MEG 2 The Trench Review: समंदर में आफत की रोंगटे खड़े करने वाली कहानी, पाताल लोक से निकलीं दानवाकार मछलियां
जैसा फैन बेस हॉलीवुड सिनेमा देखने वाले देसी दर्शकों में मार्वल सिनेमैटिक यूनिवर्स, डीसी किरदारों, टॉम क्रूज और डेनियल क्रेग की जेम्स बॉन्ड वाली फिल्मों का रहा है, कुछ कुछ वैसा ही लेकिन बिल्कुल अलग क्रेज एक्शन हीरो जैसन स्टैथम का भी भारत में बन चुका है। पांच साल पहले उनकी प्रागैतिहासिक काल की दानवाकार शार्क मछली से भिड़ंत ने फिल्म ‘मेग’ को बॉक्स ऑफिस की ब्लॉकबस्टर फिल्म बनाया था और तभी इस बात का एलान हो गया था कि इसकी सीक्वल बनने जा रही है। पिछली फिल्म की तरह इस बार भी ये फिल्म एक उपन्यास पर ही आधारित है पर खतरा इस बार तीन गुना ज्यादा है। क्योंकि, आमतौर पर अकेले रहने वाली इन विशालकाय मछलियों ने अब समूह में शिकार करना सीख लिया है। धरती के समंदर को पाताल से अलग करने वाली परत टूट चुकी है। डायनासोर के समय के तमाम जीव भी इन मछलियों के साथ धरती तक चले आए हैं...
समंदर की गहराइयों का नया मोड़
फिल्म ‘मेग 2’ की कहानी इस बार सीधे जैसन स्टैथम के किरदार जोनस टेलर से शुरू होती है। समंदर में दूषित रसायन फेंक रहे पानी के जहाज पर वह इन करतूतों की तस्वीरें उतारता दिखता है। पकड़े जाने की नौबत आती है तो वह धरती से मीलों दूर बीच समंदर में इस जहाज से कूद जाता है। पता चलता है कि वह उसी प्रयोगशाला में अब काम करता है जिस पर उसे पिछली बार आपातकाल में मदद के लिए बुलाया गया था। प्रयोगशाला अब मिनवे झांग के बेटे के नेतृत्व में चल रही है। मिनवे की नातिन मेयींग बड़ी हो चुकी है। और, इस बीच प्रयोगशाला में एक भेदी की घुसपैठ भी हो चुकी है। सामान्य रूप से चल रही समंदर की गहराइयों की पड़ताल अचानक तब खतरनाक मोड ले लेती है जब गैर कानूनी रूप से हो रही पाताल लोक की एक खोदाई से प्रागैतिहासिक काल की मछलियां समंदर की सतह पर आ जाती हैं।
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उपन्यास की कहानी पर चुस्त पटकथा
स्टीव एलन के लिखे उपन्यास ‘द ट्रेंच’ पर पिछली फिल्म ‘मेग’ के लेखकों ने ही एक बार फिर उतनी ही चुस्त पटकथा लिखी है। भयानक जीव जंतुओं पर बनी फिल्मों का वैसे तो एक तय पैटर्न होता है जिसमें हंसती खेलती एक जिंदगी में उनका आकस्मिक आगमन होता है और फिर इस जिंदगी से तमाम दूसरे लोगों की जिंदगियां जुड़ती जाती हैं। व्यक्तिगत आपदा के रूप में विकसित होती कहानी सामुदायिक त्रास में बदल जाती है और हीरो आखिर में किसी तरह इस आक्रामक जीव से मुक्ति पा लेता है। लेकिन, ये जाना पहचाना ढर्रा भी तब रोचक हो जाता है जब लेखक कहानी को अचंभित कर देने वाले मोड़ों से गुजारता है। किरदारों की मनोभावनाएं ऐसे में काफी काम आती हैं और निर्देशक अगर प्रकृति के विनाशकारी स्वरूप को परदे पर पेश करने में अपनी विहंगम दृष्टि की सही इस्तेमाल कर ले जाए तो फिल्म रोचक बन जाती है।
बेन ह्विटले का काबिलियत का नमूना
फिल्म ‘मेग 2’ इसके लेखकों के साथ साथ इसके निर्देशक बेन ह्विटले की भी तकनीकी क्षमता का अच्छा नमूना बन जाती है। दर्शक को पता तो होता है कि अब क्या होने वाला है, लेकिन ये कैसे होने वाला है, बस इसी एक पेंच में उसकी उत्सुकता आखिर तक अटकी रहती है। 116 मिनट की फिल्म ‘मेग 2’ में दर्शकों को सोचने का मौका देने वाले कम ही आते हैं और दो घंटे से भी कम का ये समय आराम से बीत जाता है। सिनेमाघरों में दर्शकों को लाने का भी यही एक सूत्र है कि दर्शक फिल्म देखते समय कुछ और सोच ही न सके। बेन व्हीटले की तारीफ यहां इसलिए भी करनी होगी क्योंकि पिछली फिल्म ‘मेग’ के निर्देशक जॉन टर्टेलटॉब ने इस फ्रेंचाइजी का जो मानक तय किया था, उससे वह आगे ही निकलते दिखते हैं।
जैसन स्टैथम के कंधों पर टिकी फिल्म
कलाकारों में देखा जाए तो फिल्म पूरी तरह से जैसन स्टैथम की है। उनका अपना एक अलग स्टाइल है बातें करने का और हमेशा धीर गंभीर बने रहने का। वह सामने दिखने वाली मुसीबत पर केंद्रित रहते हैं। यहां भी वह कहते हैं कि चुनौतियां ढेर सारी हो सकती हैं लेकिन अगर पहले जो सामने दिख रही है, उससे पार पा लिया जाए तो उसके बाद वाली चुनौती से भिड़ना बेहतर हो जाता है। फिल्म ‘मेग 2’ चाइनीज मीडिया कैपिटल (सीएमसी) के पैसे से बनी है और इसलिए फिल्म को चीन के दर्शकों में लोकप्रिय बनाने के लिए वहां के चर्चित हीरो वु जिंग को भी फिल्म में लिया गया है। वु जिंग ने फिल्म में जैसन की तरह तो हीरोगिरी नहीं दिखाई है लेकिन कहानी में तनाव का तंबू ताने रखने में उनका किरदार बड़ी भूमिका निभाता है।
मेयींग के किरदार में सोफिया और मैक के किरदार में क्लिफ कर्टिस फिल्म ‘मेग 2’ के प्रवाह को लगातार गति देते रहते हैं। डीजे के मजाकिया किरदार में पेज केनेडी तनाव को कम करने का अपना काम बखूबी अंजाम देते हैं। पटकथा, अभिनय, निर्देशन के अलावा फिल्म की तकनीकी टीम ने भी अपना काम अच्छा किया है। फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स काफी शानदार हैं और शार्क मछलियों के आक्रमण के कुछ दृश्य तो वाकई सिहरा देने वाले हैं, खासतौर से फिल्म की शुरुआत में इनका आकार स्थापित करने के लिए फिल्माया गया दृश्य। निर्देशक के अलावा पिछली फिल्म के सिनेमैटोग्राफर और एडिटर भी ‘मेग 2’ में नहीं हैं और इसके चलते पानी के भीतर के कुछ दृश्य अपनी पकड़ खोते चलते हैं। खासतौर पर प्रयोगशाला तक समंदर के भीतर पैदल पहुंचने की कोशिशों के दृश्य।संगीत उन्हीं हैरी ग्रेगसन विलियम्स का है जिन्होंने पिछली बार रोमांच रचने में काफी योगदान किया था। फिल्म ‘मेग 2’ रोमांच, रफ्तार और पानी पसंद करने वाले दर्शकों के लिए इस हफ्ते की मनोरंजक फिल्म है।