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ऐसे तो 30 साल पहले बन जाती की एंड का!

Tue, 22 Mar 2016 06:15 PM IST
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई
रवि बुले/अमर उजाला, मुंबई Updated Tue, 22 Mar 2016 06:15 PM IST
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Ki and Ka is 30 years old Idea
का & की मूवी की प्रमोशन के लिए चंडीगढ़ पहुंचे अर्जुन कपूर
रोचक आइडिये कभी मरते नहीं। 30 साल पहले विख्यात निर्देशक बासु चटर्जी ने फिल्म की एंड का जैसे आइडिये को पर्दे पर उतारने की पूरी तैयारी कर ली थी। मगर फिल्म बन न सकी। अब आर।बाल्कि समाज में स्त्री-पुरुष की बदलती भूमिका पर फिल्म ला रहे हैं।।।
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छोटी सी बात, चितचोर, रजनीगंधा, प्यार का घर, खट्टा-मीठा, बातों बातों में और शौकीन जैसी मध्यमवर्गीय जीवनशैली की शानदार फिल्मों के निर्देशक बासु चटर्जी और उनके सहायक/लेखक के बीच मतभेद नहीं हुए होते तो घर का कामकाज संभालते पति और नौकरीपेशा पत्नी को लेकर एक फिल्म वह 30 साल पहले बना चुके होते। परंतु आपसी झगड़े की वजह ऐसा नहीं हुआ। निर्देशक आर।बाल्कि अब इसी कथानक पर फिल्म ला रहे हैं, की एंड का।
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कहानियों के संकट से जूझ रहे बॉलीवुड में कोई अलग आइडिया दिखता है तो सबकी नजरें उस पर ठहरती हैं। बाल्कि की फिल्म में एक पढ़ा लिखा युवक घर पर रह कर पत्नी की भूमिका निभाता है और पत्नी नौकरीपेशा है। निर्देशक का कहना है कि समय के साथ आर्थिक-सामाजिक तानाबाना बदल रहा है।
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परंतु एक समय बासु चटर्जी की फिल्मों में काम करने वाले अभिनेता और 300 से ज्यादा डॉक्युमेंट्री फिल्में बना चुके देवेंद्र खंडेलवाल कहते हैं कि 30 साल पहले समाज में स्त्री-पुरुष के संबंधों में हो रहे बदलावों को ही रेखांकित करते हुए बासु चटर्जी ऐसी फिल्म बना रहे थे। लिम्का बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में देवेंद्र खंडेलवाल के नाम भारत में सबसे ज्यादा शॉर्टफिल्में बनाने का कीर्तिमान दर्ज है।

अर्जुन-करीना नहीं, देवेंद्र-टीना मुनीम होते इस फिल्म में

Ki and Ka is 30 years old Idea
अर्जुन कपूर - फोटो : ुाूू
देवेंद्र बताते हैं कि बासु दा की उस फिल्म में मुंबई में रहने वाले एक युवा जोड़े की कहानी थी, जो एक ही दफ्तर में नौकरी करता है। प्यार और विवाह के बाद जब युवती गर्भवती होती तब उनके सामने संकट खड़ा होता हैं क्योंकि सिर्फ एक की कमाई से घर नहीं चल सकता। संकट आगे चलकर जटिल हो जाता है क्योंकि पत्नी पति से अधिक कमाती है। अगर वह नौकरी छोड़ दे तो आमदनी और कम हो जाएगी। ऐसे में उनका बूढ़ा मकान मालिक सलाह देता है कि जो व्यक्ति कम कमाता है वह घर में रहे और ज्यादा आमदनी वाला नौकरी करे। इस तरह कहानी में पति घर तथा बच्चे की देखभाल करता है और पत्नी बाहर नौकरी करती है।

देवेंद्र के अनुसार बासु चटर्जी के एक सहायक लक्ष्मी पांडे ने यह कहानी लिखी थी और इसकी शूटिंग की तैयारी भी हो गई थी। बासु चटर्जी ने फिल्म के लिए देवेंद्र खंडेलवाल को नायक और टीना मुनीम को नायिका के रूप में चुना था। मगर शूटिंग से कुछ दिन पहले ही लक्ष्मी पांडे किसी बात पर बासु चटर्जी से नाराज हो गए और कहा कि अपनी कहानी मैं आपको नहीं दूंगा। काफी मनाने पर भी वह नहीं माने और शूटिंग के स्तर पर पहुंच कर फिल्म रुक गई।

की एंड का से जुड़े सूत्रों की मानें तो इस फिल्म में भी अर्जुन और करीना एक जटिल परिस्थिति में फंसते हैं जहां उनके रिश्ते में जबर्दस्त तनाव पैदा हो जाता है। उन्हें तय करना पड़ता है कि आखिर दोनों में कोई एक घर और दूसरा बाहर की जिम्मेदारी लेगा। फिल्म में करीना बेहद महत्वाकांक्षी युवती के किरदार में हैं जो हर हाल में अपने करिअर में आगे बढ़ना चाहती हैं। अतः जब फैसले की बारी आती है तो उनके पति बने अर्जुन कपूर घर की देखभाल का निर्णय करते हैं। अर्जुन को यह फैसले को लेने में अमिताभ और जया बच्चन मदद करते हैं। दोनों इस फिल्म में मेहमान भूमिका में नजर आएंगे।
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