Miya Biwi Aur Murder Review: एमएक्स प्लेयर की एक और कमजोर सीरीज, अपने रिस्क पर देखें ‘मिया बीवी और मर्डर’
मुंबई में इन दिनों अजब सा माहौल है। अंधेरी वेस्ट की हर कॉफी शॉप, हर ठीक ठाक से रेस्तरां और बार की हर दूसरी टेबल पर एक वेब सीरीज बन रही होती है। इन दिनों अधिकतर वेब सीरीज बनाने का एक ही फॉर्मूला है। ओटीटी में किसी ऐसे बंदे को सेट करो जो सब्जेक्ट ओके करा दे। कहानी लिखो। फिल्मों से रिटायर हो चुके कलाकारों को पकड़ो और स्टार्ट टू फिनिश शूटिंग करके ओटीटी को पकड़ा दो। पैसे एडवांस में मिल गए तो प्रोड्यूसर की सेटिंग ठीक है। नहीं मिले तो फिर भगवान मालिक है। महीनों तक प्रोड्यूसर चक्कर लगाते हैं। पैसे नहीं मिलते हैं तो वेब सीरीज एक ओटीटी से लेकर दूसरे ओटीटी तक भागते हैं। और, ओटीटी एमएक्स प्लेयर हो तो फिर तो कहने की क्या, बड़े बड़े प्रोडक्शन हाउस इनके यहां पैसों के लिए इन दिनों चक्कर लगाते मिल जाएंगे।
चरमसुख की समानांतर तलाश
एमएक्स प्लेयर की शुरुआत बहुत सनसनीखेज तरीके से हुई। हजारों घंटों का पुराना कॉन्टेंट एक साथ भारतीय दर्शकों को फ्री में मिल गया। लेकिन, इंटरनेट जहां सबसे सस्ता हो वहां सिर्फ अच्छी कहानियों से काम नहीं चलता। तो ‘मस्तराम’ जैसे लेखकों की तलाश हुई जो सादी कहानियों को ‘मनोहर कहानियां’ बना सकें। ऐसी ही नई मनोहर कहानी है एमएक्स प्लेयर की नई वेब सीरीज ‘मिया बीवी और मर्डर’। जी हां, मियां नहीं मिया। मियां यहां एक पुलिस अफसर है और घर में काम करने वाली में दैहिक संतुष्टि तलाश रहा है। बीवी उम्रदराज है और अपने से कम उम्र के मॉडल में चरमसुख ढूंढ रही है। ये क्रॉस कनेक्शन जिस रात खुलता है, उस रात की कहानी पर ये पूरी कहानी टिकी है। घटिया कहानियों पर बनी थकी हुई सीरीज की अंधेरी रातों की सुबह होती कम से कम एमएक्स प्लेयर पर नहीं दिखती।
अकड़े अकड़े से राजीव खंडेलवाल
ये ठीक है कि ओटीटी के आने से सिनेमा में हाशिये पर पहुंच चुके मनोज बाजपेयी जैसे कलाकारों के दिन बहुरे हैं। लेकिन, वह इसलिए कि मनोज बाजपेयी या पंकज त्रिपाठी या जयदीप अहलावत जैसे लोगों को एक्टिंग आती है। यहां राजीव खंडेलवाल हैं। पचास के करीब पहुंचते कलाकार को एक ऐसे रिश्ते में दिखाने जहां शादी को सिर्फ सात साल हुए हैं, हजम नहीं होता। उनका मेकअप इतना खराब है कि पूरे प्रोडक्शन की चुगली उनका परदे पर आया पहला क्लोजअप कर जाता है। 14 से वह बड़े परदे पर नाम कमाने की तलाश में रहे हैं। छोटे परदे पर कमाया नाम उनका अब काम नहीं आ रहा। ओटीटी ने उनको भी जीवनदान दिया है। लेकिन, लंबी रेस में बने रहने के लिए राजीव को अपनी उम्र के हिसाब से किरदार करने होंगे और थोडा अपनी दैहिक भाषा को दुरुस्त करना होगा। इतना अकड़ा हुआ शरीर परदे पर किरदार को सहज नहीं होने देता।
इस रात की सुबह नहीं
मंजरी फडनीस, रुशद राणा और वेब सीरीज ‘मिया बीवी और मर्डर’ के दूसरे किरदार भी बस भरती के हैं। अपने से कहीं कम उम्र के मॉडल में भले मंजरी का किरदार सुख पाता दिखता हो लेकिन इसके पीछे का उनका मंतव्य उनके किरदार को स्थापित नहीं होने देता। सीरीज कहीं ‘लव सेक्स और धोखा’ होती दिखती है तो कहीं ‘प्यार तूने क्या किया’। संबित मिश्रा ठीक ठाक लेखक रहे हैं। वेब सीरीज लिखने में उनकी पहचान भी धीरे धीरे बन ही रही थी, ऐसे में निर्माता बनने के चक्कर में ऐसा गोता लगाना पैसों के अलावा और किसी वजह से रहा हो, समझना मुश्किल है। गनीमत ये कि सीरीज के एपिसोड की औसत अवधि 20 मिनट ही है।
देखें कि न देखें
तकनीकी रूप से वेब सीरीज ‘मिया बीवी और मर्डर’ औसत से भी दोयम स्तर की सीरीज है। एमएक्स प्लेयर की छवि ऐसी हो चली है कि वह साल में एक बड़ी वेब सीरीज के साथ आठ दस ‘सत्यकथा’ और ‘मनोहर कहानियां’ जैसी सीरीज अपने ग्राहकों को चिटका दे रहा है। आप भी संभलकर रहिए। हालात एमएक्स प्लेयर की इन दिनों ठीक नहीं है। निर्माता इसके पहले से परेशान हैं, अब बारी दर्शकों की है