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स्कूल की फीस भरने के लिए वॉयस आर्टिस्ट बने, राजेश खन्ना संग की 25 फिल्में, ‘शोले’ में जेलर का रोल बन गया पहचान
Mon, 20 Oct 2025 09:25 PM IST
सिराजुद्दीन
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला
Published by: सिराजुद्दीन
Updated Mon, 20 Oct 2025 09:25 PM IST
सार
Who Is Asrani?: बॉलीवुड एक्टर असरानी का आज निधन हो गया है। असरानी ने कई बड़ी फिल्मों में अभिनय किया और कॉमेडी की। आइए उनके बारे में जानते हैं।
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असरानी
- फोटो : एक्स
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विस्तार
बॉलीवुड के बेहतरीन सपोर्टिंग एक्टर असरानी का आज निधन हो गया है। वह अपनी बेहतरीन कॉमेडी के लिए जाने जाते थे। अपने पांच दशक लंबे करियर में उन्होंने लगभग 350 फिल्मों में अभिनय किया। वह फिल्म 'शोले' में जेलर का किरदार निभाने के लिए जाने जाते थे। कई फिल्मों में उन्होंने अभिनेता के दोस्त का किरदार निभाया। अपने करियर में उन्होंने लगभग 6 फिल्मों का निर्देशन किया था। आइए जानते हैं उनके करियर से जुड़े कुछ दिलचस्प किस्से।
स्कूल की फीस भरने के लिए किया काम
असरानी का पूरा नाम गोवर्धन असरानी था। वह 1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में पैदा हुए। उनके पिता कारोबारी थे। हालांकि असरानी को कारोबार में दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर से ही पूरी की। पढ़ाई के साथ उन्होंने अपना खर्च उठाने के लिए ऑल इंडिया रेडियो में बतौर वॉयस ओवर आर्टिस्ट काम किया।
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स्कूल की फीस भरने के लिए किया काम
असरानी का पूरा नाम गोवर्धन असरानी था। वह 1 जनवरी 1941 को राजस्थान के जयपुर में पैदा हुए। उनके पिता कारोबारी थे। हालांकि असरानी को कारोबार में दिलचस्पी नहीं थी। उन्होंने अपनी शुरुआती पढ़ाई जयपुर से ही पूरी की। पढ़ाई के साथ उन्होंने अपना खर्च उठाने के लिए ऑल इंडिया रेडियो में बतौर वॉयस ओवर आर्टिस्ट काम किया।
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असरानी
- फोटो : एक्स
असरानी को पहला ब्रेक
पढ़ाई पूरी होने के बाद असरानी ने 1960 से लेकर 1962 तक साहित्य कलभाई ठक्कर से अभिनय सीखा। साल 1962 में काम तलाशने के लिए वह मुंबई गए। 1963 में असरानी की मुलाकात किशोर साहू और ऋषिकेश मुखर्जी से हुई। उन्होंने असरानी को पेशेवर रूप से अभिनय सीखने की सलाह दी। 1964 में असरानी ने फिल्म संस्थान पुणे में दाखिला लिया और अभिनय सीखा। असरानी को सबसे पहला ब्रेक फिल्म 'हरे कांच की चूड़ियां' में मिला। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता बिश्वजीत के दोस्त का किरदार निभाया।
हिंदी फिल्मों में मिलने लगा काम
पहली फिल्म में अपने अभिनय से सबका दिल जीतने वाले असरानी ने साल 1967 में गुजराती फिल्म में मुख्य किरदार निभाया। उन्होंने 4 और गुजराती फिल्मों में अभिनय किया। साल 1967 से लेकर 1969 तक उन्हें हिंदी फिल्मों में ऑफर नहीं मिला। साल 1969 में ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें फिल्म 'सत्यकाम' में सपोर्टिंग रोल दिया। फिल्म 'मेरे अपने' से उन्हें पहचान मिली। साल 1971 के बाद से असरानी को फिल्मों में कॉमेडियन का किरदार या अभिनेता के दोस्त का किरदार मिलने लगा।
पढ़ाई पूरी होने के बाद असरानी ने 1960 से लेकर 1962 तक साहित्य कलभाई ठक्कर से अभिनय सीखा। साल 1962 में काम तलाशने के लिए वह मुंबई गए। 1963 में असरानी की मुलाकात किशोर साहू और ऋषिकेश मुखर्जी से हुई। उन्होंने असरानी को पेशेवर रूप से अभिनय सीखने की सलाह दी। 1964 में असरानी ने फिल्म संस्थान पुणे में दाखिला लिया और अभिनय सीखा। असरानी को सबसे पहला ब्रेक फिल्म 'हरे कांच की चूड़ियां' में मिला। इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता बिश्वजीत के दोस्त का किरदार निभाया।
हिंदी फिल्मों में मिलने लगा काम
पहली फिल्म में अपने अभिनय से सबका दिल जीतने वाले असरानी ने साल 1967 में गुजराती फिल्म में मुख्य किरदार निभाया। उन्होंने 4 और गुजराती फिल्मों में अभिनय किया। साल 1967 से लेकर 1969 तक उन्हें हिंदी फिल्मों में ऑफर नहीं मिला। साल 1969 में ऋषिकेश मुखर्जी ने उन्हें फिल्म 'सत्यकाम' में सपोर्टिंग रोल दिया। फिल्म 'मेरे अपने' से उन्हें पहचान मिली। साल 1971 के बाद से असरानी को फिल्मों में कॉमेडियन का किरदार या अभिनेता के दोस्त का किरदार मिलने लगा।
असरानी
- फोटो : एक्स
इन वर्षो में किया सबसे ज्यादा काम
मुखर्जी, आत्मा राम और गुलजार जैसे निर्देशकों ने असरानी को 1971 से 1974 में कई फिल्मों में काम दिया। लोगों ने उनके काम की खूब तारीफ की। 1970 के दशक में असरानी की सबसे ज्यादा मांग बढ़ी। उन्होंने 1970 से लेकर 1979 तक 101 फिल्मों में काम किया। फिल्म 'नमक हराम' में काम करने के बाद असरानी और राजेश खन्ना दोस्त बन गए। इसके बाद राजेश खन्ना जिस फिल्म में काम करते, वह निर्माताओं से कहते कि असरानी को भी काम दें। असरानी ने राजेश खन्ना के साथ 25 फिल्मों में काम किया।
इन फिल्मों के लिए मशहूर हैं असरानी
असरानी ने साल 1970 से लेकर 1979 तक 'मेरे अपने', 'कोशिश', 'बावर्ची', 'अभिमान', 'महबूबा', 'पलकों की छांव में' और 'बंदिश' जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल किए। उन्होंने 1977 में फिल्म 'चला मुरारी हीरो बनने' में लीड रोल निभाया। फिल्म की काफी तारीफ हुई।
मुखर्जी, आत्मा राम और गुलजार जैसे निर्देशकों ने असरानी को 1971 से 1974 में कई फिल्मों में काम दिया। लोगों ने उनके काम की खूब तारीफ की। 1970 के दशक में असरानी की सबसे ज्यादा मांग बढ़ी। उन्होंने 1970 से लेकर 1979 तक 101 फिल्मों में काम किया। फिल्म 'नमक हराम' में काम करने के बाद असरानी और राजेश खन्ना दोस्त बन गए। इसके बाद राजेश खन्ना जिस फिल्म में काम करते, वह निर्माताओं से कहते कि असरानी को भी काम दें। असरानी ने राजेश खन्ना के साथ 25 फिल्मों में काम किया।
इन फिल्मों के लिए मशहूर हैं असरानी
असरानी ने साल 1970 से लेकर 1979 तक 'मेरे अपने', 'कोशिश', 'बावर्ची', 'अभिमान', 'महबूबा', 'पलकों की छांव में' और 'बंदिश' जैसी फिल्मों में सपोर्टिंग रोल किए। उन्होंने 1977 में फिल्म 'चला मुरारी हीरो बनने' में लीड रोल निभाया। फिल्म की काफी तारीफ हुई।
असरानी
- फोटो : एक्स
बतौर कॉमेडियन इन फिल्मों में किया अभिनय
असरानी ने 1970 के दशक में कई फिल्मों में कॉमेडियन का किरदार निभाया। इन फिल्मों में 'आज की ताजा खबर', 'रोटी', 'प्रेम नगर', 'चुपके चुपके', 'छोटी सी बात', 'रफू चक्कर', 'शोले', 'फकीरा', 'छैला बाबू', 'फांसी', 'दिल्लगी', 'हीरा लाल पन्नालाल' और 'पति पत्नी और वो' शामिल हैं। कई फिल्मों में कॉमेडियन का किरदार निभाने वाले असरानी ने 'खून पसीना' में सीरियस रोल भी निभाया है।
असरानी बने निर्देशक और निर्माता
साल 1974 में असरानी ने एक गुजराती फिल्म का निर्देशन किया। इसमें उन्होंने खुद लीड रोल निभाया। साल 1982 में उन्होंने एक गुजराती प्रोडक्शन हाउस बनाया। कंपनी को 1996 में अच्छा फायदा हुआ।
2000 के दशक में असरानी ने कई फिल्मों में अभिनय किया। इसमें 'चुप चुप के', 'हेरा फेरी', 'हलचल', 'दीवाने हुए पागल', 'गरम मसाला', 'भागम भाग' और 'मालामाल वीकली' शामिल हैं।
असरानी ने 1970 के दशक में कई फिल्मों में कॉमेडियन का किरदार निभाया। इन फिल्मों में 'आज की ताजा खबर', 'रोटी', 'प्रेम नगर', 'चुपके चुपके', 'छोटी सी बात', 'रफू चक्कर', 'शोले', 'फकीरा', 'छैला बाबू', 'फांसी', 'दिल्लगी', 'हीरा लाल पन्नालाल' और 'पति पत्नी और वो' शामिल हैं। कई फिल्मों में कॉमेडियन का किरदार निभाने वाले असरानी ने 'खून पसीना' में सीरियस रोल भी निभाया है।
असरानी बने निर्देशक और निर्माता
साल 1974 में असरानी ने एक गुजराती फिल्म का निर्देशन किया। इसमें उन्होंने खुद लीड रोल निभाया। साल 1982 में उन्होंने एक गुजराती प्रोडक्शन हाउस बनाया। कंपनी को 1996 में अच्छा फायदा हुआ।
2000 के दशक में असरानी ने कई फिल्मों में अभिनय किया। इसमें 'चुप चुप के', 'हेरा फेरी', 'हलचल', 'दीवाने हुए पागल', 'गरम मसाला', 'भागम भाग' और 'मालामाल वीकली' शामिल हैं।
पत्नी मंजू के साथ असरानी
- फोटो : एक्स
असरानी ने मंजू से की शादी
असरानी को फिल्म 'आज की ताजा खबर' में काम करते हुए मंजू बंसल से प्यार हो गया। कुछ दिनों बाद उन्होंने उनसे शादी कर ली। शादी के बाद उन्होंने 'चांदी सोना', 'जश्न ए बहार' और 'नालायक' जैसी फिल्मों में एक साथ काम किया। साल 1980 में असरानी और मंजू ने असरानी के निर्देशन में बनी फिल्म 'हम नहीं सुधरेंगे' में अभिनय किया।
असरानी को फिल्म 'आज की ताजा खबर' में काम करते हुए मंजू बंसल से प्यार हो गया। कुछ दिनों बाद उन्होंने उनसे शादी कर ली। शादी के बाद उन्होंने 'चांदी सोना', 'जश्न ए बहार' और 'नालायक' जैसी फिल्मों में एक साथ काम किया। साल 1980 में असरानी और मंजू ने असरानी के निर्देशन में बनी फिल्म 'हम नहीं सुधरेंगे' में अभिनय किया।