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Hindi News ›   Entertainment ›   Movie Reviews ›   Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang

Delhi Crime Season 2 Review: हौसले की कीमत चुकाती दिखीं डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी, सिनेमैटोग्राफी दिल जीत लेगी

Sat, 27 Aug 2022 12:33 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Sat, 27 Aug 2022 12:33 PM IST
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Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
दिल्ली क्राइम सीजन 2
कलाकार
शेफाली शाह , राजेश तैलंग , रसिका दुग्गल , आदिल हुसैन , अनुराग अरोड़ा , सिद्धार्थ भारद्वाज , तिलोत्तमा शोम और जतिन गोस्वामी आदि
लेखक
मयंक तिवारी , शुभा स्वरूप , एनसिया मिर्जा , संयुक्ता चावला शेख और विराट बसोया (नीरज कुमार की पुस्तक ‘मून गेजर’) पर आधारित
निर्देशक
तनुज चोपड़ा
निर्माता
एस के ग्लोबल एंटरटेनमेंट , गोल्डन कारवां और फिल्म कारवां ओरिजनल्स
ओटीटी
नेटफ्लिक्स
रेटिंग
4/5

‘दिल्ली का एक बहुत बड़ा तबका है जो रहता बस्तियों में है पर काम उनके लिए करता है जो दिल्ली के महलों में रहते हैं, ऐसे शहर को पुलिस करना पेचीदा काम है।’ इस मूल विचार के साथ बनी नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ को जब दो साल पहले एमी पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ ड्रामा सीरीज का पुरस्कार मिला, तो ये हिंदी मनोरंजन जगत के लिए एक लंबी छलांग थी। दुनिया को भारत की राजधानी की एक अलग तस्वीर दिखाने वाली इस सीरीज का अब दूसरा सीजन सामने है। सीरीज सिर्फ दिल्ली के अपराधों, इनके अपराधियों और इन अपराधियों के काम करने के तौर तरीकों की ही पड़ताल नहीं करती, ये सीरीज दिल्ली पुलिस के अफसरों और जवानों के उन हालातों को करीब से देखने की कोशिश करती है, जिनके तहत ये काम करते हैं। फिर अखबारों और न्यूज चैनलों की कुछ न कुछ सनसनीखेज खोजती रहने वाली आंखें हैं। मातहतों और उनके अधिकारियों के बीच बनते बिगड़ते रिश्ते हैं और हैं कुछ ऐसी कहानियां जो पुलिसवाले भी खुद कभी किसी से कह नहीं पाते।

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Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

अपराध कथा की सच्ची तस्वीर वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ का सीजन 2 सीधे अपने मुद्दे पर आता है। किरदार सारे पहले सीजन में ही पहचाने जा चुके हैं लिहाजा उनका अतीत या उनका वर्तमान सजाने की सीरीज कोशिश नहीं करती। ये सीरीज कहानी की आंखों में आंखे डालकर घूमते कैमरे के साथ फुर्ती से आगे बढ़ती है। सीरीज देखते समय अपराधियों से घिन भी होती है। पुलिस वालों से सहानुभूति भी होती है और सिस्टम से नाराजगी भी मन में आती है। एक पुलिस इंस्पेक्टर है जिसकी अपनी बेटी से सिर्फ इसलिए बातचीत बंद है क्योंकि वह उसकी शादी जल्दी से जल्दी करा देना चाहता है। एक आईपीएस अफसर है जिसके पति को उसके साथ बस कुछ वक्त बिताना है। वह अपनी पोस्टिंग से छुट्टी लेकर घर पर है और बीवी दिल्ली में हो रही सिलसिलेवार हत्याओं की तफ्तीश में व्यस्त है। और, इन सबकी मुखिया है डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी।

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Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

नीयत और नियति का संतुलन डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी के नजरिये से देखें तो दिल्ली पुलिस किसी नट की तरह हवा में बंधी रस्सी पर संतुलन बनाते हुए अपना काम करती है। शक की बुनियाद पर लोगों को उठाओ तो समाजसेवी वकील बीच में आ जाते हैं। दूर देश में पढ़ती बिटिया को देर रात फोन करो तो उसे लगता है कि उस पर कुछ ज्यादा ही नजर रखी जा रही है और पुलिस कमिश्नर के गले पर सियासी नेताओं की तलवार लटक रही है। मामला पिछली बार दुनिया भर को हिला देने वाले बलात्कार कांड का थो तो इस बार उत्सुकता इसी बात की रही कि उससे ज्यादा जघन्य किस अपराध पर ‘दिल्ली क्राइम’ की कहानी निकलेगी। मामला इस बार उस गिरोह का है जो अकेले रहने वाले मालदार बुजुर्ग दंपतियों को अपना निशाना बनाता है। सीरीज देखकर समझ ये भी आता है कि घर आने जाने वाले या रोज मिलने जुलने वाले अपनों में ही गद्दार कैसे गिरगिट की तरह रंग बदलकर छुपे रहते हैं।

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Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

सामाजिक भेदभाव पर तीखी टिप्पणी वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ अपराधों पर बनने वाली आम मुंबइया क्राइम सीरीज से बिल्कुल अलग है। इसके रचयिता रिची मेहता और निर्देशक तनुज चोपड़ा ने इस बार जो ताना बाना बुना है, उसमें दिल्ली के सामाजिक, राजनीतिक और आर्थिक पहलू सब एक साथ सामने आते हैं। अपराध होते ही पुलिस फाइलों में पहले से धूल खा रहे कागज निकाले जाते हैं। मौके पर मिले शुरुआती सबूत के पीछे पुलिस भागती है और ये देखने से चूक जाती है कि गलती उनसे कहां हो रही है। मामला उन घुमंतू आदिवासी समूहों तक भी जाता है जिन्हें अंग्रेजों के जमाने में अपराधियों को तमगा दे दिया गया और अब भी इलाके में अपराध होने पर डंडा सबसे पहले उन्हीं पर बजता है। डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी इस सामूहिक दोषारोपण से जब इस समुदाय के दो युवकों को भरी प्रेस कांफ्रेंस में रिहा करने का एलान करती है और पुलिस कमिश्नर के आदेश के विपरीत जाकर अपनी बेटी की कही बात पर अमल करती है तो सीरीज एकाएक दर्शकों की नजरों में कई दर्जे ऊपर पहुंच जाती है।

Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम सीजन 2 - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

कच्छा बनियान गिरोह से आगे की कहानी कहानी वहां से शुरू होती है जब दिल्ली के पॉश दक्षिणी इलाके पर एक साथ चार बुजुर्ग दंपतियों की हत्या होने से शहर भर में सनसनी फैल जाती है। डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी अपनी टीम के साथ इसमें जुटती हैं। कमिश्नर उन्हें एक रिटायर्ड इंस्पेक्टर की मदद लेने को कहते हैं और पूरी तफ्तीश उसी रास्ते मुड़ जाती है। हिम्मत करके इन आरोपियों के बीच से एक युवती डीसीपी की केबिन में घुसती है और मामला नया मोड़ ले लेता है। इसके बाद तफ्तीश के नए एंगल निकलते हैं। चोरी हुए जेवरों की बिक्री से मामला खुलना शुरू होता है और पहुंचता है वहां जहां झूठे दिलासों और उम्मीदों के तार तार होने पर सब कुछ जल्दी जल्दी हासिल कर लेने में लगी पीढ़ी की मानसिक दशा सामने आती है। कामयाबी के शॉर्टकट अक्सर दुर्घटनाएं कराते हैं, वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ इसी की कहानी कहते हुए अपने विराम पर वहां पहुंचती है जहां डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी को प्रमोशन मिलता है और पोस्टिंग मिलती है किसी दूर दराज इलाके में। साथ में मिलता है ये सबक कि हिम्मत और हौसला दिखाने की कीमत तो चुकानी ही होती है।

Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम - फोटो : अमर उजाला

हर शह को मात देतीं शेफाली शाह वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ के पहले सीजन की तरह यहां भी शेफाली शाह ही फोकस में हैं। हिंदी मनोरंजन जगत के दमदार कलाकारों को ओटीटी से मिली संजीवनी की वह मिसाल बन चुकी हैं। डीसीपी वर्तिका चतुर्वेदी की कार के बोनट पर बाईं तरफ फहराता तिरंगा भले फ्लैग कोड के सेक्शन 3.44 के मुताबिक ना हो लेकिन शेफाली शाह का अभिनय इस किरदार में एक बार फिर बिल्कुल सटीक है। साथी को गोली लगने के बाद इमरजेंसी वार्ड के बाहर उनके चेहरे पर आने वाले भाव, अपने मातहत काम करने वाली एसीपी से हुई चूक के बाद आए गुस्से के उबाल को नियंत्रित तरीके से पेश करने की उनकी कोशिश और कातिल को पकड़ने के बाद की बातचीत वाले दृश्य उनके अभिनय की असली तासीर पेश करते हैं। सीरीज के अगले सीजन में वह दिखेंगी या नहीं ये दूसरे सीजन के अंत से स्पष्ट नहीं है लेकिन गुंजाइश ये भी कि वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ के अगले सीजन में वह नहीं भी हो सकती हैं, और ऐसा होता है तो लोग उनकी इस अदाकारी को मिस जरूर करेंगे।

Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम - फोटो : अमर उजाला, मुंबई

साथी कलाकारों ही हर चाल दर्शनीय सीरीज को मजबूती इसके बाकी कलाकारों से हर दृश्य और हर कदम पर मिलती है। राजेश तेलंग और सौरभ भारद्वाज की अदाकारी से कहानी को मजबूती मिलती है। ये दोनों किरदार लगातार दर्शक को दिल्ली पुलिस के दूसरे पहलुओं से वाकिफ कराते रहते हैं। पुलिस कमिश्नर के रोल में आदिल हुसैन अपने सीमित दृश्यों में भी असरदार दिखते हैं। ट्रेनी से एसीपी बनीं रसिका दुग्गल का अभिनय अलग स्तर का है। राजधानी में बढ़ते अपराधों की तफ्तीश में लगी पुलिस अफसर और एक फौजी अफसर की बीवी का किरदार सीरीज को मानवीय दृष्टिकोण प्रदान करता है। और, इस सीजन में चौंकाने वाले किरदार में दिखी हैं तिलोत्तमा शोम। एक निर्माणाधीन इमारत में बड़े से शीशे के सामने उनके हाव भाव बहुत कुछ कह जाते हैं। वह सपनों की दुनिया में जीने वाली उस पीढ़ी की उम्मीदें हैं, जिन्हें सही मार्गदर्शन की हर पल जरूरत है। बार बार का तिरस्कार किसी इंसान के मनोविज्ञान को कैसे प्रभावित करता है, ये तिलोत्तमा का किरदार समझाता है। हालांकि, उसके अपराध के इसी मनोविज्ञान का स्पष्टीकरण सीरीज के क्लाइमेक्स को थोड़ा कमजोर भी करता है।

Delhi Crime Season 2 Review in Hindi by Pankaj Shukla Richie Mehta Tanuj Chopra Shefali Shah Rajesh Telang
दिल्ली क्राइम - फोटो : नेटफ्लिक्स

देखें कि न देखें तकनीकी रूप से वेब सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ के औसतन 40 मिनट के पांचों एपीसोड बेहतरीन हैं। डेविड बोलेन की सिनेमैटोग्राफी दर्शनीय है। दिल्ली के सामान्य जन जीवन को दिखाने के लिए जिस तरह के मोंटाज उनके कैमरे ने खींचे हैं, वे आम मुंबइया वेब सीरीज में कम ही दिखते हैं। अंतरा लाहिड़ी ने सीरीज का संपादन भी काफी चुस्त रखा है। वह कहीं भी कहानी की गति को धीमी नहीं पड़ने देतीं और ये उनके संपादन का भी कमाल है कि इस सीरीज को बीच में छोड़ने का मन नहीं करता। इस सप्ताहांत बिंज वॉच के लिए पूरी तरह से फिट सीरीज ‘दिल्ली क्राइम’ के दूसरे सीजन को सीरी टॉरजुसन के संगीत से भी अपनी लय ताल बनाए रखने में भरपूर मदद मिलती है।

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