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Detective Sherdil Review: जोर जोर से बोलकर पूरी स्कीम बता देने वाली फिल्म, दिलजीत की आखिर तक संभालने की कोशिश

Fri, 20 Jun 2025 05:02 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 20 Jun 2025 05:02 PM IST
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Detective Sherdil Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Chhabriya Diljit Dosanjh Boman Irani Diana Penty AAZ
डिटेक्टिव शेरदिल मूवी रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
डिटेक्टिव शेरदिल
कलाकार
दिलजीत दोसांझ , डायना पेंटी , बनिता संधू , सुमीत व्यास , रत्ना पाठक शाह और बोमन ईरानी
लेखक
सागर बजाज , अली अब्बास जफर और रवि छाबड़िया
निर्देशक
रवि छाबड़िया
निर्माता
हिमांशु मेहरा , रोहिणी सिंह , मनमीत सिंह और अली अब्बास जफर
रिलीज
20 जून 2025
रेटिंग
1/5

फिल्म ‘फिर हेराफेरी’ में एक जगह अक्षय कुमार का संवाद है, ‘जोर जोर से बोलकर लोगों को स्कीमें बता दे’, बात व्यंग्य (सटायर) में कही जाती हैं, लेकिन इस एक वाक्य पर इंटरनेट पर इतने सारे मीम्स बन चुके हैं कि गिनना मुश्किल है। फिल्म ‘डिटेक्टिव शेरदिल’ इसी संवाद का ताजातरीन मीम है। धमाकेदार निर्देशक रहे अली अब्बास जफर का नाम फिल्म से क्यों जुड़ा है, ये तो वही जानें लेकिन फिल्म जिस तरह की बनी है और जिस तरह के ओटीटी पर रिलीज हुई है, ये उनकी कंपनी एएजी फिल्म्स के लिए ठीक नही हैं। वैसे, फिल्म बनाने वाली कंपनियों के तौर पर इसमें ऑफसाइड एंटरटेनमेंट और मौर्या एंटरटेनेमेंट का नाम भी जुड़ा है।

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सहायक निर्देशक को मिला मौका
हिंदी सिनेमा में अपने सहायकों को सुपरस्टार बना देने का तमगा फिल्म निर्देशक बिमल रॉय के नाम रहा है। ऐसी हर कोशिश की तारीफ होनी ही चाहिए जब कोई निर्देशक अपने सहायक निर्देशक की पहली फिल्म बनाने में मदद कर रहा हो। रवि छाबड़िया ने अली अब्बास जफर के साथ रहकर सिनेमा सीखा है, कितना सीखा है, ये कई बार सीखने वाली की अपनी कोशिशों पर भी निर्भर करता है। सिनेमा का बेसिक मंत्र है, परदे पर दिखाना, बोल बोलकर बताना नहीं। ‘डिटेक्टिव शेरदिल’ शुरू होते ही बस इसी एक बेसिक मंत्र पर औंधे मुंह गिर पड़ती है। 

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जोर जोर से बोलने वाली फिल्म
फिल्म ‘डिटेक्टिव शेरदिल’ की कहानी छोटी सी है और कातिल कौन?, जैसी थ्योरी से पानी पाती है। एक अरबपति कारोबारी का मर्डर हो जाता है, कातिल को तलाशने काम काम उस डिटेक्टिव शेरदिल को मिलता है, जो हर मौके बेमौके माउथ ऑर्गन (हॉरमोनिका) बजाता रहता है। सुख-दुख को समान रूप से ग्रहण करने वाले इस शेरदिल के पास हर मौके पर एक ही धुन है और वह सब कुछ समान रूप से देखता चलता है। इतना कैवल्य है, इसके जीवन में तो फिर ये जासूसी कर ही क्यों रहा है, इसकी तरफ भी फिल्म एक दो बार इशारा करने की कोशिश करती है। उधर, अपनी मूक बधिर बेटी से इशारों में बात करते हुए भी उसका कारोबारी पिता दर्शकों को सुनाने के लिए संवाद बोलता रहता है, और फिल्म बस ऐसे ही आगे खिसकती जाती है। शक यहां सभी पर है, जैसाकि ऐसी हर फिल्म में होता ही है। 

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Detective Sherdil Review in Hindi by Pankaj Shukla Ravi Chhabriya Diljit Dosanjh Boman Irani Diana Penty AAZ
डिटेक्टिव शेरदिल - फोटो : अमर उजाला

जी5 की एक और कमजोर फिल्म
फिल्म ओटीटी पर है लिहाजा इसे पॉज एंड प्ले करके देखने की सहूलियत हासिल है। पूरी फिल्म वन गो में देख लेने वालों को जी5 मुफ्त सब्सक्रिप्शन देने की ईनामी योजना भी शुरू कर सकता है। जी5 में फिल्में सेलेक्ट करने वाली टीम एक्स्ट्रीम पर काम करती है। या तो बहुत अच्छी फिल्म या फिर बहुत ही बोरिंग फिल्म। बीच का मीटर उनके यहां काम ही नहीं करता। एक बेहद चलताऊ कहानी पर लिखी भयानक सुस्त पटकथा वाली फिल्म ‘डिटेक्टिव शेरदिल’ की सिनेमैटोग्राफी भी इसकी लोकेशन की तरह बिल्कुल फॉरेन वाली है। पता नहीं फिल्म पंजाबी में बनाकर बाद में हिंदी में डब की गई है या कि सीधे हिंदी में ही बनी है, लेकिन दिलजीत जो कुछ यहां कैमरे पर करते नजर आ रहे हैं, वह किसी हिंदी फिल्म जैसा सेटअप तो नहीं लगता।

कातिल कौन? वाली कहानी
एक मूक बधिर बेटी के पिता का कत्ल हो गया है। बेटी के आशिक पर शक है। पता चलता है कि संभावित ससुर अपने असंभावित दामाद की बेइज्जती खूब करता था। बेटा अपनी अलग ही नाव पर सवार है। उसका बिजनेस लगातार डूब रहा है। पापा ने पैसे देने से मना कर दिया था। हिमालय जाने की उम्र में इस कारोबारी की बीवी के इश्क हो रहे हैं। तलाक की बात उठती है लेकिन शादी के इतने साल बाद पति-पत्नी के भाई-बहन से हो जाने की बात कहती बीवी ऐसा करती नहीं है। पुरानी वकील जो ठहरी। तो क्या एलिमोनी की बजाय उसे पूरी की पूरी दौलत चाहिए थी? पूरी फिल्म अगर आप देख पाए तो इस सवाल का जवाब आपको जरूर मिलेग।

और, कहानी ही सबसे कमजोर कड़ी
फिल्म ‘डिटेक्टिव शेरदिल’ की सबसे कमजोर कड़ी इसकी कहानी है, फिर बारी पटकथा की आती है और उसके बाद फिल्म का निर्देशन है। निर्देशक रवि छाबड़िया को एक सस्पेंस थ्रिलर फिल्म बनाने के लिए बहुत ही पक्के कलाकार मिले हैं। लेकिन, उनकी पटकथा और निर्देशन ने इसे कच्चा कर दिया है। सस्पेंस फिल्म में जब सस्पेंस खोलने का तरीका ही सस्पेंसफुल न हो तो मामला लटकने लगता है। फिर भी, फिल्म में दिलजीत ने अपनी मुस्कानों की खुशबू बिखरने की कोशिश की है। इसी कलाकार ने इस फिल्म के निर्माता अली अब्बास जफर के साथ कालजयी फिल्म ‘जोगी’ की है और अभी पिछली फिल्म ‘अमर सिंह चमकीला’ में अपने चाहने वालों को खूब रुलाया भी है। नवंबर में 40 की होने जा रही डायना पेंटी के लिए साल 2025 खूब फल रहा है। पहले ‘आजाद’, फिर ‘छावा’ और अब ‘डिटेक्टिव शेरदिल’, लेकिन उनका अभिनय आगे नहीं बढ़ पा रहा है। उनके हाव भाव भी किरदार के हिसाब से बदलते नहीं दिखते। फिल्म ने सबसे ज्यादा उपहास अपने सीनियर कलाकारों का उड़ाया है और ये देखकर भी दिल बहुत दुखता भी  है।

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