Padma Vibhushan 2023: उस्ताद जाकिर हुसैन पद्म विभूषण से होंगे सम्मानित, जानें तबला वादक के बारे में सबकुछ
74वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश के सर्वोच्च पुरस्कारों पद्म अवॉर्ड का एलान किया गया, जिसमें उन्हें पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया है।
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तबले की ताल से लोगों को झूमने के लिए मजबूर करने वाले तबला नवाज उस्ताद जाकिर हुसैन को भी देश के सर्वोच्च सम्मान पद्म विभूषण से सम्मानित किया जाएगा। दरअसल, 74वें गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर देश के सर्वोच्च पुरस्कारों पद्म अवॉर्ड का एलान किया गया। 2023 के लिए राष्ट्रपति ने 3 युगल मामलों सहित 106 पद्म पुरस्कारों को प्रदान करने की मंजूरी दी है। सूची में 6 पद्म विभूषण, 9 पद्म भूषण और 91 पद्मश्री शामिल हैं। इस रिपोर्ट में हम आपको उस्ताद जाकिर हुसैन की जिंदगी से रूबरू करा रहे हैं।
दुनियाभर में अपने तबले का जादू चलाने वाले उस्ताद जाकिर हुसैन का 9 मार्च 1951 को मुंबई में हुआ था। जाकिर साहब ने मुंबई के सेंट जेवियर्स कॉलेज से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। उन्होंने छोटी सी उम्र में ही उन्होंने तबला बजाना शुरू कर दिया था। जाकिर हुसैन को उनकी यह कला विरासत में मिली थी। दरअसल, जाकिर के पिता अल्ला रक्खा खान भी अपने जमाने के मशहूर तबला वादक थे। अपने पिता के हुनर को आगे बढ़ाते हुए, महज 11 साल की उम्र में जाकिर हुसैन ने अमेरिका में अपना पहला कॉन्सर्ट किया था। इस कॉन्सर्ट के बाद जाकिर के करियर को नई उड़ान मिली और यह मौके उनके लिए ऐसा साबित हुआ मानो जैसे उनकी कला को किसी ने पंख दे दिए हों।
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11 साल की उम्र में अमेरिका में तबले की ताल पर तालियां बजवाने वाले जाकिर हुसैन का साल 1973 में पहला एलबम लॉन्च हुआ था। जाकिर की पहली एल्बम का नाम 'लिविंग इन द मटेरियल वर्ल्ड' था। अपने पहले ही एल्बम के लिए न केवल भारत में बल्कि पूरी दुनिया में वाहवाही लूटी थी। जाकिर का करियर इस एल्बम को मिली सफलता के बाद नई बुलंदियों को छूने लगा था। धीरे-धीरे अपने हुनर के दम पर जाकिर हुसैन ने देश में ही नहीं विदेश में भी अपना नाम प्रसिद्ध कर लिया था। जाकिर की पॉपुलैरिटी का आलम यह है कि वह पहले भारतीय संगीतकार थे, जिन्हें ऑल-स्टार ग्लोबल कॉन्सर्ट में भाग लेने के लिए पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा की ओर से व्हाइट हाउस में आमंत्रित किया गया।
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जाकिर हुसैन बहुत से पुरस्कारों से भी सम्मानित किया जा चुका है। वहीं, संगीत की दुनिया का सबसे बड़ा ग्रैमी अवॉर्ड उन्हें दो बार, साल 1992 में 'द प्लेनेट ड्रम' और 2009 में 'ग्लोबल ड्रम प्रोजेक्ट' के लिए मिल चुका है। इसके साथ ही उन्हें पद्म श्री, पद्म विभूषण और संगीत नाटक का ऑस्कर अवॉर्ड भी दिया जा चुका है। जाकिर हुसैन को तबला बजाने के साथ-साथ एक्टिंग का भी शौक था, उन्होंने 1983 में फिल्म 'हीट एंड डस्ट' से अभिनय की दुनिया में कदम रखा था। इसके बाद 1988 में 'द परफेक्ट मर्डर', 1992 में 'मिस बैटीज चिल्डर्स' और 1998 में 'साज' फिल्म में भी उन्होंने अपनी एक्टिंग का जलवा दिखाया था। जाकिर हुसैन की पर्सनल लाइफ की बात करें तो 1978 में जाकिर हुसैन ने कथक नृत्यांगना एंटोनिया मिनीकोला से शादी की थी। वह इटैलियन थीं और उनकी मैनेजर भी। उनकी दो बेटियां हैं, अनीसा कुरैशी और इसाबेला कुरैशी।
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