क्या बीजेपी को 'धर्म संकट में' डालेगी परेश रावल की ये फिल्म?
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परेश रावल की फिल्म 'धर्म संकट में' जल्द ही रिलीज होने वाली है। धर्म पर आधारित इस फिल्म की रिलीज से पहले ही चर्चा शुरू हो गई है। यह माना जा रहा है कि फिल्म के रिलीज से पहले बड़ा बवाल खड़ा हो सकता है।
'धर्म संकट में' फ़िल्म में अभिनेता नसीरुद्दीन शाह, परेश रावल और अन्नू कपूर पहली बार एक साथ नजर आएँगे। साल 2010 की ब्रिटिश कॉमेडी फिल्म 'द इंफिडल' की यह आधिकारिक रीमेक है।
यह फिल्म एक मुस्लिम मूल के व्यक्ति के इर्द-गिर्द घूमती है जो यहूदी परिवार में जन्म लेता है और बाद में हिन्दू परिवार द्वारा अडॉप्ट कर लिया जाता है। फिल्म में नसीरुद्दीन शाह धार्मिक नेता नीलानंद बाबा का किरदार निभा रहे हैं।
सोचने पर मजबूर फिल्म 'ओह माय गॉड' की सफलता के बाद एक बार फिर से परेश रावल धर्म में फंसे दिखने वाले हैं। अब तो वह बीजेपी के सांसद भी है ऐसे में फिल्म के बारे में जाने उनकी क्या है राय? और क्यों दे रहे हैं वह सेंसर बोर्ड को नसीहत?
सेंसर बोर्ड पर निकाला गुस्सा
इस तरह की फिल्में करने से क्या समाज का नजरिया बदलेगा? यह पूछने पर परेश रावल कहते हैं, "मुझे नहीं लगता कि फिल्मों की वजह से समाज में कोई बड़ा बदलाव आता है।
हां, लेकिन लोग सोचने पर ज़रूर मजबूर हो जाते हैं। रही बात कॉन्ट्रोवर्सी की तो हम किसी की भावना को चोट पहुंचाने नहीं, बल्कि समाज में जो हो रहा है उसका आईना दिखाने निकले हैं।"
परेश रावल कहते हैं, "ओएमजी का मूल कंटेंट तो हमने दिखाया ही नहीं था। इसमें भी हम यही कर रहे हैं। यह थ्रिलर अलग तरह का है। धर्म के नाम पर सब लोग मरने को तैयार हैं, लेकिन धर्म क्या कहता है वह कहने को तैयार नहीं हैं।"
फिल्म के मुद्दे के अलावा परेश रावल ने सेंसर बोर्ड पर भी अपना गुस्सा निकाला। हाल ही में सेंसर बोर्ड ने शब्दों की एक लम्बी-चौड़ी सूची बनाई है, जिनका इस्तेमाल नहीं करने की हिदायत दी गई है।
लेकिन लगता है परेश रावल को सेंसर बोर्ड की इस दखल अंदाज़ी से बेहद नाराज़गी है। परेश रावल कहते हैं, "मैं सेंसर की किसी लिस्ट से सहमत नहीं हूँ। मुझे नो स्मोकिंग की पट्टी से भी नफरत है। मैं सेंसर बोर्ड को हिदायत देना चाहूँगा कि आप आईना मत पोंछिए, मुंह धो लीजिए।"
नसीर भी कम परेशान नहीं
नसीरुद्दीन शाह भी सेंसर बोर्ड से कुछ कम परेशान नहीं हैं। नसीर कहते हैं, "जब फ़िल्मों में कोई किसी का ख़ून करता है तब तो ये नोटिस नहीं डालते कि किसी का खून करने से आपकी सेहत को खतरा पहुंच सकता है!
फ़िल्मों में जब कोई बलात्कार का सीन आता है तब तो नहीं आता नोटिस। अगर आगे चलकर मैं कभी फ़िल्म बनाऊंगा तो मैं तो हर एक सीन में नोटिस डालूँगा।"
नसीर का कहना है कि जब भी कोई फ़िल्म किसी धर्म पर बनती है तो धर्म से जुड़ी कोई पार्टी उस फ़िल्म के ख़िलाफ़ पीआईएल डाल देती है और इसका सबसे बड़ा उदाहरण है हाल ही में रिलीज फ़िल्म 'पीके'।
नसीर कहते हैं, "केवल फ़िल्में ही नहीं, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को टारगेट किया जाता है। हम फ़िल्म के विषय में विश्वास रखते हैं, इसलिए इसके साथ खड़े हैं।"नसीर कहते हैं, "अगर कोई व्यक्ति जमशेदपुर में शाहरुख खान पर केस कर दे तो इससे उस व्यक्ति को पब्लिसिटी मिल जाती है और हम एक्टर्स आसानी से टारगेट बन जाते हैं।"
फिल्म 'धर्म संकट में' को फुवाद खान ने निर्देशित किया है। ये फ़िल्म 10 अप्रैल को रिलीज हो रही है।