Sajini Shinde Ka Viral Video Review: निमरत कौर की जानदार अदाकारी, सस्पेंस थ्रिलर के शौकीनों के लिए अच्छी सौगात
फिल्म के माध्यम से एक संदेश देने की कोशिश की गई है कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है, जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है।
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फिल्म 'सजनी शिंदे का वायरल वीडियो' की कहानी हाई स्कूल टीचर सजनी शिंदे की है। सिंगापुर में अपनी ही जन्मदिन पार्टी पर वह खुशियां मना रही होती है और उसकी सहेली उसका वीडियो बना लेती है। वीडियो वायरल होता है तो शुरू हो जाता है उसके चरित्र का सत्यापन करने की एक अंधी होड़। बात स्कूल प्रबंधन तक पहुंचती है। अभिभावक गुस्से में हैं। प्रधानाध्यापक महिला है लेकिन उसे एक सहकर्मी महिला की भावनाओं की बजाय स्कूल की प्रतिष्ठा का ख्याल रखना है। मामला यहां तक बिगड़ता है कि एक दिन सजनी शिंदे लापता हो जाती है। छोड़ जाती है तो बस एक सुसाइड नोट। इसमें वह अपने पिता और बॉयफ्रेंड पर आरोप लगाती है। यहां कहानी में एंट्री होती है इंस्पेक्टर बेला बारोड़ की और असल फिल्म यहीं से शुरू होती है।
फिल्म 'सजनी शिंदे का वायरल वीडियो' के निर्देशक मिखिल मुसले ने अपने करियर की शुरुआत गुजराती फिल्म 'रॉन्ग साइड राजू' से की जिसे 64वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कारों में सर्वश्रेष्ठ गुजराती फीचर फिल्म का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। हिंदी में मिखिल मुसले ने फिल्म 'मेड इन चाइना' से डेब्यू किया। मिखिल की इस नई फिल्म की कहानी वैसे तो सामान्य है, लेकिन फिल्म की लेखन टीम मुसले, परिंदा जोशी, अनु सिंह चौधरी और क्षितिज पटवर्धन ने मिलकर इसका सांचा मजबूत तैयार किया है और फिल्म के संवाद भी अच्छे हैं। फिल्म के माध्यम से एक संदेश देने की कोशिश की गई है कि आत्महत्या किसी भी समस्या का समाधान नहीं हो सकता है, जिंदगी बहुत ही खूबसूरत है। गलतियां इंसान से ही होती है, इसका मतलब यह नहीं कि समाज के तानों के डर से अपनी खूबसूरत जिंदगी को खत्म कर दिया जाए। निर्देशक मिखिल मुसले ने शुरू से लेकर अंत तक थ्रिल और सस्पेंस बरकरार रखा और जब सजनी शिंदे की आत्महत्या की गुत्थी सुलझती है तो सभी हैरान हो जाते है।
फिल्म तकनीकी तौर पर भी अच्छी बन पड़ी है। त्रिभुवन बाबू सादिनेनी की सिनेमाटोग्राफी, सुमित कोटियन का संपादन और हितेन सोनिक का बैकग्राउंड स्कोर थ्रिल को बढ़ाता है और शुरू से अंतिम तक दर्शकों का रोमांच बन रहता। फिल्म के म्यूजिक पर सचिन-जिगर को थोड़ी सी और मेहनत करने की जरूरत थी। अगर फिल्म को सही तरीके से प्रमोट किया गया होता, तो निश्चित रूप से यह फिल्म अधिक से अधिक दर्शकों तक पहुंच सकती थी।