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50 साल बाद बड़े पर्दे पर फिर देख सकेंगे सत्यजीत रे की ये फिल्म, बदला होगा पूरा रंग-रूप
Sat, 12 Jan 2019 11:48 AM IST
शिप्रा सक्सेना
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
मुंबई डेस्क, अमर उजाला
Published by: शिप्रा सक्सेना
Updated Sat, 12 Jan 2019 11:48 AM IST
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Goopy Gyne Bagha Byne
- फोटो : twitter
सत्यजीत रे की क्लासिक फिल्म 'गोपी गाइन बाघा बाइन' के स्वर्णजयंती वर्ष में इसी कहानी को एनीमेशन फिल्म के तौर पर पर्दे पर पेश करने की तैयारियां चल रही हैं। मशहूर गीतकार और लेखक गुलजार की किताबों के चित्र बनाती रहीं कलाकार शिल्पा रानाडे इस एनीमेशन फिल्म की निर्देशक हैं।
कम लोग ही जानते हैं कि गोपी और बाघा के अनोखे किरदारों वाली फिल्म 'गोपी गाइन बाघा बाइन' की कहानी दरअसल सत्यजीत रे के बाबा उपेंद्र किशोर रायचौधरी की कहानी है जिस पर रे ने बंगाली में फिल्म बनाई और जो 1969 में रिलीज हुई थी। इसी कहानी का एनीमेशन रूपांतरण तैयार हुआ है, 'गोपी गवैया, बाघा बजैया' के नाम से।
इस फिल्म की निर्देशक शिल्पा कहती हैं, ‘मैंने ये कहानी पढ़ी तो मुझे लगा कि ये कहानी तो ऐसी है जिस पर समय का कोई असर नहीं हुआ है। हम आज भी इस कहानी की आत्मा बरकरार रखते हुए इसे अपने हिसाब से देख सुन समझ सकते हैं। अपनी फिल्म को आज की पीढ़ी के हिसाब से तरोताजा दिखाने के लिए ही मैंने इसके लिए एनीमेशन का प्रयोग किया और इसकी भाषा भी आज के हिसाब से ही रखी है।’
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कम लोग ही जानते हैं कि गोपी और बाघा के अनोखे किरदारों वाली फिल्म 'गोपी गाइन बाघा बाइन' की कहानी दरअसल सत्यजीत रे के बाबा उपेंद्र किशोर रायचौधरी की कहानी है जिस पर रे ने बंगाली में फिल्म बनाई और जो 1969 में रिलीज हुई थी। इसी कहानी का एनीमेशन रूपांतरण तैयार हुआ है, 'गोपी गवैया, बाघा बजैया' के नाम से।
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इस फिल्म की निर्देशक शिल्पा कहती हैं, ‘मैंने ये कहानी पढ़ी तो मुझे लगा कि ये कहानी तो ऐसी है जिस पर समय का कोई असर नहीं हुआ है। हम आज भी इस कहानी की आत्मा बरकरार रखते हुए इसे अपने हिसाब से देख सुन समझ सकते हैं। अपनी फिल्म को आज की पीढ़ी के हिसाब से तरोताजा दिखाने के लिए ही मैंने इसके लिए एनीमेशन का प्रयोग किया और इसकी भाषा भी आज के हिसाब से ही रखी है।’
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