी टाका के रूप में दिखता है। दोनों का दोस्ताना कमाल है। टाका का पिता हालांकि मुफासा को पसंद नहीं करता लेकिन जब बाहरियों का हमला होता है तो उनका मुकाबला मुफासा ही करता है। और, फिर टाका की जान की हिफाजत की जिम्मेदारी भी मुफासा को ही मिल जाती है।

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Mufasa The Lion King Review in Hindi by Pankaj Shukla Barry Jenkins Shah Rukh Khan Aaryan Abram Shreyas Sanjay
मुफासा: द लॉयन किंग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
सब कुछ तो अच्छा ही किया टाका ने
मुफासा और टाका की दोस्ती के बीच अदावत का कारण सराबी बनती है। वह भी निर्जन वन में अकेली है। टाका उस पर फिदा है। मुफासा उसे इश्क की तरकीबें सिखाता है। लेकिन, सराबी शागिर्द पर नहीं उस्ताद पर फिदा है। कहानी यहां बलखाती है। थोड़ा इतराती हुई उस ओर आगे बढ़ती हैं, जहां गम भी न हो, आंसू भी न हो, बस प्यार ही प्यार पले। लेकिन, उसके पहले कहानी स्वर और व्यंजनों की जीवन में अहमियत समझाती है। टाका के स्कार बनने से पहले की कहानी रोचक है, मनोरंजक है और प्रेम के असली महत्व को समझाने वाली है। ध्यान से देखें तो ये फिल्म दरअसल टाका के स्कार बनने की कहानी है। हीरो से ज्यादा ये इस कहानी में विलेन बने राजकुमार की कहानी है। जिसने मुफासा को मरने से बचाया, जिसने एक बेघर को अपने परिवार में मिलाया, जिसने उसे एक अनाथ को सब कुछ दिया, उसी से दोनों के जवां होने पर जीवन में आई पहली मादा ने प्यार नहीं किया। काम तो सारे टाका ने हीरो वाले ही किए, फिर? ये फिर ही, फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ की कहानी का मर्म है। वो मर्म जिसके मुताबिक जीवन में बुरा बनने के लिए तमाम लोगों का अच्छा करना होता है। 
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मुफासा: द लॉयन किंग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
बैरी की एक और ऑस्कर दावेदारी!
निर्देशक बैरी जेन्किन्स ने जब ये फिल्म साइन की तब तक उन्हें इसकी पूरी कहानी नहीं पता थी। पटकथा लेखक जेफ नैथनसन के साथ बैठकर जब इस पर उन्होंने काम शुरू किया तो समझ आया कि ये जो उनकी जैसी ही कहानी है। बैरी के बारे में कम जानने वाले लोग ये जानकर हैरत में पड़ सकते हैं कि उनका बचपन बहुत गरीबी में बीता है। उनकी मां को और उन्हें एक दयालु महिला ने पाला। बैरी जब पेट में थे तो उनका पिता उन्हें लावारिस छोड़ गया। बैरी के तीन और सौतेले भाई रहे, तीनों के पिता भी अलग अलग। बहुत मुश्किल से पढ़ाई आदि करके, बैरी ने सिनेमा सीखा और अब तो जो कुछ परदे पर किया है, उसमें इंसानियत सारे पहलू नजर आते हैं। सिनेमा में निजी अनुभवों को घोलने वाले निर्देशकों ने हमेशा से बड़े परदे पर कमाल किया है। बैरी भी इन कमाल के निर्देशकों में पहले से शुमार हैं। फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ ने उनके ताज में एक और मोरपंख लगाया है। ये फिल्म भले पशु, पक्षियों और कुदरत की कहानियां कहती हो लेकिन इसकी सारी भावनाएं बहुत मानवीय हैं और यही इस फिल्म की सबसे बड़ी जीत है। और, एनीमेशन में ऑस्कर की दावेदार भी बनती दिखती है। बच्चों को जिंदगी के मायने और इसके सबक सिखाती ये फिल्म एक संपूर्ण पारिवारिक मनोरंजन चित्र बन गई है।

Mufasa The Lion King Review in Hindi by Pankaj Shukla Barry Jenkins Shah Rukh Khan Aaryan Abram Shreyas Sanjay
मुफासा: द लॉयन किंग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
असल जैसे हैरान कर देने वाले एनीमेशन
तकनीकी रूप से फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ सिनेमाई कौशल का नायाब नमूना है। निर्देशक बैरी जेन्किन्स चूंकि लंबे लंबे शॉट्स लेने के लिए ही जाने जाते रहे हैं और किसी एनीमेशन फिल्म में ऐसा करना ही सबसे बड़ी चुनौती होती है। लेकिन, अपनी तकनीकी टीम के साथ मिलकर बैरी ने ये सब भी रचा है और इसीलिए इस फिल्म को देखने का अनुभव बिल्कुल अलग है। जेम्स लैक्सटन की सिनेमैटोग्राफी लोगों को लंबे अरसे तक याद रह जाने वाली है। जोइ मैकमिलॉन ने फिल्म की अवधि दो घंटे से भी कम रखकर अपने हुनर का मजबूत मुजाहिरा करने में सफलता पाई है। फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ का एक ही कमजोर पहलू है और वह है इसका संगीत। 1994 और 2019 में आई फिल्मों ‘द लॉयन किंग’ में हैंस जिमर ने जो पैमाना इस कहानी के संगीत का तय किया था, उस पर लिन मैनुअल मिरांडा सौ फीसदी खरे साबित नहीं हो सके। 

Mufasa The Lion King Review in Hindi by Pankaj Shukla Barry Jenkins Shah Rukh Khan Aaryan Abram Shreyas Sanjay
मुफासा: द लॉयन किंग - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
और, किंग खान का करिश्मा नंबर वन
फिल्म ‘मुफासा: द लॉयन किंग’ के हिंदी संस्करण में मुफासा का रुआब बिल्कुल अलग है। और, हो भी क्यों न, आखिर इसकी डबिंग शाहरुख खान ने जो की है। वह जब मुफासा के तौर पर टाका से मिलते हैं या भिड़ते हैं और जब सराबी से मोहब्बत की बातें करते हैं, तो लगता है कि ऐसा एहसास अपने संवादों में बस शाहरुख ही ला सकते हैं। काम वह यहां वीरू का कर रहे होते हैं लेकिन अंदाज उनका बिल्कुल गब्बर जैसा ही है और गब्बर इतना रोमांटिक हो तो फिर सराबी तो क्या बसंती को भी उससे प्यार हो ही जाएगा। अबराम के संवाद फिल्म में गिनती के हैं और आर्यन के हिस्से भी गिने चुने संवाद ही हैं। मेयांग चांग का काम काबिले तारीफ रहा है, वह टाका (स्कार) की आवाज बने हैं। श्रेयस तलपदे और संजय मिश्रा की जुगलबंदी हिट है। मकरंद देशपांडे की आवाज लगता है जैसे रफीकी के लिए ही बनी है। क्रिसमस सीजन में बुजुर्ग माता पिता या जवान हो रहे बच्चों के साथ देखने के लिए ये फिल्म बिल्कुल परफेक्ट है। छोटे बच्चों के साथ फिल्म देखने जा रहे हैं, तो उनके उत्साह की तो बात ही निराली होगी!

फिल्म मुफासा द लॉयन किंग’ के निर्देशक बैरी जेन्किन्स का एक्सक्लूसिव इंटरव्यू आप यहां देख सकते हैं..

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