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यूं न हो कि ऊपर खुदा और नीचे आप...
अमर उजाला,मुंबई
Updated Sat, 28 Dec 2013 02:52 PM IST
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पढ़िए अभिनेता फारुख शेख का इकबालनामा। जो खुद उन्होंने कभी किया था।
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फारुख शेख की लोकप्रियता की एक वजह छोटे पर्दे पर उनका शो ‘जीना इसी का नाम है’ भी था। समाज और सिनेमा की शख्सीयतों से बातचीत का इतना सहज कार्यक्रम कभी न पहले और न बाद में देखा गया। क्या था इसमें ऐसा जो लोग कभी भुला न सके।
मैं आपको ‘जीना इसी का नाम है’ की कामयाबी और लोकप्रियता का राज बताता हूं। उस शो की कोई स्क्रिप्ट नहीं होती थी। हम शो में जब लोगों से मिलते थे तो ये वो लोग होते थे जिनसे मैं वाकिफ था। जो मेरे दोस्त थे।
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अब जैसे आप जब मेरे घर खाने पर आएंगे और मैं आपकी कामयाबियों से वाकिफ रहूंगा तो जाहिर कि उन पर बातें करते हुए दो बातें मजाक की भी कर लूंगा। मैं थोड़ी सी आपकी खिंचाई भी कर लूंगा क्योंकि मैं आपसे मोहब्बत करता हूं। इन सबके बीच मेरी कोशिश होगी कि आप जिस गैर-मामूली कामयाबी के मालिक हो गए हैं, मैं उसका जिक्र करूं।
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मेरी कोशिश होगी कि जब आप मेरे घर से लौटें तो आपको लगे कि खाना खाने के साथ खुशी भी मिली। आपको लगे कि अगर मैं फारुख शेख के घर छह फीट का गया था तो छह फीट एक इंच का होकर लौटा हूं।
इस शो में हम यह भी ध्यान रखते थे कि मेहमान को लेकर इतने उत्साहित रहें कि साहब ऊपर खुदा है और नीचे आप हैं... अब आपकी क्या बात करें। ऐसे में सारी बातें सहज और तात्कालिक होती थीं। बिना किसी स्क्रिप्ट के। मैं ऊपरवाले का शुक्रगुजार हूं कि उस शो में जितने लोग आए उन्होंने हमेशा मुझ पर भरोसा रखा कि ये हमारे कद को घटाने या छोटा करने की कोशिश नहीं करेंगे।
लेकिन वे जानते थे कि फारुख शेख उस तरह से मक्खन लगाने की भी कोशिश नहीं करेंगे, जैसा आम तौर पर ऐसे चैट शो में होता है। इस कारण वह शो लोगों को जिंदा भी लगा और हकीकत जुड़ा हुआ भी लगा।
उस शो की खूबसूरती यह होती थी कि हम तैयारी तो करते थे कि फलां महोदय से उस फिल्म या उस घटना की बात करेंगे, लेकिन फॉर्मेट ऐसा था कि तैयारियां धरी रह जाती थीं। बीच में ही कोई बात या कोई शख्स ऐसा निकल आता था, जिसकी जानकारी किसी को नहीं होती थी। तब बात की दिशा ही बदल जाती थी। एक नई बात ही सामने आ जाती थी। इससे जिंदादिली और मजे का आलम कायम रहता था।