Kangana Ranaut: उल्लू, ऑल्ट जैसे OTT प्लेटफॉर्म्स पर सरकार ने लगाया बैन, कंगना रनौत ने की फैसले की तारीफ
OTT Platform Ban: भारत सरकार ने बड़ा फैसला लेते हुए उल्लू, ऑल्ट बालाजी, देसीफ्लिक्स, बिग शॉट्स समेत कई ऐप्स पर बैन लगा दिया है। सरकार ने ये फैसला अश्लील कंटेंट के खिलाफ नीति के तहत लिया है। सरकार के इसी फैसले का कंगना रनौत ने स्वागत किया।
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डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के अश्लीलता परोसे जाने के खिलाफ अब केंद्र सरकार ने कड़ा रुख अपनाते हुए बड़ा फैसला लिया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 25 ओटीटी एप्लिकेशंस को तत्काल प्रभाव से बंद कर दिया है। सरकार का मानना है कि इन प्लेटफॉर्म्स पर दिखाया जा रहा कंटेंट भारतीय संस्कृति, समाज की नैतिकता और युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल रहा था।
कंगना रनौत ने की फैसले की तारीफ
सरकार के इस कदम की सराहना बॉलीवुड अभिनेत्री और बीजेपी सांसद कंगना रनौत ने खुलकर की है। उन्होंने कहा कि ये फैसला समाज की भलाई के लिहाज से बेहद जरूरी था। कंगना ने कहा, 'इस कदम का लंबे समय से इंतजार था। जब समाज में खुलेआम आपत्तिजनक और अश्लील सामग्री परोसी जा रही हो, तब एक मर्यादा तय करना जरूरी हो जाता है।' कंगना की ही तरह अभिनेता और गोरखपुर से सांसद रवि किशन ने भी इस फैसले का स्वागत किया है। उन्होंने कहा कि डिजिटल फ्रीडम के नाम पर अराजकता की अनुमति नहीं दी जा सकती और नियमों की एक लक्ष्मण रेखा होनी ही चाहिए।
किन ऐप्स पर पड़ा असर?
सरकार द्वारा बैन किए गए ओटीटी प्लेटफॉर्म्स में उल्लू, एएलटीटी, बिग शॉट्स, ऑल्ट बालाजी, नियॉनएक्स वीआईपी और देसीफ्लिक्स जैसे नाम शामिल हैं। इन पर ऐसे कंटेंट दिखाए जा रहे थे जिनमें नग्नता, अश्लील डायलॉग्स और कई बार पारिवारिक रिश्तों को भी गलत तरीके से पेश किया गया था। मंत्रालय ने इसे सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 67 और 67A, भारतीय दंड संहिता की धारा 292 और महिलाओं के अशोभनीय प्रस्तुतीकरण (प्रतिषेध) अधिनियम, 1986 का उल्लंघन माना।
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सरकार ने 14 मोबाइल एप्लिकेशन और 26 वेबसाइटों को ब्लॉक करने के निर्देश दिए हैं। साफ तौर पर सरकार की तरफ से निर्देश जारी कर दिया गया है कि इन सेवाओं को तत्काल प्रभाव से रोक दिया जाए।
पहले मिली थी चेतावनी
बता दें ये पहला मौका नहीं है जब सरकार ने इस दिशा में कदम उठाया है। सितंबर 2024 में ही इन सभी ओटीटी प्लेटफॉर्म्स को नोटिस जारी किया गया था, जिसमें उन्हें भारतीय कानूनों और आईटी नियमों के तहत आचार संहिता का पालन करने के लिए कहा गया था। लेकिन कई बार चेतावनी देने के बावजूद स्थिति में कोई सुधार नहीं देखा गया।