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नदियां चले, चले रे धारा... तुझको चलना होगा...
वेदविलास उनियाल
Updated Thu, 24 Oct 2013 01:36 PM IST
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भारतीय फिल्म संगीत में मांझी गीतों की अपनी खूबसूरती रही है। मन्ना डे ने मांझी गीतों को बहुत तन्मयता से गाया है। खासकर बंगाल की पृष्ठभूमि में ऐसे मांझी गीत उभर कर आए हैं।
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दूर सागर में नाव खेते मांझी, घर की यादें, लहरों से खेलते मांझियों को पुकार को गीतकारों ने महसूस किया। अप्रतिम गीत बने। ऐसे गीत जिनमें गहरा जीवन दर्शन था।
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नदियां चले, चले रे धारा, तुझको चलना होगा, तुझको चलना होगा....जीवन कहीं भी ठहरता नहीं है, आंधी या तूफां में रुकता नहीं है, तू ना चलेगा तो चल देंगी राहें, जीवन को तरसेगी तेरी निगाहें। पार हुआ वो रहा जो सफर में, जो भी रुका वो गया फिर भंवर में, नाव तो क्या बह जाए किनारा, तुझको चलना होगा...
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कल्याणजी आनंदजी के संगीत में यह गीत तैयार हुआ था। और इसे मन्ना डे ने गाया था। यह मांझियों की जिंदगी है। सुबह सूरज उगने से पहले उन्हें अनंत समुद्र की धाराओं में आगे बढ़ना होता है। जिंदगी का यह सफर कहीं रुकता नहीं है।
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इस गीत को संवारने के लिए कल्याणजी ने बंगाल के लोकगायकों को बुलाया था। उन्होंने मांझियों के अलाप गाए। उनसे पहले कहा गया कि कुछ समय मांझियों के साथ रहे, उनके जीवन को समझें।
गीत में जल धारा की तंरग को तो सुना ही जाना था। कल्याणजी आनंदजी ने कई प्रयोग किए। पतले कागज को हिलाकर देखा, पीतल को बजाकर देखा। बात नहीं जमी।
आखिर सूप में उड़द की दाल को लिया। छप छप की आवाज आने लगी। और संगीत की स्वर लहरियां गूंजने लगी। मन्ना डे के इस गीत की लहक आज भी बनी हुई है। फिल्म सफर के लिए इस गीत को इंदिवर ने लिखा था।
दूर है किनारा
फिल्म सौदागर का यह अनमोल गीत है। रवींद्र जैन के संगीत में इस मांझी गीत को भी मन्नाडे ने अपना स्वर दिया था। 1973 में सौदागर फिल्म आई।
रवींद्र जैन ने बंगाल के भटियाली धुन पर इस गीत की अविस्मरणीय धुन बनाई। हालांकि यह गीत कम सुना गया। लेकिन मांझी गीतों में यह यादगार गीत है।
मन्नाडे ने इसे पूरी तन्मयता से गाया। जलतरंग, रकाब , बांसुरी जैसे कई साजों पर यह गीत खिला है।