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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Final Destination Bloodlines Review in Hindi by Pankaj Shukla Adam Stein Zach Lipovsky Kaitlyn Santa Tony Todd

Final Destination Bloodlines Review: मौके का इंतजार करती मौत की सांस रोक देने वाली निगरानी, बहुत संभलकर देखें

Wed, 14 May 2025 09:12 AM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Wed, 14 May 2025 09:12 AM IST
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Final Destination Bloodlines Review in Hindi by Pankaj Shukla Adam Stein Zach Lipovsky Kaitlyn Santa Tony Todd
फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स
कलाकार
कैटलिन सांटा जुआना , टिओ ब्रियोन्स , रिचर्ड हारमन , ओवेन पैट्रिक जॉयनर , रया किहलस्टेट , एना रोल , ब्रेक बैसिंजर और टोनी टॉड
लेखक
गाय बुसिक , लोरी इवान्स टेलर और जॉन वाट्स
निर्देशक
एडम स्टीन और जैक लिपोव्स्की
निर्माता
क्रेग पेरी , शीला हनाहन टेलर , जॉन वाट्स , डियेन मैकगुनिगल और टोबी एमेरिच
बैनर्स:
न्यूलाइन सिनेमा, वार्नर ब्रदर्स
रिलीज डेट:
15 मई 2025
रेटिंग
3.5/5

मौत को चकमा देना, लेकिन आखिर कब तक? हिंदू धर्म में जीवन के सोलह संस्कारों का वर्णन है—जन्म से लेकर मृत्यु तक। इनमें से अंतिम संस्कार को अक्सर गंभीरता से तो लिया जाता है, परंतु जितनी उमंग से शेष संस्कारों के उत्सव मनाए जाते हैं, उतनी ही चुप्पी और भय मृत्यु को लेकर आज भी कायम है। जबकि मृत्यु एक अपरिहार्य सत्य है—अनिवार्य और अटल। मृत्युंजय मंत्र की मूल भावना यही है कि मृत्यु सहज हो, जैसे पेड़ से पकी हुई ककड़ी बिना पीड़ा के अलग हो जाती है। लेकिन सोचिए, अगर हमें यह पता हो कि मृत्यु हमें खोज रही है—हमारी ओर बढ़ रही है—तो? यही प्रश्नवाचक तनाव ‘Final Destination’ फिल्म सीरीज़ की रचनात्मक नींव है। 2000 में शुरू हुई यह हॉरर थ्रिलर फ्रेंचाइजी एक ऐसी कल्पना पर आधारित है जिसमें मौत को एक अदृश्य शक्ति के रूप में दिखाया गया है—जो गलती से बच निकले हर व्यक्ति का हिसाब बराबर करती है। लेकिन ‘Final Destination: Bloodlines’ इस बार एक कदम आगे जाती है।

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Final Destination Bloodlines Review in Hindi by Pankaj Shukla Adam Stein Zach Lipovsky Kaitlyn Santa Tony Todd
फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

छकाने वालों के लिए फिर लौटी मौत
इस भाग में कहानी सिर्फ़ एक व्यक्ति या समूह की नहीं, बल्कि पूरे वंश के खात्मे की है। दशकों पहले एक दुर्घटना में मात खा चुकी मौत, अब उन लोगों की संतानों को भी नहीं बख्शती जो उस दिन बच गए थे। एक युवती को इसका पूर्वाभास होता है। उसकी नानी के पास कुछ पुराने उपाय हैं—क्या वे उसे और उसके परिवार को बचा पाएंगे? इस फिल्म में मौत अचानक नहीं आती, वह इंतज़ार करती है, निगरानी रखती है, और फिर सबसे अकल्पनीय ढंग से प्रहार करती है। हमने अक्सर सुना है—‘कुत्ते की मौत मरना’—अर्थात ऐसी मृत्यु जो न ध्यान में आए, न सम्मान में। ठीक वैसी ही क्रूर, वीभत्स और आकस्मिक मौतें हैं इस फ्रैंचाइज़ी में। और इस बार तो, कहना पड़ेगा, मेरे जैसा मजबूत दिल वाला दर्शक भी कुछ दृश्यों पर सिहर उठा। अमेरिका में इस फ़िल्म को R रेटिंग मिली है, भारत में इसे A सर्टिफिकेट के साथ रिलीज किया गया है। आश्चर्य की बात यह है कि इसमें न कोई गाली है, न ही अश्लीलता। फिर भी, पूरी फिल्म अपने लगभग 110 मिनट के रनटाइम में दर्शक को पूरी तरह बांध लेती है। यदि नाट्यशास्त्र के नौ रसों में वीर, भयानक, रौद्र और वीभत्स रस आपकी पसंद के रहे हैं—तो यह फिल्म आपके लिए बनी है। पर चेतावनी है—दिल जरा भी कमजोर हो, तो अकेले मत देखिए।

छह दशकों में फैले कहानी के तार
फिल्म ‘फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स’ की कहानी कोई छह दशक पहले शुरू होती है जब एक नए नए खुले रेस्तरां में एक रूमानी जोड़ा मोहब्बत के कुछ पल एक साथ बिताने पहुंचता है। स्काईव्यू नाम का ये रेस्तरां जमीन से सैकड़ों फीट की ऊंचाई पर बना है और यहां पहुंची माशूक को आने वाले संकट का एहसास होता है। उसे समझ आता है कि ये पूरा रेस्तरां तबाह होने वाला है। इसमें आग लगने वाली है और पूरा रेस्तरां तहस नहस होकर जमींदोज हो जाने वाला है। फिल्म का ये पहला एक्शन सीक्वेंस ही इतना जबर्दस्त और रोंगटे खड़े कर देने वाले तरीके से फिल्माया गया है कि आगे की फिल्म का पूरा मूड अपने आप सेट हो जाता है। ‘फाइनल डेस्टिनेशन’ फ्रेंचाइजी देखते रहे दर्शक समझ जाते हैं कि ये असल में हुआ नहीं है और किसी ने आती हुई मौत का धोखा दे दिया है। लेकिन, मौत यहां एक नहीं थी, सैकड़ों मौतें होनी थीं। ये पूरी घटना आज के समय में उस महिला की नातिन को सपने में नजर आ रही है जिसने इस हादसे को होते हुए रोक लिया था। नातिन स्कूल हॉस्टल में रहती है और समझ नहीं पा रही कि ऐसा क्यों हो रहा।

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Final Destination Bloodlines Review in Hindi by Pankaj Shukla Adam Stein Zach Lipovsky Kaitlyn Santa Tony Todd
फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

भयानक और वीभत्स रस के रसिकों की फिल्म
सपना इतना बुरा है कि देखने वाला फिर सो नहीं सो सकता। हादसा सपना देखने वाली छात्रा की नानी से जुड़ा है, ये थोड़ी छानबीन के बाद सामने आता है। युवती अपनी नानी से मिलने पहुंच भी जाती है और वहीं उसके सामने नानी एक भयानक मौत मरती है। फिल्म ‘फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स’ की आगे की कहानी अब सबको पता है। दर्शक जानते हैं कि आगे पूरी फिल्म में अब इस पूरी ब्लडलाइन यानी कि पूरे वंश वृक्ष को तहस नहस होना है। जुगुप्सा बस इस बात की रहती है कि ये मौतें कैसे अंजाम दी जाएंगी। यहीं आकर फिल्म नई सदी की बदलती सामाजिक सोच को भी सामने लाती है। अभी रणबीर कपूर की फिल्म ‘एनिमल’ जब हिट हुई थी तो इस पर बहुत बहस हुई। तब मैंने लिखा था कि बीते 25 साल से जो पीढ़ी विदेशी वीडियो गेम में सिर्फ ज्यादा से ज्यादा लोगों की हत्या करके खुश होती रही है, ये उसी पीढ़ी की फिल्म है। फिल्म ‘फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स’ भी उसी वीडियो गेम जेनरेशन की फिल्म है। फिल्म देखते समय जिस तरह हैरतअंगेज तरीके से होने वाली मौतों पर युवा दर्शक तालियां बजाते हैं, वह एक पूरी पीढ़ी की बदली हुई सोच का आइना भी है।

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Final Destination Bloodlines Review in Hindi by Pankaj Shukla Adam Stein Zach Lipovsky Kaitlyn Santa Tony Todd
फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

एडम स्टीन और जैक लिपोव्स्की ने बचा ली फ्रेंचाइजी
फिल्म ‘फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स’ के निर्देशकों एडम स्टीन और जैक लिपोव्स्की की जीत इसी में है कि वे एक पूर्वानुमानित कहानी में भयानक और वीभत्स रसों का नया घोल तैयार करने में सफल रहे हैं। यहां मौत चूंकि दिखती नहीं है तो उसका रौद्र रूप भी सामने नहीं आता लेकिन इन मौतों के दृश्य इतने दिल दहलाने वाले हैं कि फिल्म को अमेरिका में आर रेटिंग मिली है और यहां भारत में ए। ‘केवल वयस्कों के लिए’ वाली फिल्मों के शौकीन भी ये फिल्म तभी देखने जाएं जब वे शैतानी स्तर का खून खराबा देख सकते हों। बड़े शहरों की कूड़ा गाड़ियों में कचरे को ‘प्रेस’करके उसकी लुगदी बनाती जाने वाले मशीन में होने वाली मौत हो या फिर एमआरआई मशीन में जा फंसे युवक के पीछे से व्हीलचेयर का मुड़कर उसके शरीर के पार निकल जाने वाला दृश्य हो, एक आम इंसान की सहनशीलता वाले दृश्य नहीं हैं। क्लाइमेक्स में वंशवृक्ष की आखिरी डालियां जब जमीन पर धराशायी होती हैं, तो वहां भी दिल दहल सकता है। एडम स्टीन और जैक लिपोव्स्की ने ‘फाइनल डेस्टिनेशन’ सीरीज को नया जीवन, या कहें कि ‘नई मौत’ दी है। ये मौत सीरीज की पिछली फिल्मों से भी ज्यादा खौफनाक है। इस बार रूब गोल्डबर्ग मशीन की प्रणाली से होने वाली इन अजीबोगरीब मौतों ने ही इस फ्रेंचाइजी को फिर से सिनेमाघरों में दर्शक खींच लाने लायक बना दिया है। 

Final Destination Bloodlines Review in Hindi by Pankaj Shukla Adam Stein Zach Lipovsky Kaitlyn Santa Tony Todd
फाइनल डेस्टिनेशन ब्लडलाइन्स रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इस सीजन की पैसा वसूल फिल्म
फिल्म के कलाकारों में स्कूली छात्रा स्टेफनी का किरदार निभा रहीं कैटलीन सांटा जुआना का काम जोरदार है। परिवार को बचाने की कोशिशों में लगी एक युवती का पूरा मनोविज्ञान कैटलीन ने बहुत ही मार्मिक तरीके से परदे पर जिया है। उनके भाई के रूप मे टियो का काम भी अच्छा है। शुरू में बहन से दूर भागते दिखने वाले भाई का बाद में उसके साथ आना और उसे बचाने के लिए जान जोखिम में डालना फिल्म को भावनात्मक पहलू भी प्रदान करता है। एरिक के किरदार में रिचर्ड हारमन ने यादगार किरदार निभाया है। अपने पिता से परेशान रहने वाला युवक जब गुस्से में अपने ही हाथ पर ‘डैड’ गोदता है तो कई आंखें सिनेमा हॉल में नम होती दिखती हैं। फिल्म की पटकथा हालांकि बीच में थोड़ा नरम होती है और दर्शकों का ध्यान भटकाती भी है। फिल्म में इस फ्रेंचाइजी के सबसे लोकप्रिय कलाकार टोनी टॉड भी हैं। ये फिल्म उन्हीं को समर्पित है। टोनी का अभी बीते साल नवंबर में लंबी बीमारी के बाद निधन हुआ है। फिल्म में भी वह काफी कृशकाय शरीर के साथ ही दिखते हैं, लेकिन उनकी अदाकारी और उनके बोलने का लहजा यहां भी अपना प्रभाव छोड़ने में सफल रहता ह। क्रिश्यिचन सेबाल्ट की सिनेमैटोग्राफी, सैबरीना पिट्रे का संपादन और पहली बार इस फ्रेंचाइजी में म्यूजिक दे रहे टिम विन ने भी फिल्म को समग्र रूप से प्रभावशाली बनाने में बढ़िया योगदान दिया है।

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