{"_id":"6fabb1b5c20eacf4fabbabec7d29f941","slug":"song-of-ragini-mms-2-1","type":"story","status":"publish","title_hn":"'ये दुनिया पित्तल दी' इसके अलावा दुनिया क्या?","category":{"title":"Bollywood","title_hn":"बॉलीवुड","slug":"bollywood"}}
'ये दुनिया पित्तल दी' इसके अलावा दुनिया क्या?
अमर उजाला दिल्ली/टीम डिजिटल
Updated Mon, 31 Mar 2014 12:09 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
रागिनी एमएमएस 2 के इस हिट गाने की कहानी बड़ी मजेदार है। गाना अब सुपरहिट हो चुका है।
विज्ञापन
आप बेशक इस सवाल का जवाब देने में कंफ्यूज हो जाएं कि दुनिया क्या है? आप , मगर बॉलीवुड के पास इसके कई जवाब हैं। राकेश कुमार की लिखी लिरिक्स और सनी लियोनी की अदाओं पर गौर करें तो `दुनिया पीत्तल दी है’।
दुनिया का ये रूप लोगों को इतना पसंद आया है कि फिल्म आने से पहले ही ‘रागिनी एमएमएस-2’ का ये गाना यू ट्यूब पर खूब हिट हुआ। हालांकि इसे हिट बनाने में कनिका कपूर की आवाज का भी अहम रोल है। फ्लैशबैक में जाएं तो दुनिया के और भी कई रंग देखने को मिलते हैं।
विज्ञापन
1997 में ‘गुप्त’ फिल्म के एक गीत में आनंद बख्शी ने ‘दुनिया को हसीनों का मेला’ बताया था, तो फिल्म ‘त्रिमूर्ति’ में उन्होंने दुनिया को वेरी गुड और दुनिया वालों को वेरी बैड बताकर एक दिलचस्प फिलॉसफी से रूबरू करवाया था। इस गाने के बोल थे- ‘दुनिया रे दुनिया वेरी गुड वेरी गुड, दुनिया वाले वेरी बैड वेरी बैड, गोरे-गोरे मुखड़े दिल काले काले।’
विज्ञापन
वहीं ‘प्लेटफॉर्म’ फिल्म के एक गीत में तो दुनिया को अजीब ही रंग दिया गया। समीर ने इस गाने को लिखा और इसके बोल हैं- ’हा दुनिया की ठां ठां ठां, दुनिया की ठां ठां ठां’।
इन बोलों का मतलब बेशक समझ न आए, मगर जब भी बॉलीवुड सॉन्ग्स में दुनिया की चर्चा होती है तो ये गाना अपनी जगह बना ही लेता है। संभवतः इस गाने में दुनिया और उसकी दी हुई परेशानियों को गोली मारने की बात कही जा रही है, लेकिन बिंदास अंदाज में।
वहीं गोल्डन इरा के बॉलीवुड की बात करें तो दुनिया एक दिलचस्प पहेली की तरह सामने आती है। ‘तीसरी कसम’ में शैलेंद्र अपने गीत ‘दुनिया बनाने वाले क्या तेरे मन में समाई/तूने काहे को दुनिया बनाई’ से दुनिया के बनने पर ही सवाल उठाते हैं। वहीं ‘प्यासा’ में साहिर लुधियानवी का लिखा एक गीत इन सारी परिभाषाओं को पीछे छोड़ता दिखता है।
कहते हैं- ‘ये दुनिया अगर मिल भी जाए तो क्या है!’ बात सच भी है। मगर बॉलीवुड अपने सच खुद बनाता है। कोई नहीं जानता कि कब पीतल की ये दुनिया सोने में बदल जाए और कब लोहा जैसा शब्द भी गानों के बोल में शामिल हो जाएं। दुनिया की दिलचस्प उपमाएं गजलों में भी खूब मिलती हैं। ज
गजीत सिंह की गाई एक गजल कहती है, `दुनिया जिसे कहते हैं, जादू का खिलौना है, मिल जाए, तो मिट्टी है, खो जाए तो सोना है।’