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Agni Movie Review: फिल्म हिंदी में, उम्मीद हिंदी दर्शकों से, और निर्देशक का नाम तक नहीं सही लिख पाए हिंदी में

Fri, 06 Dec 2024 06:48 PM IST
Pankaj Shukla पंकज शुक्ल
Updated Fri, 06 Dec 2024 06:48 PM IST
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Agni Movie 2024 Review by Pankaj Shukla Pratik Gandhi Saiyami Kher Jitendra Divyenndu Saie and Rahul Dholakia
फिल्म 'अग्नि' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
Movie Review
अग्नि
कलाकार
प्रतीक गांधी , संयमी खेर , जितेंद्र जोशी , दिव्येंदु , साई तम्हणकर , उदित अरोड़ा और अनंत जोग आदि
लेखक
राहुल ढोलकिया और विजय मौर्या
निर्देशक
राहुल ढोलकिया
निर्माता
फरहान अख्तर और रितेश सिधवानी आदि
रिलीज
6 दिसंबर 2024
ओटीटी
अमेजन प्राइम वीडियो
रेटिंग
2/5

सीधे ओटीटी पर रिलीज होने वाली फिल्में तीन प्रकार की होती हैं। एक वो जो सीधे ओटीटी के लिए ही बनती हैं। दूसरी जो पहले सिनेमाघरों में रिलीज होती हैं और फिर ओटीटी पर आती हैं और तीसरी वो जो बनती तो सिनेमाघरों में रिलीज के लिए हैं, लेकिन वितरकों के हाथ खड़े कर देने पर येन केन प्रकारेण उन्हें ओटीटी पर ठेल दिया जाता है। निर्देशक राहुल ढोलकिया की फिल्म ‘अग्नि’ इसी तीसरी कैटेगरी की फिल्म है। इसी साल की 25 जून को इसे सेंसर सर्टिफिकेट मिला सिनेमाघरों में प्रदर्शित होने के लिए। फिल्म अब जाकर दिसंबर में रिलीज हो रही है ओटीटी पर। मलयालम फिल्म ‘फायरमैन’ को छोड़ दें तो अग्निशमन कर्मियों की कहानियां बड़े परदे पर ज्यादा कही नहीं गई हैं। हिंदी में बहुत पहले एक फिल्म आई थी निर्देशक रवि चोपड़ा की ‘द बर्निंग ट्रेन’, लेकिन उसकी कहानी में भी आग बुझाने वालों का दर्द नहीं ही था।

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Agni Movie 2024 Review by Pankaj Shukla Pratik Gandhi Saiyami Kher Jitendra Divyenndu Saie and Rahul Dholakia
फिल्म 'अग्नि' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

ज्वाला में जो जीते हैं...
‘ज्वाला में जो जीते हैं, वो अमर हो जाते हैं’ अच्छी लाइन है उस कविता की जिसके सस्वर वाचन से ये फिल्म शुरू होती है। आग बुझाने की नौकरी करने वालों की कहानी पर बनी फिल्म ‘अग्नि’ भी अपने मूल विचार में अच्छी फिल्म लगती है। समाज के इस बेहद अहम हिस्से की कहानियां बड़े परदे पर क्यों नहीं कहीं गई? अपने आप में विचारणीय प्रश्न है। कुल मिलाकर साल में एक ही बार इन कर्मचारियों को इनाम की बारी आती है और वह है 26 जनवरी पर मिलने वाला राष्ट्रपति पदक। बाकी साल कहीं इन लोगों का खैरमकदम जैसा होता दिखता नहीं है। पुलिस वाले भी इनकी खास इज्जत करते नहीं दिखते, ऐसा फिल्म में दिखाया गया है। राहुल ढोलकिया ने सात साल पहले अपनी आखिरी फिल्म बनाई थी, ‘रईस’। फरहान और रितेश की कंपनी एक्सेल एंटरटेनमेंट ने ही वो फिल्म भी बनाई थी। फिल्म के हीरो थे शाहरुख खान। और, अब बीते दो साल से ये कंपनी रणवीर सिंह को लेकर भी ‘डॉन 3’ शुरू नहीं कर पा रही है। ‘अग्नि’ को सिनेमाघरों तक पहुंचाने के लिए जितनी रकम की जरूरत होती, उतनी भी शायद एक्सेल एंटरटेनमेंट को खर्च करना ठीक नहीं लगा। और, ये फिल्म पहुंच गई सीधे ओटीटी पर।

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Agni Movie 2024 Review by Pankaj Shukla Pratik Gandhi Saiyami Kher Jitendra Divyenndu Saie and Rahul Dholakia
जितेंद्र जोशी-साई तम्हणकर - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

इज्जत की तलाश में भटकते किरदार
ओटीटी के दर्शक भी इन दिनों होशियार हो चले हैं। किसी भी फिल्म पर दो घंटे खपाने से पहले तमाम तरह की जानकारियां इकट्ठी करते हैं। फिल्म ‘अग्नि’ के बारे में विशेष जानकारी यही है कि इसमें प्रतीक गांधी, जितेंद्र जोशी और संयमी खेर जैसे नामचीन सितारे अग्निशमन दल के कर्मचारी बने हैं। सबके सब किरदार इज्जत तलाश रहे हैं। प्रतीक का किरदार विट्ठल एक फायर स्टेशन का अधिकारी है। संयमी ने अपने किरदार अवनी के लिए देश की पहली महिला अग्निशमन दल कर्मी हर्षिणी कान्हेकर के व्यक्तित्व से प्रेरणा पाई है। जितेंद्र जोशी का किरदार महादेव का है। अपने पिता और अपने भाई के बलिदान को ‘इज्जत’ न मिलने से वह खफा है। बीच में एक कहानी अवनी और जोसेफ के प्रेम की भी चल रही है, लेकिन कहानी का जैसा कलेवर है, उसमें जन्मदिन के एक समारोह में एक्सेल की ही एक फिल्म के गाने पर थिरकने के अलावा बाकी कुछ इस प्रेम कहानी में हो नहीं पाता है।

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Agni Movie 2024 Review by Pankaj Shukla Pratik Gandhi Saiyami Kher Jitendra Divyenndu Saie and Rahul Dholakia
प्रतीक गांधी-संयमी - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

प्रतीक और संयमी का दमदार अभिनय
फिल्म ‘अग्नि’ प्रतीक गांधी और संयमी की फिल्म में मौजूदगी की वजह से ही दर्शक इसे देखने को उत्सुक दिखते हैं। प्रतीक धीरे धीरे अपने अभिनय को जिस ऊंचाई पर ले जाने में सफल हो रहे हैं, ये हिंदी सिनेमा में देखने वाली बात है। रंगमंच पर गढ़ा गया एक अभिनेता किसी भी किरदार को किस ऊंचाई तक ले जा सकता है, ये प्रतीक से सीखा जा सकता है। ये अलग बात है यहां तक आने में उनको समय बहुत लगा और हिंदी सिनेमा के दर्शक उन्हें सिनेमाघरों में स्वीकार करने में अब भी हिचक रहे हैं। ‘दो और दो प्यार’ उनकी बेहतरीन फिल्म थी, लेकिन, ‘अतिथि भूतो भव’, ‘मडगांव एक्सप्रेस’ और ‘डेढ़ बीघा जमीन’ उन्हें नहीं करनी चाहिए थी। संयमी फिल्म की दूसरी दमदार कलाकार हैं। वह फिल्म दर फिल्म खुद को निखार रही हैं। हर कहानी में उनका किरदार पिछली से और मजबूत होकर सामने आ रहा है। ‘घूमर’ में उनका अभिनय भी एक मिसाल बन चुका है।

Agni Movie 2024 Review by Pankaj Shukla Pratik Gandhi Saiyami Kher Jitendra Divyenndu Saie and Rahul Dholakia
दिव्येंदु - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

दिव्येंदु ने सबसे ज्यादा किया निराश
राहुल ढोलकिया ने प्रतीक और संयमी के आसपास जो किरदार सजाए हैं, उनमें से जितेंद्र जोशी को छोड़कर दूसरा कोई फिल्म का ग्राफ उठाने में मदद नहीं करता। दिव्येंदु को कुछ दिन के लिए ब्रेक लेने की जरूरत है। उनका हर किरदार अब एक जैसा नजर आने लगा है। वह ‘मडगांव एक्सप्रेस’करें या ‘अग्नि’ कहीं कुछ अलग कोशिश उनके अभिनय में दिखती ही नहीं हैं। भारतीय फिल्म और टेलीविजन संस्थान, पुणे के इस छात्र से दर्शकों को फूलचंद त्रिपाठी से आगे जाने की बहुत उम्मीदें हैं, लेकिन दिव्येंदु हैं कि मुन्ना भैया में अटक कर रह गए हैं। उदित अरोड़ा ने जोसेफ के रूप में अच्छा काम किया है। साई तम्हणकर के लिए ऐसे किरदार बाएं हाथ का खेल हैं। रही बात कबीर शाह, परितोष तिवारी, कंचन मगारे, अभिषेक खांडेकर की तो वह माहौल जमाने और सीन सजाने का काम बखूबी कर ले गए। अनंत जोग को अरसे बाद परदे पर देखना सुखद रहा।

Agni Movie 2024 Review by Pankaj Shukla Pratik Gandhi Saiyami Kher Jitendra Divyenndu Saie and Rahul Dholakia
फिल्म 'अग्नि' रिव्यू - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

हिंदी फिल्म में हिंदी गलत लिखना...लानत है!
ये फिल्म हिंदी की है और इसकी तकनीकी टीम हिंदी ही ठीक से लिखने में विफल रही। सितारों के नाम गलत लिखे हैं और अपने निर्देशक का नाम तक इसकी तकनीकी टीम परदे पर सही नहीं लिख पाई। अब ऐसी टीम से क्या ही उम्मीद की जा सकती है! दुख की बात ये है कि हिंदी फिल्में बनाने वाले एक्सेल एंटरटेनमेंट जैसे बड़े प्रोडक्शन हाउस में भी ये देखने वाला कोई नहीं है। अमेरिकी ओटीटी अमेजन से तो खैर इन बातों की तरफ ध्यान देने की सोचना भी दूर की कौड़ी है। जॉन स्टुअर्ट एडुरी का बैकग्राउंड म्यूजिक शुरू के एक घंटे बहुत सही रफ्तार में रहता है लेकिन जैसै जैसे फिल्म गति पकड़ने लगती है, उनका ओरिजिनल स्कोर भी ओरिजिनल जैसा सुनना बंद हो जाता है। के यू मोहनन की सिनेमैटोग्राफी ठीक ठाक है। शोम्मा गोस्वामी ने जरूरत के हिसाब से प्रोस्थेटिक बढ़िया बनाए हैं और एक्शन दृश्यों में के रवि वर्मा ने भी फिल्म को संभालने की कोशिश की है। लेकिन, एक सामाजिक विषय को लेकर आगे बढ़ती फिल्म ‘अग्नि’ की कहानी जैसे ही इसके किरदारों की व्यक्तिगत कहानी बनना शुरू करती है, अपनी तपिश खो देती है।


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