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Chhota Bheem And The Curse Of Damyaan Review: बड़े परदे पर बाल सिनेमा का नया ‘यज्ञ’, सीक्वल की अभी से तैयारी

Fri, 31 May 2024 12:57 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 31 May 2024 12:57 PM IST
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Chhota Bheem And The Curse Of Damyaan movie Review by Pankaj Shukla Rajiv Chilaka Yagya Bhasin Anupam Kher
'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला
Movie Review
छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान (2024)
कलाकार
यज्ञ भसीन, आश्रिया मिश्रा, कबीर साजिद, दिव्यम डावर, दैविक डावर, अद्विक जायसवाल, मकरंद देश पांडे, नवनीत ढिल्लों, मुकेश छाबड़ा और अनुपम खेर
लेखक
नीरज विक्रम और श्रीदिशा
निर्देशक
राजीव चिलका
निर्माता
मेघा चिलका
रिलीज
31 मई 2024
रेटिंग
3/5

बीते डेढ़ दशक में टेलीविजन और ओटीटी के जरिये छोटा भीम का किरदार देश के कोने कोने तक पहुंच चुका है। इस किरदार पर बनी एनीमेशन सीरीज ने छोटा भीम की एनीमेशन फिल्मों को भी रास्ता दिखाया। ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ नाम से एक एनीमेशन फिल्म भी पहले बन चुकी है। लेकिन, किसी देसी एनीमेशन किरदार पर बनी और सिनेमाघरों में रिलीज हुई ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ देश की पहली लाइव एक्शन फिल्म है। छोटा भीम की लोकप्रियता जिस आयु वर्ग के बच्चों में हैं, उनके लिए घरों से निकलकर माता-पिता के साथ सिनेमाघरों की सैर करने का ये फिल्म अच्छा बहाना है और फिल्म बनाने वालों का उद्देश्य अपने इस लक्षित वर्ग को ही सिनेमाघरों तक लाना है।

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Chhota Bheem And The Curse Of Damyaan movie Review by Pankaj Shukla Rajiv Chilaka Yagya Bhasin Anupam Kher
'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

‘भैरव और बुज्जी’ बनाने वालों की फिल्म
हैदराबाद स्थित ग्रीन गोल्ड एनीमेशन स्टूडियो वही कंपनी है जिसने फिल्म ‘कल्कि 2898 एडी’ की पूर्वगाथा के रूप में ‘भैरव और बुज्जी’ नाम से एनीमेशन सीरीज बनाई है। अमेजन प्राइम वीडियो पर रिलीज इस एनीमेशन सीरीज की रिलीज के दिन ही फिल्म ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ भी सिनेमाघरों तक पहुंची है। कहानी ढोलकपुर गांव की है। जहां दमयान नामक एक दुष्ट नागपुरुष का आतंक मचा है। गांव के सबसे बड़े खैरख्वाह यानी छोटा भीम को अब समय में पीछे जाकर उस समय दमयान को खत्म कर देना है जब वह खुद को सर्वशक्तिमान बनाने की कोशिशें कर रहा है। वर्तमान से अतीत के बीच घूमती इस कहानी में छोटा भीम की अपनी मंडली है। उसका एक हमउम्र प्रतिद्वंद्वी भी है और हैं तमाम सारे जादू, टोने, टटके जो छोटे बच्चों के लिए मनोरंजन का अच्छा टाइम पास हो सकते हैं।

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Chhota Bheem And The Curse Of Damyaan movie Review by Pankaj Shukla Rajiv Chilaka Yagya Bhasin Anupam Kher
'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सीक्वल की अभी से तैयारी
ग्रीन गोल्ड स्टूडियो ने छोटा भीम को बड़े परदे पर लाने के लिए भी पूरी तैयारी की है। फिल्म नेटफ्लिक्स के लिए पहले ही बिक चुकी है और सैटेलाइट अधिकार भी फिल्म के अच्छी रकम में बिकने की जानकारी है। ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ फिल्म के अंत में इसकी सीक्वल का भी एलान है लिहाजा समझा ये जा सकता है कि छोटा भीम की फिल्मों की सीरीज बड़े परदे पर भी चलते रहने वाली है। कोई डेढ़ अरब की आबादी वाले देश भारत को दुनिया में सबसे ज्यादा फिल्में बनाने वाला देश माना जाता है, लेकिन बच्चों की फिल्में बनाने को लेकर कोई विशेषज्ञ स्टूडियो अब तक स्थापित नहीं हो पाया है। बच्चे डिज्नी की फिल्मों के इंतजार में रहते हैं और इसीलिए ‘जंगल बुक’, ‘लायन किंग’ और ‘मोआना’ जैसी फिल्में देश में अच्छा कारोबार भी करती हैं।

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'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

छोटा भीम के रूप में खूब जंचे यज्ञ भसीन
फिल्म ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ की मेकिंग और इसके एनीमेशन डिज्नी की फिल्मों जैसे तो नहीं हैं, लेकिन भारत में बड़े परदे पर इस दिशा में शुरुआत करने को ही ये एक साहसिक कदम माना जा सकता है। फिल्म से उत्तराखंड से आए कलाकार यज्ञ भसीन की भी बड़े परदे पर लीड रोल में बोहनी हो रही है। हिंदी फिल्मों व धारावाहिकों के वह चर्चित कलाकार हैं। लेकिन, किसी फिल्म का शीर्षक किरदार करना किसी भी कलाकार के लिए बड़ी उपलब्धि हो सकती है। हट्टे कट्टे शरीर के बावजूद चेहरे पर जो मासूमियत इस किरदार के लिए जरूरी है, उस पर यज्ञ सौ फीसदी खरे उतरे हैं। हरे परदे के सामने न दिखने वाले किरदारों की सिर्फ कल्पना करके अभिनय करना भी उनके लिए चुनौती ही रही होगी, लेकिन इसे भी उन्होंने सफलतापूर्वक पार किया है।

Chhota Bheem And The Curse Of Damyaan movie Review by Pankaj Shukla Rajiv Chilaka Yagya Bhasin Anupam Kher
'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

राजीव चिलका की अच्छी कोशिश
ग्रीन गोल्ड स्टूडियो के मालिक राजीव चिलका ही फिल्म ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ के निर्देशक हैं। उनकी पत्नी मेघा फिल्म की निर्माता हैं। अमेरिका में कंप्यूटर इंजीनियरिंग का अच्छा खासा करियर छोड़ राजीव एनीमेशन का ज्ञान हासिल करके डेढ़ दशक से भी पहले भारत लौटे और आज उनकी कंपनी की गिनती देश के बड़े एनीमेशन स्टूडियो में होती है। तकनीक का उनको अच्छा ज्ञान है। सिनेमा के सबक वह धीरे धीरे सीख रहे हैं। बतौर निर्देशक बड़े परदे की अपनी पहली फिल्म में उन्होंने काफी कुछ सीख भी लिया है। फिल्म में दमयान और छोटा भीम के साथी बंदर को कंप्यूटर पर ही रचा गया है और ये दोनों किरदार बड़े परदे पर काफी प्रभावी भी हैं।

Chhota Bheem And The Curse Of Damyaan movie Review by Pankaj Shukla Rajiv Chilaka Yagya Bhasin Anupam Kher
'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

कहानी और कास्टिंग पर मेहनत की जरूरत
‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ की कमजोर कड़ियों में इसकी बहुत साधारण सी कहानी पहली बड़ी बाधा है। इसमें कल्पनाओं की और बेहतर उड़ान की जरूरत है। फिल्म के लिए चुने गए बाल कलाकारों की शूटिंग से पहले दो तीन कार्यशालाएं किसी ऐसे निर्देशक के साथ करानी जरूरी थीं, जिन्हें बच्चों से अभिनय कराने का अनुभव रहा हो। अनुपम खेर को छोटा भीम के गुरु के रूप में लेना ही फिल्म की कास्टिंग की सबसे बड़ी जीत रही है। उनके नाम से फिल्म को एक बल भी मिलता है। हालांकि यही बात मकरंद देशपांडे और नवनीत ढिल्लों के लिए नहीं कही जा सकती है। फिल्म के कास्टिंग डायरेक्टर मुकेश छाबड़ा खुद भी यहां गुलाब चाचा के किरदार में हैं।

Chhota Bheem And The Curse Of Damyaan movie Review by Pankaj Shukla Rajiv Chilaka Yagya Bhasin Anupam Kher
'छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

बेहतर फ्रेंचाइजी की उम्मीद कायम
तकनीकी तौर पर फिल्म ‘छोटा भीम एंड द कर्स ऑफ दमयान’ को पासिंग मार्क्स दिए जा सकते हैं, लेकिन इस फ्रेंचाइजी को दुनिया भर में एक दमदार फ्रेंचाइजी के रूप में विकसित करने के लिए राजीव चिलका को बेहतर कहानियों और बेहतर एनीमेशन तकनीशियनों की मदद चाहिए होगी। इस मामले में डिज्नी की फिल्में उनका संदर्भ बिंदु हो सकती हैं। मोशन कैप्चर तकनीक की भी मदद वह अपनी अगली फिल्मों में ले पाए तो ये सीरीज बच्चों के लिए एक बढ़िया फ्रेंचाइजी के रूप में विकसित हो सकती है। फिल्म का गीत-संगीत बहुत कमजोर है, जमीन से जुड़ी फिल्मों में जमीन से जुड़ा संगीत, अलग अलग राज्यों का लोक संगीत और पारंपरिक वाद्य यंत्रों का इस्तेमाल जरूरी है। उम्मीद की जानी चाहिए कि इस फिल्म से सबक लेकर राजीव चिलका अपनी अगली फिल्मों में एक नई लकीर खींचने में सफल रहेंगे।

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