ये फिल्में क्यों हुईं हिट जरा आप ही बताइए?
बॉलीवुड में कोई दावे से नहीं कह सकता कि सितारों के बिना फिल्में नहीं चलतीं। साल 2013 में एक दर्जन से ज्यादा ऐसी फिल्में आईं, जिनमें बिकाऊ सितारे नहीं थे या फिर बिल्कुल ही नए चेहरे थे। इनमें सबसे चौंकाऊ फिल्म ग्रैंड मस्ती रही।
ये फिल्में अपने कंटेंट की वजह से न केवल चर्चित हुईं बल्कि बॉक्स ऑफिस पर हिट भी रहीं। इन्होंने करोड़ों कमाए। चलिए ऐसी ही कुछ फिल्मों की पड़ताल करते हैं।
हिट की वजह गाने या कुछ और?
निर्देशक मोहित सूरी की फिल्म आशिकी 2 लागत-कमाई के अनुपात में साल की सबसे बड़ी हिट है। यह एक लव स्टोरी थी और आम तौर पर बॉक्स ऑफिस के दिग्गज सितारों को ऐसी फिल्मों के लिए सेफ माना जाता है। लेकिन आशिकी 2 ने इस मिथक को एक बार फिर तोड़ा।
मात्र नौ करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म ने निर्माताओं को बॉक्स ऑफिस से 82 करोड़ रुपये कमा कर दिए। आदित्य रॉय कपूर और श्रद्धा कपूर को लेकर बनी इस फिल्म के बारे में किसी ने नहीं सोचा था कि यह लव स्टोरी इस कदर लोगों को दीवाना बना देगी। हां, इस फिल्म को सुपर हिट बनाने में इसके संगीत का बड़ा हाथ था।
अलग किस्म की कॉमेडी बनी वजह
निर्देशक मृगदीप लांबा की फिल्म फुकरे फिल्म इस साल का एक और बड़ा आश्चर्य है। फिल्म की डिमांड इतनी थी कि दिल्ली के कुछ सिनेमाघरों में इसे उतारने के बाद फिर से लगाया गया। चार युवा चेहरों –पुलकित सम्राट, अली फजल, मंजोत सिंह और वरुण शर्मा- की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जमकर कमाई की।
इस फिल्म की सीधी-सरल कहानी और पैसों के लिए आज के युवा की चाहत ने फिल्म को चमत्कारी सफलता दिलाई। आपको जानकर आश्चर्य होगा कि केवल पांच करोड़ रुपये में बनी इस फिल्म ने निर्माताओं को 35 करोड़ रुपये कमाकर दिए।
विषय अच्छा और मनोरंजक
अरशद वारसी अपनी इस फिल्म को कॉमेडी नहीं मानते। उन्होंने भले ही इसकी कामयाबी पर किसी को पार्टी नहीं दी, लेकिन जॉली एलएलबी ने उन्हें बॉक्स ऑफिस पर बिकने वाला सोलो स्टार बना दिया। लंबे अर्से से टिकट खिड़की पर ऐसा कोर्टरूम ड्रामा दर्शकों ने नहीं देखा था।
अरशद और बोमन ईरानी की जोड़ी कतई ऐसी नहीं थी, जिसे फिल्म की सफलता की गारंटी मान लिया जाए। निर्देशक सुभाष कपूर की फिल्म की स्क्रिप्ट और डायलॉग लोगों को कमाल लगे।
ज्यादातर समीक्षकों की राय फिल्म को लेकर भले ही बहुत अच्छी नहीं थी, लेकिन दर्शकों ने इसे सिर आंखों पर बैठाया। नतीजा यह कि 10 करोड़ के बजट में बनी फिल्म ने टिकट खिड़की पर 33 करोड़ रुपये बटोरे।
फिल्म की थीम थी अलग
धनुष भले ही राष्ट्रीय पुरस्कार विजेता ऐक्टर हों लेकिन हिंदी सिनेमा की पट्टी में उनकी इस फिल्म से पहले कोई पहचान नहीं थी। अतः सोनम के साथ उनकी जोड़ी को लोग स्वीकार करेंगे, इस बात की कोई गारंटी नहीं थी।
आश्चर्यजनक रूप से तमिल भाषाओं को यह सुपरस्टार बनारसी छोरा बन कर फिल्म में छा गया। लोगों ने उन्हें हाथोंहाथ लिया और तारीफों के पुल बांध दिए। निर्देशक आनंद एल.राय की इस फिल्म में दर्शकों ने धनुष के साथ बनारस के रंगों का भी मजा लिया।
फिल्म की कामयाबी में धनुष की सहजता और संगीत का बड़ा योगदान है। लंबे समय बाद सोनम कपूर को देख कर लगा कि वह अभिनय कर सकती हैं। जोड़ी जमी और रंग भी। 35 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 62 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की।
कॉमेडी जरा नए स्टाईल की
नए चेहरों के साथ टिकट खिड़की पर चमत्कार करने वाली एक और फिल्म इस बार निर्देशक डेविड धवन की चश्मे बद्दूर रही। जब उन्होंने 1981 में आई कॉमेडी चश्मे बद्दूर के रीमेक की घोषणा की थी तो कई लोगों को लगा था कि वे एक नाकाम फिल्म की तैयारी कर रहे हैं।
उस पर फिल्म में लिए गए चेहरे भी बॉक्स ऑफिस पर बिकाऊ नहीं थे। अली जफर, सिद्धार्थ, दिव्येंदु शर्मा और तापसी पन्नू की युवा टोली ने नए समीकरण गढ़े और फिल्म चल निकली। ऋषि कपूर का भी इसमें अहम योगदान था। सेक्स के हल्के तड़के वाली कॉमेडी दर्शकों को पसंद आई। नतीजा रहा, 25 करोड़ के बजट में 42 करोड़ की कमाई।