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डबल मीनिंग नहीं, सेक्स पर सीधी बात करता है यह डायलॉग
रोहित मिश्र
Updated Thu, 11 Jul 2013 09:37 AM IST
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इस शुक्रवार 'सिक्सटीन' नाम की एक फिल्म रिलीज हो रही है। सेक्स को लेकर टीनएज उम्र के किशोर क्या सोच रखते हैं यह पूरी फिल्म उसी के इर्द-गिर्द घूमती है।
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फिल्म के विवावास्पद ट्रेलर में लड़की लड़के से कहती है "मैंने तुम्हे इसलिए ड्रॉप कर दिया क्योंकि तुम्हारा छोटा है। मैं तुम्हारे मोबाइल की बात नहीं कर रही हूं।" यानी लोग इसे द्विअर्थी संवाद समझें इसके पहले ही लड़की साफ कर देती है कि अब सीधे तरीके से कहने का जमाना आ गया है।
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निर्देशन की दुनिया में लगभग अपरिचित निर्देशक राज पुरोहित इस फिल्म को निर्देशित कर रहे हैं। मगर फिल्म का यह ट्रेलर कई सवाल खड़े करता है। क्या ऐसी फिल्मों के लिए दर्शक तैयार हैं?
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देखें 'सिक्सटीन' का विवादास्पद ट्रेलर
'सिक्सटीन' के पहले ही इसी साल रिलीज हो चुकीं फिल्में 'गिप्पी', 'फुकरे', 'गो गोवा गॉन', 'जिंदगी 50-50' जैसी कई ऐसी फिल्में रिलीज हुईं जिनमें डबल मीनिंग की बजाय सीधे सेक्स से जुड़े टॉपिक पर चर्चा है। आइए जानें फिल्म से जुड़े लोग और विशेषज्ञ इस मुद्दे पर क्या कहते हैं-
'जिला गाजियाबाद' फिल्म के निर्देशक आनंद कुमार का कहना है कि समाज से पूछकर फिल्में बनाई भी नहीं जाती हैं। समाज अपनी तरह से चलता है और फिल्म अपनी तरह से। इस तरह के डायलॉग के लिए समाज तैयार नहीं है लेकिन फिल्में तैयार हैं।
फिल्मों के जानकार मिहिर पांड्या कहते हैं कि इसमें चौंकने की जरूरत बिल्कुल भी नहीं है। यह आज की जरूरत है। फिर ऐसे संवाद जानबूझ कर पब्लिसिटी के लिए रखे जाते हैं। अच्छी बात यह है कि दर्शक ऐसे संवादों से प्रभावित नहीं होते। वह सुनते हैं हंसते हैं और भूल जाते हैं।
फिल्म समीक्षक दीपक दुआ कहते हैं सेक्स और सेक्स से जुड़ी बातें समाज का हिस्सा हैं। लोग इसे फिल्मों में देखना चाहते हैं लेकिन इसके लिए अलग से फिल्में होनी चाहिए। फिर यहां सेंसर बोर्ड को भी निगाह रखनी चाहिए।
उन्होंने यह भी कहा कि फिल्म के साथ ट्रेलर पास करते समय उसे इस बात का ख्याल रखना चाहिए कि एक डायलॉग का कंसर्न बिगाड़कर प्रस्तुत किया जा सकता है।