Free Guy Movie Review: रयान रेनॉल्ड्स की कॉमेडी का नया कौतुक, वीडियो गेम में कल्पनालोक का सुपरहीरो

Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Mon, 13 Sep 2021 07:58 PM IST
फ्री गाइ
फ्री गाइ - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
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Movie Review
फ्री गाइ
कलाकार
रयान रेनॉल्ड्स , जोडी कॉमर , जोए कीरी , ताइका वाटिटी , लिल रेल हॉवरी और उत्कर्ष अंबुडकर
लेखक
मैट लिबरमैन और जैक पेन
निर्देशक
शान लेवी
निर्माता
शान लेवी , रयान रेनॉल्ड्स , सारा शेशलर , ग्रेग बर्लान्टी और एडम कोलब्रेननर
थिएटर
थिएटर
रेटिंग
3.5/5
हिट फिल्मों पर वीडियो गेम बनाना या हिट वीडियो गेम्स पर फिल्में बनाना हॉलीवुड का हिट शगल है। ‘स्ट्रीट फाइटर’ ‘रेजीडेंट एविल’, ‘टूम्ब रेडर’, ‘मॉर्टल कॉम्बैट’ से लेकर ‘सुपर मारियो ब्रदर्स’ तक ऐसी फिल्मों की लंबी परंपरा हॉलीवुड में रही है। लेकिन, फिल्म ‘फ्री गाइ’ इन सबसे कई लेवल ऊपर की फिल्म है। यहां वीडियो गेम ही फिल्म की कहानी बन जाता है। आमतौर पर किसी वीडियो गेम में पृष्ठभूमि में दिखने वाले किरदारों में से कोई किरदार अगर खुद ही खेल खेलने लग जाए, तो क्या होगा? इसी एक लाइन के विचार पर निर्देशक शान लेवी ने दो घंटे फिल्म ‘फ्री गाइ’ बनाई है और क्या कमाल फिल्म बनाई है। आर्टीफिशियल इंटेलिजेंस के दौर में क्या हो अगर किसी वीडियो गेम का किरदार खुद ही चीजें निर्धारित करने लग जाए। आसानी से समझना हो तो समझिए कि अगर किसी फिल्म की कहानी का कोई किरदार अपने मन से कहानी को घुमाने लग जाए तो क्या होगा? है ना रोचक विचार। कोरोना संक्रमण काल के अवसाद भरे समय में फिल्म ‘फ्री गाइ’ अपने इसी विचार से दो घंटे तक दर्शकों को अपने साथ बांधे रखती है।
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जोडी कॉमर और जोए कीरी
जोडी कॉमर और जोए कीरी - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘फ्री गाइ’ का मुख्य किरदार है गाइ। बैंक में नौकरी करता है। सुबह उठकर वार्डरोब में रखी एक ही रंग की शर्ट और पैंट पहनता है। गोल्ड फिश से गुड मॉर्निंग करता है। कमरे की खिड़की की ब्लाइंड्स सरकाता है। बैंक में डकैती पड़ने पर अपने खास दोस्त बडी के साथ फर्श पर लेटकर बातें करता है। लेकिन रोज एक जैसी कॉफी पीने वाले इस किरदार को वीडियो गेम में ही एक दिन एक लड़की का किरदार दिखता है। और, उसकी जिंदगी बदल जाती है। वीडियो गेम के बाहर वीडियो गेम बनाने वालों और खेलने वालों की दुनिया है। गाइ जो कुछ वीडियो गेम में करता है, दुनिया समझती है कि कोई वीडियो गेम प्लेयर ये सब कर रहा है। लोग उस प्लेयर के बारे में जानना चाहते हैं। फ्री सिटी नामक वीडियो गेम में हुई इस नई हलचल की असलियत जल्द ही उस जोड़े को समझ आ जाती है जिनके मूल वीडियो गेम की असल डिजाइन चोरी करके इस गेम में डाली गई है। और, यहीं से फिल्म में बुराई के खिलाफ अच्छाई की जंग शुरू हो जाती है।

रयान रेनॉल्ड्स, जोडी कॉमर
रयान रेनॉल्ड्स, जोडी कॉमर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
मैट लिबरमैन की जैक पेन के साथ मिलकर लिखी गई पटकथा फिल्म की असली हीरो है। पूरी फिल्म कहीं भी एक मिनट के लिए भी दर्शकों को बोर नहीं होने देती। फिल्म में एक हिट फिल्म के सारे तत्व मौजूद हैं। साथ में ‘हल्क’, ‘कैप्टन अमेरिका’, ‘इन्सेप्शन’ जैसी फिल्मों के संदर्भ भी कुछ पलों के लिए आते हैं और अपना असर छोड़कर निकल जाते हैं। फिल्म ‘फ्री गाइ’ अवसाद से मुक्ति पाने के लिए एक परफेक्ट फिल्म है। इसकी कथा, पटकथा को इसके निर्देशक ने बहुत ही करीने से और नए जमाने के दर्शकों की रुचियों के हिसाब से बहुत ही कायदे से फिल्माया है। बंदूकों से होने वाली तबाही, दूसरों की मर्जी से हांके जाने वाली जनता, बौद्धिक संपदा अधिकारों की चोरी, कमजोर हुनरमंद पर ताकतवर कारोबारी की जोर आजमाइश जैसे मुद्दे भी बहुत ही सहज तरीके से कहानी में पिरोए गए हैं। फिल्म की अंतर्धारा में ये सामाजिक संदेश बहुत ही चतुराई से पिरोने में निर्देशक शान लेवी सफल रहे हैं।

फिल्म फ्री गाइ में जोडी कॉमर
फिल्म फ्री गाइ में जोडी कॉमर - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
कलाकारों में ये फिल्म रयान रेनॉल्ड्स की है। ‘डेडपूल’ के ठीक उलट रयान का ये किरदार उनकी अभिनय क्षमता का एक और बेहतरीन नमूना है। फिल्म ‘फ्री गाइ’ की शुरुआत में उनका किरदार टॉम क्रूज की फिल्म ‘एज ऑफ टुमारो’ की भी याद दिलाता है लेकिन जैसी ही फ्री सिटी का गाइ इस लूप से बाहर आता है और अपनी जिंदगी अपने हिसाब से जीने लगता है, दर्शकों को इस किरदार से प्यार हो जाता है। सिनेमा कल्पना से ही बनता है लेकिन अगर किसी फिल्म का कोई किरदार ही कल्पनाशील हो जाए तो कहानी का अंदाज बदल जाता है। ये एक जोखिम भरा प्रयोग था जिसमें निर्देशक शान लेवी और रयान रेनॉल्ड्स की जोड़ी सफल रही है। रयान की इस फिल्म को जोडी कॉमर और जोए कीरी की जोड़ी से भी काफी मदद मिलती है। वीडियो गेम उद्योग की तमाम असलियतें भी इस जोड़ी के सहारे शान लेवी दर्शकों के सामने परोसने में सफल रहे। ताइका वाटिटी का खलनायक रूप भले उतना असरकारी न रहा हो लेकिन लिल रेल हॉवरी और उत्कर्श अंबुडकर ने इस कमजोर कड़ी को भी संभाल लिया है।

फ्री गाइ में लिल रेल हॉवरी और रयान रेनॉल्ड्स
फ्री गाइ में लिल रेल हॉवरी और रयान रेनॉल्ड्स - फोटो : अमर उजाला, मुंबई
फिल्म ‘फ्री गाइ’ तकनीकी रूप से भी काफी उन्नत फिल्म है। जॉर्ज रिचमंड ने बतौर सिनेमैटोग्राफर फिल्म को इसकी आत्मा के करीब रखने में कामयाबी पाई है। उनकी कैमरा प्लेसिंग फिल्म के स्पेशल इफेक्ट्स वाले सीन में लाजवाब है। गाइ का पहली बार अपनी असल दुनिया और वीडियो गेम की दुनिया में फर्क समझ आने वाला दृश्य हो या फिर मोटोलोव की पहचान के साथ वीडियो गेम में दाखिल हुई मिली के साथ उसके बिछड़ने का दृश्य, हर दृश्य में जॉर्ज ने स्पेशल इफेक्ट्स के बीच भी इंसानी संवेदनाओं को कैमरे में कैद करने में सफलता पाई है। डीन जिमरमैन ने फिल्म का संपादन बहुत ही चुस्त रखा है। एक घंटे 55 मिनट की ये फिल्म पहले फ्रेम से आखिरी फ्रेम तक अपनी जो पकड़ बनाए रखती है, उसमें डीन का योगदान भी अहम है। फिल्म का संगीत क्रिस्टोफर बेक ने हालांकि टीन एजर्स के हिसाब से ही तैयार किया है, लेकिन पूरी फिल्म की कोई सिगनेचर ट्यून न होने से मामला थोड़ा उन्नीस लगता है। अगर फिल्म ‘फ्री गाइ’ का सीक्वेल बनना है तो इस किरदार की एक सिगनेचर ट्यून बनाई जा सकती है। अमेरिका में बीते महीने ही रिलीज हो चुकी फिल्म वहां सुपरहिट हो चुकी है, अब बारी भारत की है।
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