Bad Newz Review: विक्की कौशल और आनंद तिवारी की चंगी सी ट्यूनिंग, करण जौहर ने परोसी मेगा बजट पंजाबी फिल्म
विकी कौशल की हिंदी सिनेमा में बोहनी ही कॉमेडी फिल्म ‘लव शव ते चिकन खुराना’ से हुई लेकिन हाल में आईं बाकी तीन कॉमेडी फिल्मों में उनकी ‘लैंडिंग्स’ ठीक नहीं रहीं। इस बार विक्की कौशल ने कॉमेडी की उड़ान उन आनंद तिवारी के साथ भरी है, जिनके साथ वह छह साल पहले ‘लव पर स्क्वायर फुट’ कर चुके हैं। सीधे ओटीटी पर रिलीज हुई ये पहली हिंदी फिल्म मानी जाती है। विक्की कौशल बढ़िया अभिनेता हैं। ‘डंकी’, ‘सैम बहादुर’, ‘सरदार उधम’ और ‘उरी’ में वह खुद को साबित भी कर चुके हैं। स्टार मैटीरियल भी उनके भीतर है, ये फिल्म ‘बैड न्यूज’ पहली बार साबित करती है। सिद्धू मूसेवाला के साथ चले लंबे झगड़े के चलते सुर्खियों में रहे कनाडा निवासी पंजाबी गायक करण औजला के गाने ‘तौबा तौबा’ में विक्की कौशल ने यही स्टार मैटीरियल दिखाया है।
फिल्म ‘बैड न्यूज’ की कहानी सबको पता है इसलिए यहां छुपा कर रखने जैसा कुछ है नहीं। ट्रेलर से ये तो पता चल ही चुका है कि कहानी स्त्री के गर्भ में पल रहे ऐसे जुड़वा बच्चों की है जिनके पिता अलग अलग हैं। एक ही रात में ये दो गुल कैसे खिलते हैं, फिल्म इसी को सामने लाती है। दिल्ली की एक पंजाबी पार्टी में अपनी मांओं के साथ आए अखिल और सलोनी बिल्कुल ठेठ पंजाबी स्टाइल में मिलते हैं। और, इसके पहले कि दर्शक कुछ खास समझ पाएं दोनों शादी करके पंजाबी स्टाइल में ही हनीमून पर भी निकल जाते हैं। अखिल का अपना अतीत है। इसके चलते वह अपनी मां की कोई फोन कॉल मिस नहीं कर सकता। सलोनी इससे परेशान होती है। अखिल उसके साथ कुछ ज्यादा ही ‘पीडीए’ करता रहता है, सलोनी इससे और ज्यादा परेशान रहती है। ‘शौक’ और ‘सपने’ का फर्क समझाने निकली कहानी में दूसरा हीरो गुरबीर है, जिसके होटल में सलोनी दूसरी नौकरी करने जाती है। अखिल से चिढ़ी सलोनी गुरबीर के साथ हमबिस्तर होती है और उसी रात अपनी एनीवर्सरी मनाने पहुंचे अखिल को भी मना नहीं कर पाती है। अब इसके बाद फिल्म से फेमिनिज्म और साइंस का लॉजिक निकाल दिया जाए तो फिल्म एक अच्छी कॉमेडी फिल्म बन गई है।
कॉमेडी में विक्की कौशल की पिछली तीनों कोशिशें ‘द ग्रेट इंडियन फैमिली’, ‘जरा हटके जरा बचके’ और ‘गोविंदा नाम मेरा’ बॉक्स ऑफिस पर बैड न्यूज ही रही हैं, लेकिन फिल्म ‘बैड न्यूज’ में ग्रेट इंडियन (पंजाबी) फैमिलीज भी हैं। जरा हटके जरा बचके ये है पंजाब मेरी जान, भी है और साथ ही है, गोविंदा-करिश्मा कपूर का ‘व्हाट इज मोबाइल नंबर’! फिल्म ‘बैड न्यूज’ की कहानी अच्छी है। इसका आदि, मध्य और अंत भी अच्छा है। बस इनके बीच में इसके लेखकों ने चुटकुले खूब भर दिए हैं। धर्मा प्रोडक्शन्स की अपनी फिल्मों समेत दूसरी फिल्मों पर बने ढेर सारे गैग्स हैं। विक्की कौशल और उनकी पत्नी कैटरीना कैफ भी इसके लपेटे में हैं और फिल्म का एक अच्छा गाना है, ‘मेरे महबूब मेरे सनम’ की रीपैकेजिंग। बाकी गाने पंजाबी में हैं। फिल्म को पूरी पंजाबी फील भी देते हैं। करण औजला जैसे विवादास्पद गायक की हिंदी सिनेमा में लॉन्चिंग भी करण जौहर ने इस फिल्म से कर दी है।
कलाकारों में ये फिल्म विक्की कौशल के नाम है। निर्देशक आनंद तिवारी के साथ उनकी ट्यूनिंग पुरानी है और फिल्म का पूरा तमाशा है भी, उन्हीं के नाम। इशिता मोइत्रा और तरुण डुडेजा की पटकथा हालांकि कमजोर है लेकिन बाद में सुमीत व्यास से कराई गई इफरात की मेहनत इसको संभालती चलती है। चूंकि फिल्म की पटकथा में ठहराव की जरूरत इसे बनाने वालों ने महसूस नहीं की है लिहाजा विक्की कौशल भी उसी रफ्तार से अपने एहसास बदलते जाते हैं। मंदिर में मां के साथ बैठे विक्की कौशल का खुद को ‘सबसे अच्छा बेटा’ न होने की बात कहने वाला दृश्य हो या फिर तृप्ति के साथ वाले दृश्य में मां का फोन मिस करने का डर बताने वाला दृश्य, विक्की कौशल को मौका मिलता तो ऐसे एक दो कमाल वह इस फिल्म में और कर सकते थे। कॉमेडी में एमी विर्क के साथ वह बेजोड़ हैं और रूमानी दृश्यों में तृप्ति डिमरी का ‘ताप’ भी उनके साथ खूब मैच करता है। ‘तौबा तौबा’ गाने में कोरियोग्राफर बॉस्को के साथ मिलकर उन्होंने जो जादू रचा है, वह बस देखने की चीज है। फिल्म में एक दो दृश्य और गौर करने लायक है। एक तो वह जहां अखिल डॉक्टर से दोनों बच्चों को बेबी बग्गा कहकर बुलाने की दरख्वास्त करता है और दूसरा वो जहां वह अपना जान से प्यारा मोबाइल खुद से दूर कर आता है। मोहब्बत में ही लोग ये सब करते हैं। खुद को बदलते हैं। दूसरों को खुश रखते हैं।
तृप्ति डिमरी में ‘एनिमल’ की रिलीज के बाद से जो निखार आया है, आनंद तिवारी को उसका फायदा मिलने वाला है, उनकी ये फिल्म हालांकि बीते साल उससे पहले ही पूरी हो चुकी थी। भाभी नंबर 2 का जिक्र यहां इस फिल्म में भी आया है और तृप्ति की जो शख्सियत है, या उनके चेहरे पर जो एक अनोखी किस्म की मासूमियत है, उसमें उनका अंग प्रदर्शन भी खराब नहीं लगता है। घाघरा और चोली वाले दृश्य हालांकि तृप्ति की फिटनेस की चुगली करते हैं लेकिन एक मेराकी स्टार की बायोपिक करने निकली अनन्या के साथ वाले हर दृश्य में वह अपने से छोटी स्टार किड से भी इक्कीस नजर आती हैं। विक्की की तरह ही तृप्ति ने भी एक कॉमेडी फिल्म (‘पोस्टर बॉयज’) से ही बड़े परदे पर कदम रखा और अब उनकी शोहरत को नए स्तर तक ले जाने में ये कॉमेडी फिल्म ही उनकी बड़ी मदद करने वाली है।
‘भुज द प्राइड ऑफ इंडिया’ और ‘83’ जैसी फिल्मों के साइड हीरो रहे एमी विर्क पहली बार किसी हिंदी फिल्म की मेन लीड में हैं और उनकी मौजूदगी परदे पर अपने अलग रंग जमाने में कामयाब रहती है। विक्की कौशल और तृप्ति डिमरी के सामने हालांकि प्रेम त्रिकोण में उनका जोड़ जमता नहीं है लेकिन इस कहानी का यही रंग उन्हें इसमें फिट भी करता है। कहानी की जरूरत एक ऐसे किरदार की है जो क्लाइमेक्स में हीरो का मददगार बन जाए और ऐसा किरदार करने के लिए रीजनल सिनेमा के हीरो से बेहतर विकल्प शायद फिल्म बनाने वालों के पास रहा नहीं होगा। मां कोरोना के किरदार में नेहा धूपिया अपनी उपस्थिति दर्ज कराने में सफल हैं। शीबा चड्ढा फिल्म दर फिल्म अपनी इस नई पारी में भी निखरती जा रही हैं। फर्टिलिटी सेंटर चलाने वाले डॉक्टर के किरदार में फैसल राशिद भी अपना असर छोड़ने में कामयाब रहे। फिल्म के करीब 80 फीसदी संवाद और गाने पंजाबी में हैं, ये इस फिल्म की बड़ी कमजोरी है। अगर आपको काम चलाऊ पंजाबी आती है तो ही ये फिल्म आप ‘एंजॉय’ कर सकते हैं। कोई आधा दर्जन सिनेमैटोग्राफरों ने मिलकर इसका लुक एंड फील कमाल रखा है।